UPITS 2026: सांस्कृतिक रंगों से सराबोर होगा इंटरनेशनल ट्रेड शो, मोनाली ठाकुर के सुरों से लेकर पं. शिवनाथ मिश्र के सितार की सजेगी महफिल

ग्रेटर नोएडा में 25 से 29 सितंबर तक आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में व्यापार के साथ सांस्कृतिक महाकुंभ दिखेगा। मोनाली ठाकुर और पं. शिवनाथ मिश्र देंगे प्रस्तुतियां।

By INA News Desk
Sep 23, 2026 - 19:38
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UPITS 2026: सांस्कृतिक रंगों से सराबोर होगा इंटरनेशनल ट्रेड शो, मोनाली ठाकुर के सुरों से लेकर पं. शिवनाथ मिश्र के सितार की सजेगी महफिल

ग्रेटर नोएडा/लखनऊ। औद्योगिक विकास, वैश्विक निवेश और स्थानीय उत्पादों के प्रदर्शन के साथ-साथ उत्तर प्रदेश की समृद्ध और विविध सांस्कृतिक धरोहर को दुनिया के सामने प्रस्तुत करने के लिए आगामी 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (UPITS) 2026 एक भव्य मंच बनने जा रहा है। 25 से 29 सितंबर तक ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने वाले इस पांच दिवसीय महाआयोजन को सरकार ने केवल व्यापारिक अनुबंधों तक सीमित न रखकर व्यापार, उद्योग, कला और संस्कृति के अनूठे संगम के रूप में रूपांतरित किया है।

मेले की प्रत्येक शाम देश और प्रदेश की जानी-मानी हस्तियों, लोककलाकारों और राष्ट्रीय स्तर के संगीत साधकों की मनमोहक प्रस्तुतियों से सराबोर रहेगी। आयोजकों के अनुसार, इसका उद्देश्य वैश्विक निवेशकों और देशी-विदेशी आगंतुकों को उत्तर प्रदेश के अलग-अलग अंचलों ब्रज, अवध, बुंदेलखंड, पूर्वांचल और रुहेलखंड की लोक परंपराओं और शास्त्रीय विरासत से सीधा परिचय कराना है।

पांच दिवसीय सांस्कृतिक महाकुंभ: शंख ध्वनि से भव्य शुभारंभ

सांस्कृतिक संध्याओं की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई है कि इसमें भारतीय शास्त्रीय संगीत, लोकगायन, पारंपरिक नृत्य शैलियों, जनजातीय कलाओं और आधुनिक सुगम संगीत का संतुलित प्रवाह देखने को मिले:

प्रथम सांझ (25 सितंबर): शंख वादन एवं वैदिक मंगलाचरण

कार्यक्रम का विधिवत शुभारंभ बागपत की रश्मि आर्या द्वारा शंख वादन और वैदिक स्वस्ति वाचन के साथ होगा। इसके पश्चात अवध की समृद्ध गायन परंपरा को आगे बढ़ाते हुए लखनऊ की मालविका हरिओम लोकगीतों की प्रस्तुति देंगी। मथुरा की सीमा मोरवाल ब्रज के पारंपरिक लोकनृत्यों (मयूर नृत्य व चरकुला) के रंग बिखेरेंगी। मंच पर लखनऊ की आकांक्षा श्रीवास्तव की कथक नृत्य नाटिका और कानपुर/मुंबई की आकांक्षा त्रिपाठी द्वारा सुरीली भजन क्लबिंग प्रस्तुत की जाएगी।

द्वितीय सांझ (26 सितंबर): वाद्य वृंद एवं मोनाली ठाकुर की 'स्टार नाइट'

