UP Power Sector: निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए योगी सरकार सख्त, SLDC के आधुनिकीकरण और रियल टाइम ग्रिड मॉनिटरिंग के निर्देश

यूपी में निर्बाध विद्युत आपूर्ति के लिए प्रमुख सचिव ऊर्जा रणवीर प्रसाद ने एसएलडीसी का निरीक्षण कर रियल टाइम ग्रिड मॉनिटरिंग और आधुनिकीकरण के सख्त निर्देश दिए।

By INA News Desk
Sep 23, 2026 - 19:41
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UP Power Sector: निर्बाध बिजली आपूर्ति के लिए योगी सरकार सख्त, SLDC के आधुनिकीकरण और रियल टाइम ग्रिड मॉनिटरिंग के निर्देश

लखनऊ। प्रदेशभर के ग्रामीण और शहरी उपभोक्ताओं को सुचारु, सुरक्षित और निर्बाध विद्युत आपूर्ति उपलब्ध कराने के संकल्प के साथ उत्तर प्रदेश सरकार विद्युत पारेषण और वितरण तंत्र को आधुनिक बनाने में जुट गई है। आगामी दिनों में तापमान और उमस के कारण बिजली की अत्यधिक मांग (पीक डिमांड) की आशंका को देखते हुए शासन स्तर पर निगरानी तेज कर दी गई है। इसी क्रम में प्रमुख सचिव ऊर्जा एवं उत्तर प्रदेश पावर कारपोरेशन लिमिटेड (UPPCL) के अध्यक्ष रणवीर प्रसाद ने राजधानी लखनऊ स्थित 'स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर' (SLDC) का औचक एवं सघन निरीक्षण किया।

निरीक्षण के दौरान उन्होंने पूरे राज्य के विद्युत पारेषण नेटवर्क को तकनीकी रूप से सुदृढ़ करने के लिए एसएलडीसी के बुनियादी ढांचे के त्वरित आधुनिकीकरण का निर्देश दिया। उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि ग्रिड की स्थिरता बनाए रखने और अनावश्यक लोड शेडिंग अथवा ट्रिपिंग से बचने के लिए अत्याधुनिक तकनीकों को मिशन मोड में लागू किया जाए।

एसएलडीसी: प्रदेश के विद्युत प्रबंधन का तंत्रिका तंत्र

प्रमुख सचिव ऊर्जा रणवीर प्रसाद ने निरीक्षण के दौरान स्टेट लोड डिस्पैच सेंटर के कंट्रोल रूम में बैठकर रियल टाइम ग्रिड मॉनिटरिंग, सुपरवाइजरी कंट्रोल एंड डेटा एक्विजिशन (SCADA) सिस्टम और लोड फोरकास्टिंग (मांग के पूर्वानुमान) की कार्यप्रणाली की गहन समीक्षा की।

उन्होंने उपस्थित तकनीकी अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि राज्य की समूची विद्युत आपूर्ति व्यवस्था में एसएलडीसी किसी तंत्रिका तंत्र (नर्वस सिस्टम) की तरह कार्य करता है। इसका मुख्य कार्य उत्पादन गृहों (थर्मल, हाइड्रो और रिन्यूएबल प्लांट्स) से मिलने वाली बिजली और विभिन्न डिस्कॉम्स (विद्युत वितरण निगमों) की स्थानीय मांग के बीच हर सेकंड संतुलन स्थापित करना है। यदि यह संतुलन जरा भी बिगड़ता है, तो ग्रिड फ्रीक्वेंसी प्रभावित होती है और बड़े पैमाने पर ब्लैकआउट या ट्रिपिंग का खतरा पैदा हो जाता है।

प्रमुख सचिव के प्रमुख निर्देश: ओवरलोडिंग रोकने और फ्रीक्वेंसी स्थिर रखने पर जोर

समीक्षा बैठक के दौरान प्रमुख सचिव ने स्पष्ट किया कि आने वाला एक महीना मौसम और त्योहारों के दृष्टिकोण से बिजली की मांग के लिहाज से बेहद संवेदनशील और चुनौतीपूर्ण है। ऐसे में किसी भी प्रकार की तकनीकी लापरवाही सीधे आम जनता की दिनचर्या को प्रभावित करेगी।

उन्होंने अधिकारियों को निम्नलिखित कार्ययोजना पर सख्ती से अमल करने के निर्देश दिए:

  • सतर्कता से लोड डिस्पैच: क्षेत्रीय वितरण निगमों की वास्तविक मांग का सटीक आकलन कर उसी के अनुरूप बिजली का आवंटन किया जाए, ताकि ट्रांसमिशन लाइनों और सब-स्टेशनों पर अचानक अत्यधिक भार (ओवरलोडिंग) न पड़े।

  • ग्रिड फ्रीक्वेंसी का स्थिरीकरण: राष्ट्रीय ग्रिड मानकों के अनुरूप राज्य के ग्रिड की फ्रीक्वेंसी को 49.90 से 50.05 हर्ट्ज के सुरक्षित दायरे में बनाए रखना सुनिश्चित किया जाए।

  • त्वरित रिस्टोरेशन (पुनर्बहाली): किसी भी प्रमुख ट्रांसमिशन लाइन में तकनीकी खराबी, ब्रेकडाउन या ट्रिपिंग की स्थिति में अविलंब वैकल्पिक ट्रांसमिशन रूट से बिजली की आपूर्ति डायवर्ट की जाए, ताकि उपभोक्ताओं को लंबे समय तक अंधेरे में न रहना पड़े।

  • नवीकरणीय ऊर्जा का एकीकरण: सौर (सोलर) और पवन (विंड) ऊर्जा जैसे गैर-पारंपरिक स्रोतों से उत्पन्न होने वाली बिजली के उतार-चढ़ाव को प्रभावी रूप से संतुलित करने के लिए 'अवेलेबिलिटी बेस्ड टैरिफ' (ABT) मीटरिंग व्यवस्था का सुदृढ़ प्रबंधन किया जाए।

आधुनिक तकनीकों और ऑटोमेशन से लैस होगा कंट्रोल रूम

वर्तमान में एसएलडीसी आधुनिक स्काडा (SCADA) और एनर्जी मैनेजमेंट सिस्टम (EMS) के जरिए पूरे प्रदेश के 132 केवी, 220 केवी, 400 केवी और 765 केवी के सब-स्टेशनों से रीयल टाइम डेटा प्राप्त करता है। पावर कारपोरेशन ने इस प्रणाली में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) और मशीन लर्निंग आधारित लोड प्रेडिक्शन टूल्स को जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की है। इससे मौसम के बदलाव, वर्षा और तापमान के आधार पर अगले 24 से 48 घंटों की मांग का सटीक अनुमान लगाया जा सकेगा।

प्रमुख सचिव ने कार्यदायी संस्थाओं और अभियंताओं को निर्देश दिया कि आधुनिकीकरण के तहत जो भी नए सॉफ्टवेयर और हार्डवेयर उपकरण स्थापित किए जाने हैं, उन्हें निर्धारित समयसीमा के भीतर पूरा किया जाए। इस पहल से न केवल तकनीकी और वाणिज्यिक हानियों (एटीएंडसी लॉस) में कमी आएगी, बल्कि ग्रामीण क्षेत्रों में भी रोस्टर के अनुसार पूर्ण अवधि की आपूर्ति सुनिश्चित की जा सकेगी।

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