Lucknow News: 15 वर्षों के इंतजार के बाद घर में गूंजी किलकारी, क्वीन मैरी की IVF यूनिट ने रचा नया इतिहास
कोविड काल के बाद पहली सफल IVF गर्भावस्था का सुखद परिणाम, 38 वर्षीय महिला ने स्वस्थ बच्ची को दिया जन्म
लखनऊ। किंग जॉर्ज मेडिकल यूनिवर्सिटी (KGMU) के क्वीन मैरी हॉस्पिटल की इन्फर्टिलिटी/IVF यूनिट ने कोविड काल के बाद पहली सफल IVF गर्भावस्था के सुखद परिणाम के रूप में बड़ी उपलब्धि दर्ज की है। करीब 15 वर्षों से संतान प्राप्ति की प्रतीक्षा कर रहे दंपति के घर 20 सितंबर 2026 को नन्ही बच्ची की किलकारी गूंजी। 38 वर्षीय महिला ने सीजेरियन सेक्शन के माध्यम से स्वस्थ बच्ची को जन्म दिया। नवजात का वजन करीब 2 किलोग्राम है। जन्म के बाद बच्ची के रोने से उसके स्वस्थ होने का संकेत मिला। मां और नवजात दोनों की स्थिति संतोषजनक बताई गई है।

महिला लंबे समय से निःसंतानता की समस्या से जूझ रही थीं। संतान प्राप्ति के लिए उन्होंने विभिन्न चिकित्सकों से परामर्श और उपचार कराया, लेकिन सफलता नहीं मिली। करीब एक वर्ष पूर्व उन्होंने क्वीन मैरी हॉस्पिटल की इन्फर्टिलिटी/IVF यूनिट में प्रो. पुष्पलता शंखवार, यूनिट हेड, से संपर्क किया। विस्तृत जांच के बाद दंपति के लिए आवश्यक उपचार योजना तैयार की गई और IVF प्रक्रिया के माध्यम से गर्भधारण कराया गया। गर्भावस्था के दौरान महिला की नियमित निगरानी और विशेषज्ञ चिकित्सकीय फॉलोअप किया गया।
पूरी IVF प्रक्रिया प्रो. पुष्पलता शंखवार के निर्देशन एवं पर्यवेक्षण में उनकी टीम द्वारा पूरी की गई। इस सफलता पर विभागाध्यक्ष प्रो. अंजू अग्रवाल ने इसे क्वीन मैरी हॉस्पिटल और पूरे विभाग के लिए गर्व का क्षण बताया।
उन्होंने कहा कि कोविड से पहले भी क्वीन मैरी में IVF के माध्यम से सफल गर्भधारण के मामले सामने आए थे, लेकिन कोविड महामारी के दौरान यह सुविधा प्रभावित हुई और यूनिट लंबे समय तक सक्रिय रूप से संचालित नहीं हो सकी। अब यूनिट को पुनः सक्रिय करते हुए निःसंतान दंपतियों को आधुनिक उपचार उपलब्ध कराया जा रहा है।
सरकारी दर पर आधुनिक IVF उपचार की उम्मीद
क्वीन मैरी की IVF यूनिट की पुनः सफलता उन दंपतियों के लिए भी उम्मीद की किरण है, जो आर्थिक या सामाजिक कारणों से निजी क्षेत्र के महंगे IVF केंद्रों तक नहीं पहुंच पाते। सरकारी चिकित्सा संस्थान में उपलब्ध उपचार से ऐसे दंपतियों को अपेक्षाकृत किफायती दर पर विशेषज्ञ चिकित्सा सुविधा मिलने का रास्ता खुलता है।
विभाग में IVF के साथ ICSI और TESE जैसी आधुनिक सहायक प्रजनन तकनीकों के माध्यम से उपचार की सुविधाओं को आगे बढ़ाने की दिशा में भी काम किया जा रहा है। विशेषज्ञों के अनुसार निःसंतानता के प्रत्येक मामले में उचित जांच, व्यक्तिगत उपचार योजना और विशेषज्ञों की समन्वित देखभाल महत्वपूर्ण होती है।
1993 में हुई थी IVF यूनिट की शुरुआत
मालूम हो कि क्वीन मैरी हॉस्पिटल के स्त्री एवं प्रसूति रोग विभाग में IVF यूनिट की शुरुआत 1993 में डॉ. लक्ष्मी सिंह द्वारा की गई थी। सीमित संसाधनों और विभिन्न प्रशासनिक चुनौतियों के बावजूद यूनिट को आगे बढ़ाने के प्रयास जारी रहे। पूर्व विभागाध्यक्ष डॉ. विनीता दास ने भी यूनिट के विकास में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।
कोविड महामारी के बाद यूनिट की गतिविधियां काफी प्रभावित हुईं, जिससे IVF उपचार की नियमित सुविधा बाधित रही। अब लंबे अंतराल के बाद सफल IVF गर्भावस्था और स्वस्थ बच्ची के जन्म ने यूनिट से जुड़े चिकित्सकों एवं दंपतियों के बीच नई उम्मीद जगाई है। क्वीन मैरी की इस उपलब्धि को विभाग की प्रो. पुष्पलता शंखवार एवं उनकी टीम तथा विभागाध्यक्ष प्रो. अंजू अग्रवाल के नेतृत्व में IVF सेवाओं की पुनर्बहाली की दिशा में महत्वपूर्ण कदम माना जा रहा है।
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