दूसरी शाम का आरंभ नोएडा के पं. चेतन जोशी के निर्देशन में वाद्य वृंद (ऑर्केस्ट्रा) की धुन से होगा। लखनऊ की वंदना मिश्रा लोकगीतों से समां बांधेंगी, जबकि नोएडा की मर्यादा कुलश्रेष्ठ कथक नृत्य नाटिका प्रस्तुत करेंगी। प्रयागराज की पूर्णिमा कुमार द्वारा पूर्वांचल का पारंपरिक 'ढेढिया नृत्य' पेश किया जाएगा। इस शाम का मुख्य आकर्षण बॉलीवुड की विख्यात पार्श्व गायिका मोनाली ठाकुर की 'स्टार नाइट' होगी, जिसमें वह अपने लोकप्रिय गीतों से दर्शकों को मंत्रमुग्ध करेंगी।

तृतीय सांझ (27 सितंबर): बुंदेली राई, आल्हा और पखावज का जादू

तीसरी संध्या शास्त्रीय और वीर रस के लोक साहित्य को समर्पित होगी। विख्यात पखावज वादक पं. रविशंकर उपाध्याय और पं. ऋषिशंकर उपाध्याय का 'पखावज ट्रायो' ताल वादन की बारीकियां पेश करेगा। रायबरेली की शीलू सिंह राजपूत पारंपरिक आल्हा गायन से शौर्य गाथाएं प्रस्तुत करेंगी। झांसी की वंदना कुशवाहा बुंदेलखंड का प्रसिद्ध 'राई लोकनृत्य' पेश करेंगी। इसके साथ ही प्रियंवदा सिंह का कथक नृत्य, सहारनपुर की रंजना नेब की नृत्य नाटिका और नोएडा के 'सर्वत्र बैंड' की आधुनिक फ्यूजन प्रस्तुति मुख्य आकर्षण रहेगी।

चतुर्थ सांझ (28 सितंबर): पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र का सितार और सूफी सुर

चौथी शाम बनारस घराने की समृद्ध संगीत परंपरा को समर्पित होगी। प्रख्यात सितार वादक पद्मश्री पं. शिवनाथ मिश्र के सितार वादन से एक्सपो मार्ट गूंजेगा। लखनऊ की सबीना सैफी सुगम संगीत प्रस्तुत करेंगी, जबकि नोएडा की निशा केसरी कथक की प्रस्तुति देंगी। पीलीभीत के रजनीश राणा द्वारा तराई क्षेत्र के थारू जनजातीय नृत्य का जीवंत प्रदर्शन किया जाएगा। शाम का समापन लखनऊ और मुंबई के कलाकारों से सजे 'बंदा बैरागी बैंड' (राधेश्याम) के सूफी संगीत के साथ होगा।

पंचम सांझ (29 सितंबर): 'कलर्स ऑफ इंडिया' के साथ समापन

समापन दिवस की शाम भक्ति और राष्ट्रीय एकता के रंगों से सजी होगी। मुंबई के भजन गायक ओमप्रकाश दुबे आध्यात्मिक रचनाएं सुनाएंगे, जबकि गोरखपुर के राकेश उपाध्याय लोकगीतों से पूर्वी उत्तर प्रदेश की माटी की खुशबू बिखेरेंगे। गाजियाबाद की मिताली सैनी की कथक नृत्य नाटिका के पश्चात सुप्रसिद्ध कोरियोग्राफर श्रीराम सांखला के निर्देशन में भव्य 'कलर्स ऑफ इंडिया' का मंचन होगा, जिसमें भारत के विभिन्न राज्यों की विविध नृत्य शैलियों का एकीकृत प्रदर्शन किया जाएगा।

स्थानीय कलाकारों को अंतरराष्ट्रीय पहचान

शासन की इस पहल से प्रदेश के कस्बों और ग्रामीण अंचलों में पारंपरिक विधाओं को संजोए रखने वाले लोककलाकारों को सीधे विदेशी खरीदारों, कॉर्पोरेट प्रतिनिधियों और राष्ट्रीय मंच के सामने अपनी प्रतिभा दिखाने का अवसर मिलेगा। इससे न केवल कलाकारों का मनोबल बढ़ेगा, बल्कि राज्य की सांस्कृतिक पर्यटन (कल्चरल टूरिज्म) छवि भी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर सुदृढ़ होगी।

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