यूपी में लगातार चौथे महीने सस्ती हुई बिजली: बिलों में 5.24% की कटौती, जनता को 424 करोड़ की राहत
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को लगातार चौथे महीने राहत। एफपीपीएएस दर घटने से बिजली बिल में 5.24% की कटौती, जनता को ₹424 करोड़ की सीधी बचत।
उत्तर प्रदेश में बिजली उपभोक्ताओं को ऊर्जा बिलों में लगातार चौथे महीने बड़ी आर्थिक राहत मिलने जा रही है। ईंधन और विद्युत खरीद लागत में आई कमी का सीधा फायदा आम नागरिकों तक पहुंचाते हुए आगामी बिलों में 5.24 प्रतिशत की कटौती करने का निर्णय लिया गया है। उत्तर प्रदेश पावर कॉरपोरेशन लिमिटेड (यूपीपीसीएल) ने इस संबंध में औपचारिक आदेश जारी कर दिए हैं। इस निर्णय से राज्यभर के लाखों घरेलू, व्यावसायिक और औद्योगिक बिजली उपभोक्ताओं को कुल मिलाकर लगभग 424 करोड़ रुपये की वित्तीय बचत होगी।
यूपीपीसीएल के निदेशक (वाणिज्य) प्रशांत वर्मा ने बताया कि आगामी बिलिंग चक्र के लिए ईंधन एवं विद्युत क्रय समायोजन अधिभार (एफपीपीएएस) की दर ऋणात्मक (-) 5.24 प्रतिशत तय की गई है। नियामक व्यवस्था के अनुसार जब भी बिजली उत्पादन और पारेषण के लिए ईंधन खरीद की लागत घटती है, उसका लाभ सीधे उपभोक्ताओं के बिलों में समायोजित कर दिया जाता है। इस बार तय की गई यह ऋणात्मक दर उपभोक्ताओं के आगामी देयकों में घटाई जाएगी, जिससे उन्हें सीधे कम बिल का भुगतान करना होगा।
यह राहत व्यवस्था का लगातार चौथा महीना है जब उपभोक्ताओं के बिजली बिलों में कमी दर्ज की जा रही है। इससे पूर्व जुलाई में 4.43 प्रतिशत, अगस्त में 2.92 प्रतिशत और सितंबर के बिलों में 7.93 प्रतिशत की उल्लेखनीय राहत उपभोक्ताओं को दी जा चुकी है।
प्रदेश सरकार की नीति के तहत विद्युत वितरण और बिलिंग प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी, सुगम और उपभोक्ता-अनुकूल बनाया जा रहा है। एफपीपीएएस फॉर्मूले के तहत बाजार में बिजली खरीद दरों और कोयला व ईंधन की लागत में आने वाले उतार-चढ़ाव का समयबद्ध हिसाब रखा जाता है। जब बिजली खरीद की लागत में गिरावट आती है, तो उसका पूरा वित्तीय लाभ बिना किसी देरी के सीधे उपभोक्ता के बिल में समायोजित कर दिया जाता है। त्योहारी सीजन से ठीक पहले आई इस राहत से प्रदेश के परिवारों और व्यापारिक प्रतिष्ठानों को अपने मासिक बजट में बड़ा सहारा मिलेगा।
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