यूपी के स्कूलों में समावेशन और संस्कार पर जोर, विद्यांजलि व प्रशस्त 2.0 की लखनऊ में होगी राज्यस्तरीय समीक्षा
उत्तर प्रदेश के विद्यालयों में विद्यांजलि, नशामुक्त परिसर और प्रशस्त 2.0 अभियानों की प्रगति परखने के लिए लखनऊ में राज्यस्तरीय समीक्षा कार्यशाला का आयोजन।
राज्य के परिषदीय और माध्यमिक विद्यालयों को संस्कार, गुणवत्ता और आधुनिक संसाधनों से युक्त बनाने की दिशा में शासन ने कार्ययोजना तेज कर दी है। प्रत्येक शिक्षार्थी को अनुकूल शैक्षणिक वातावरण उपलब्ध कराने और समाज के सहयोग से परिसरों का कायाकल्प करने के उद्देश्य से राजधानी लखनऊ में एक उच्चस्तरीय अभिमुखीकरण एवं समीक्षा संगोष्ठी का आयोजन तय किया गया है। इस राज्यस्तरीय बैठक में विद्यांजलि पहल, नशामुक्त शिक्षण संस्थान अभियान और विशेष आवश्यकता वाले बालकों की पढ़ाई के लिए उपयोगी तकनीकी साधन प्रशस्त के प्रभावी इस्तेमाल की जिलेवार पड़ताल की जाएगी।
संगोष्ठी के दौरान विद्यांजलि डिजिटल माध्यम पर विद्यालयों के पंजीकरण की स्थिति, निगमित सामाजिक उत्तरदायित्व से जुड़ी संस्थाओं की सक्रिय भागीदारी और स्कूलों को गोद लेने की व्यवस्था पर विस्तार से चर्चा होगी। समाज के सक्षम नागरिकों, पूर्व छात्रों और व्यावसायिक प्रतिष्ठानों को विद्यालयों के बुनियादी ढांचे व पठन-पाठन से जोड़ने के उपायों को गति दी जाएगी। इसके साथ ही प्रत्येक जनपद स्तर पर आने वाली व्यावहारिक कठिनाइयों को दूर करने के लिए अंतर-विभागीय समन्वय की मजबूत रूपरेखा तैयार की जाएगी।
शैक्षणिक परिसरों को स्वस्थ और सुरक्षित बनाए रखने के लिए नशामुक्त अभियान के तहत संचालित गतिविधियों का मूल्यांकन होगा। इसके अंतर्गत संबंधित डिजिटल मंच पर स्कूलों द्वारा भरे जा रहे स्व-प्रमाणन और स्व-मूल्यांकन के आंकड़ों का विश्लेषण किया जाएगा। छात्र-छात्राओं को हानिकारक व्यसनों से दूर रखने, उनमें नैतिक चेतना जगाने और परिसरों के आसपास स्वच्छ वातावरण बनाए रखने के लिए जन-जागरूकता कार्यक्रमों की गति बढ़ाई जाएगी।
दिव्यांग और विशेष देखभाल की पात्रता रखने वाले बच्चों को मुख्यधारा की शिक्षा से जोड़ने के लिए तैयार किए गए आधुनिक तकनीकी साधन प्रशस्त के उन्नत संस्करण का सजीव प्रदर्शन किया जाएगा। इस दौरान शिक्षकों के प्रशिक्षण सत्रों की पूर्णता, डिजिटल ट्यूटोरियल से जुड़ाव और वास्तविक कक्षा-कक्ष में इसके प्रयोग की समीक्षा की जाएगी। समग्र शिक्षा अभियान की राज्य परियोजना निदेशक और महानिदेशक स्कूल शिक्षा मोनिका रानी के अनुसार, सभी जनपदों के संबंधित अधिकारियों को पूरी अद्यतन जानकारी के साथ उपस्थित रहने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि प्राथमिक स्तर से लेकर उच्च स्तर तक समावेशी शिक्षा को व्यावहारिक और प्रभावी बनाया जा सके।
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