विंध्य त्रिकोण से चमका यूपी का शक्तिपीठ पर्यटन, दर्शनार्थियों की आमद में 60 फीसदी का उछाल
विंध्याचल में धार्मिक पर्यटन को नई उड़ान। विंध्य त्रिकोण परिक्रमा में श्रद्धालुओं की आमद 60% बढ़ी। शक्तिपीठ सर्किट और नए यात्रा पैकेजों से बदली तस्वीर।
मीरजापुर जनपद स्थित विंध्याचल धाम में आध्यात्मिक पर्यटन का स्वरूप अब केवल मुख्य मंदिर परिसर तक सीमित नहीं रहा, बल्कि इसका दायरा ऐतिहासिक विंध्य त्रिकोण के तीनों प्रमुख शक्तिपीठों तक विस्तृत हो चुका है। मां विंध्यवासिनी, मां काली खोह और मां अष्टभुजा देवी के पवित्र धामों में पहुंचने वाले श्रद्धालुओं की संख्या में बीते दो वर्षों के भीतर करीब साठ प्रतिशत की भारी बढ़ोतरी दर्ज की गई है। प्राचीन मान्यताओं के अनुरूप की जाने वाली त्रिकोण परिक्रमा अब राष्ट्रीय स्तर पर धार्मिक पर्यटन की विशिष्ट पहचान बनकर उभर रही है। प्रदेश सरकार की शक्तिपीठ सर्किट विकास योजना से इस पूरे आस्था पथ को आधुनिक सुविधाओं से जोड़ा जा रहा है।
आंकड़ों के मुताबिक मां विंध्यवासिनी के मुख्य दरबार में शीश नवाने वाले भक्तों का तांता साल दर साल तेजी से बढ़ा है। विगत वर्षों में जहां यह संख्या तिहत्तर लाख के करीब थी, वहीं यह आंकड़ा बढ़ते हुए एक करोड़ बीस लाख तक पहुंच गया, जो लगभग चौसठ प्रतिशत का बड़ा उछाल दर्शाता है। वर्तमान वर्ष के शुरुआती आठ महीनों के भीतर ही करीब नब्बे लाख श्रद्धालु मां के चरणों में हाजिरी लगा चुके हैं, जो नवरात्र की शुरुआत से पूर्व का ही एक बड़ा कीर्तिमान है।
इस विस्तार का सीधा प्रभाव काली खोह और अष्टभुजा देवी मंदिरों की चहल-पहल पर भी स्पष्ट नजर आ रहा है। इन दोनों देवस्थलों पर आने वाले दर्शनार्थियों की संयुक्त संख्या बयालीस लाख से छलांग लगाकर चौंसठ लाख के पार पहुंच चुकी है। श्रद्धालु अब विंध्याचल आकर मुख्य मंदिर के साथ-साथ पर्वत श्रृंखलाओं पर स्थित दोनों पावन स्थलों का भी अनिवार्य रूप से दर्शन कर रहे हैं, जिससे समग्र त्रिकोण परिक्रमा को नया बल मिला है।
पर्यटन एवं संस्कृति मंत्री जयवीर सिंह ने इस बदलाव पर प्रकाश डालते हुए बताया कि विंध्याचल को पूरे प्रदेश के शक्तिपीठ सर्किट का मुख्य आधार केंद्र बनाया जा रहा है। इसका मकसद देश-दुनिया से आने वाले आस्थावानों को उत्तर प्रदेश की समृद्ध शक्ति आराधना से जोड़ना है। क्षेत्र के कायाकल्प और जनसुविधाओं के उन्नयन पर 208 करोड़ रुपये से अधिक की धनराशि खर्च की जा रही है। इसके तहत संपर्क मार्गों, पैदल पथ, सीढ़ियों और मुख्य परिसर का सौंदर्यीकरण तेजी से कराया गया है। पहाड़ी दुर्गम रास्तों पर बुजुर्गों और बच्चों की सहूलियत के लिए संचालित आधुनिक रोपवे प्रणाली ने यात्रा को बेहद सहज बना दिया है। इसके अलावा काली खोह क्षेत्र के समग्र विकास के लिए भी साढ़े पैंतीस करोड़ रुपये से अधिक की योजना को आगे बढ़ाया गया है।
पर्यटकों और श्रद्धालुओं की यात्रा को सुगम बनाने के लिए पर्यटन विकास निगम ने दो नए सुनियोजित यात्रा पैकेज भी प्रस्तुत किए हैं। इनमें काशी से विंध्याचल को जोड़ने वाला दो दिवसीय भ्रमण और प्रयागराज, काशी, विंध्याचल तथा राजधानी को सम्मिलित करने वाला तीन दिवसीय धार्मिक यात्रा विकल्प शामिल है। पर्यटन, संस्कृति एवं धर्मार्थ कार्य विभाग के अपर मुख्य सचिव अमृत अभिजात के अनुसार, सुदृढ़ यातायात और बेहतर बुनियादी ढांचे से पर्यटकों का ठहराव बढ़ेगा। धार्मिक पर्यटन के इस तेजी से बढ़ते तंत्र से स्थानीय स्तर पर होटल व्यवसाय, परिवहन, खानपान, हस्तशिल्प और पूजा सामग्री के व्यापार को भारी सहारा मिल रहा है, जिससे क्षेत्रीय अर्थव्यवस्था को गति और युवाओं को रोजगार के व्यापक अवसर प्राप्त हो रहे हैं।
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