Vegetable Farming: कद्दूवर्गीय सब्जियों, बैंगन, मिर्च और टमाटर को कीट प्रकोप से बचाने के लिए उद्यान विभाग की एडवाइजरी
फल मक्खी, तना एवं फल छेदक और सफेद मक्खी से बचाव के लिए किसानों को समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह
हरदोई। जिला उद्यान अधिकारी ने जनपद के किसानों को कद्दूवर्गीय सब्जियों, बैंगन, मिर्च एवं टमाटर की फसलों को प्रमुख हानिकारक कीटों से बचाने के लिए नियमित निगरानी और समेकित कीट प्रबंधन अपनाने की सलाह दी है। उन्होंने बताया कि लौकी, कद्दू, करेला, तोरई, खीरा, ककड़ी, खरबूजा सहित अन्य कद्दूवर्गीय फसलों में फल मक्खी प्रमुख हानिकारक कीट है। इसकी मादा फलों की त्वचा के नीचे अंडे देती है। अंडों से निकलने वाली सूंडियां फल के अंदर जाकर गूदे को नुकसान पहुंचाती हैं, जिससे फल की गुणवत्ता और बाजार योग्य उत्पादन प्रभावित होता है। प्रकोप की स्थिति में फलों पर छोटे सुईनुमा छेद या धब्बे दिखाई दे सकते हैं और प्रभावित फल धीरे-धीरे नरम होकर सड़ने लगते हैं।
फल मक्खी से बचाव के लिए किसानों को प्रभावित, गिरे एवं सड़े फलों को खेत में न छोड़ने तथा उन्हें एकत्र कर सुरक्षित तरीके से नष्ट करने की सलाह दी गई है। फसल समाप्त होने के बाद गहरी जुताई करने से मिट्टी में मौजूद प्यूपा को नष्ट करने में मदद मिलती है। फल मक्खी की निगरानी के लिए क्यू ल्यूर फेरोमोन ट्रैप 15-20 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाने तथा नीम सीड कर्नेल एक्सट्रैक्ट 3-5 ग्राम प्रति लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है।
- बैंगन में तना एवं फल छेदक से बचाव
बैंगन की फसल में तना एवं फल छेदक कीट को प्रमुख नुकसानदायक कीट बताते हुए किसानों को सप्ताह में कम से कम दो बार फसल का निरीक्षण करने को कहा गया है। नई कोमल टहनियों तथा विकसित हो रहे फलों की विशेष निगरानी जरूरी है। मुरझाई हुई टहनियों को काटकर खेत से बाहर नष्ट करने तथा छेदयुक्त, क्षतिग्रस्त और सड़े फलों को नियमित रूप से तोड़कर नष्ट करने की सलाह दी गई है।
कीट की निगरानी एवं नियंत्रण के लिए 40-50 फेरोमोन ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाने को कहा गया है। आवश्यकतानुसार रासायनिक नियंत्रण के लिए फ्लुबेंडियामाइड 39.35 प्रतिशत एससी या क्लोरेन्ट्रानिलीप्रोल 18.5 प्रतिशत एससी का 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से प्रयोग करने की सलाह दी गई है।
- सफेद मक्खी से फसलों की सुरक्षा
बैंगन, मिर्च और टमाटर में सफेद मक्खी पत्तियों की निचली सतह पर रहकर पौधों का रस चूसती है और कुछ वायरस जनित रोगों के प्रसार में भी भूमिका निभाती है। इसके नियंत्रण के लिए पीले चिपचिपे जाल 35-40 ट्रैप प्रति हेक्टेयर की दर से लगाने तथा नीम तेल 3-5 मिलीलीटर प्रति लीटर हल्के गर्म पानी में घोलकर छिड़काव करने की सलाह दी गई है। आवश्यकतानुसार रासायनिक नियंत्रण के लिए फिप्रोनिल 5 प्रतिशत एससी या इमिडाक्लोप्रिड 17.8 प्रतिशत एसएल का 0.3 मिलीलीटर प्रति लीटर पानी की दर से प्रयोग करने की सलाह दी गई है। जिला उद्यान अधिकारी ने किसानों से खेत की स्वच्छता बनाए रखने, खरपतवार एवं फसल अवशेषों का उचित प्रबंधन करने और संतुलित मात्रा में उर्वरकों का प्रयोग करने की अपील की है।
What's Your Reaction?