पुलिस स्मृति दिवस पर यूपी पुलिस ने रिलीज की शॉर्ट फिल्म 'वर्दी', तिग्मांशु धूलिया ने किया निर्देशन
पुलिस स्मृति दिवस पर यूपी पुलिस ने शॉर्ट फिल्म 'वर्दी' जारी की। तिग्मांशु धूलिया के निर्देशन में बनी फिल्म में शहीद सुनील कुमार के सर्वोच्च बलिदान को दर्शाया।
कर्तव्य की वेदी पर अपने प्राण न्योछावर करने वाले जांबाज पुलिसकर्मियों के अदम्य साहस और सर्वोच्च बलिदान को नमन करने के लिए उत्तर प्रदेश पुलिस ने एक अनूठी पहल की है। पुलिस स्मृति दिवस के अवसर पर विभाग ने अपने आधिकारिक डिजिटल और सोशल मीडिया मंचों पर 'वर्दी' शीर्षक से एक भावपूर्ण लघु फिल्म जारी की है। पुलिस महानिदेशक राजीव कृष्ण के मार्गदर्शन में तैयार की गई यह फिल्म न केवल शहीद जवानों के शौर्य, समर्पण और कर्तव्यनिष्ठा को सामने लाती है, बल्कि उनके बलिदान के उपरांत परिजनों के जीवन में आने वाले भावनात्मक खालीपन और मूक संघर्ष को भी संजीदगी से प्रस्तुत करती है।
इस फिल्म में मुख्य रूप से मरणोपरांत कीर्ति चक्र से अलंकृत उत्तर प्रदेश एसटीएफ के वीर शहीद निरीक्षक सुनील कुमार की वीरता और सर्वोच्च त्याग को केंद्र में रखा गया है। उल्लेखनीय है कि शामली में कुख्यात मुकीम काला गिरोह के अपराधियों से हुई भीषण मुठभेड़ के दौरान गंभीर रूप से घायल होने के बावजूद उन्होंने अदम्य साहस दिखाते हुए अभियान का नेतृत्व किया था, जिसमें कुख्यात इनामी सहित कई अपराधी ढेर हुए थे और बाद में उपचार के दौरान वे वीरगति को प्राप्त हुए थे। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने शहीद की धर्मपत्नी मुनेश देवी को सम्मानित कर ढांढस बंधाया था।
फिल्म का प्रभावी निर्देशन राष्ट्रीय फिल्म पुरस्कार विजेता प्रख्यात निर्देशक व पटकथा लेखक तिग्मांशु धूलिया ने किया है। इसमें मुख्य अभिनय भूमिकाएं बॉलीवुड अभिनेता अमित साध, वरिष्ठ अभिनेत्री अलका अमीन और नाज़िश ख़ान ने निभाई हैं। पटकथा और पार्श्व स्वर यूपी पुलिस के सोशल मीडिया केंद्र में तैनात आरक्षी कपिल दिनकर ने तैयार किए हैं, जबकि रचनात्मक निर्देशन पुलिस अधीक्षक राहुल श्रीवास्तव ने संभाला है। इस भावनात्मक प्रस्तुति का निर्माण राज्य सूचना एवं जनसंपर्क विभाग के सहयोग से मुंबई में संपन्न हुआ।
फिल्म के माध्यम से समाज को यह मर्मस्पर्शी संदेश दिया गया है कि जनसुरक्षा के लिए प्राण देने वाले वीरों के परिवारों को अपनी संतान व जीवनसाथी के त्याग पर अपार गर्व तो होता है, किंतु अपनों के बिछोह का दर्द जीवनपर्यंत उनके साथ चलता है। परिजनों के उस मौन इंतजार और भावनात्मक संघर्ष को इस रचना में कलात्मक ढंग से पिरोया गया है। उत्तर प्रदेश पुलिस की इस पहल का उद्देश्य वीर बलिदानियों के त्याग की अमर गाथा को जन-जन तक पहुंचाना और बल के प्रत्येक सदस्य को देश सेवा के उच्च आदर्शों के प्रति प्रेरित करना है।
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