16वें वित्त आयोग की कार्यशाला में मंत्री ओ.पी. राजभर ने स्थानीय निकायों के सशक्तिकरण और उन्हें पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने पर दिया विशेष बल।

16वें वित्त आयोग के अनुदान' विषय पर आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रदेश के मंत्री ओ.पी. राजभर

Jul 4, 2026 - 16:33
 0  4
16वें वित्त आयोग की कार्यशाला में मंत्री ओ.पी. राजभर ने स्थानीय निकायों के सशक्तिकरण और उन्हें पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने पर दिया विशेष बल।
16वें वित्त आयोग की कार्यशाला में मंत्री ओ.पी. राजभर ने स्थानीय निकायों के सशक्तिकरण और उन्हें पूरी तरह आत्मनिर्भर बनाने पर दिया विशेष बल।
  •  उत्तर प्रदेश की 57,694 पंचायतों के व्यापक विकास हेतु परफॉर्मेंस ग्रांट की शर्तों को और अधिक व्यावहारिक व जन-अनुकूल बनाने का किया अनुरोध।
  • ग्रामीण क्षेत्रों में पेयजल, बुनियादी ढांचे और मानदेय भुगतान जैसे जनहित के कार्यों को गति देने के लिए समयबद्ध गाइडलाइन जारी करने की अपेक्षा।
  • पूर्व आयोगों की भांति 10% तकनीकी व प्रशासनिक मद को पुनः शामिल कर पंचायत सहायकों और केयरटेकर्स के हितों को सुरक्षित करने का सुझाव।
  • 16वें वित्त आयोग की प्रशिक्षण कार्यशाला में मंत्री ओ.पी. राजभर ने उठाई पंचायतों के हितों की आवाज; केंद्रीय नीति और शर्तों के व्यावहारिक सरलीकरण की मांग की

लखनऊ: 16वें वित्त आयोग के अनुदान' विषय पर आयोजित एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला को संबोधित करते हुए प्रदेश के मंत्री ओ.पी. राजभर ने केंद्र और राज्यों के बीच वित्तीय संसाधनों के न्यायसंगत वितरण की महत्ता पर प्रकाश डाला. उन्होंने स्थानीय स्वशासन संस्थाओं को सशक्त व आत्मनिर्भर बनाने की दिशा में 16वें वित्त आयोग द्वारा 15वें वित्त आयोग की तुलना में लगभग दोगुनी धनराशि के आवंटन और 'स्वयं के स्रोत से आय' आधारित परफॉर्मेंस ग्रांट के प्रावधान का स्वागत किया. कार्यशाला को संबोधित करते हुए माननीय मंत्री श्री ओ.पी. राजभर ने उत्तर प्रदेश सरकार द्वारा पंचायतों को स्वावलंबी बनाने हेतु किए जा रहे प्रयासों की चर्चा की. उन्होंने बताया कि उत्तर प्रदेश में देश की सर्वाधिक 57,694 ग्राम पंचायतें हैं, जो देश का लगभग 22 प्रतिशत हैं और राज्य में न्यूनतम 1000 की आबादी पर ग्राम पंचायत गठित करने का प्रावधान है. राज्य सरकार द्वारा कम आबादी वाली पंचायतों के लिए 'पंचायत प्रतिपूर्ति एवं प्रोत्साहन योजना' संचालित की जा रही है, जिसमें पंचायतों द्वारा अर्जित आय का 5 गुना प्रोत्साहन धनराशि के रूप में दिया जा रहा है. वर्तमान वित्तीय वर्ष में राज्य वित्त आयोग के अंतर्गत पंचायतों को ₹14,997 करोड़ का भारी-भरकम बजट आवंटित किया गया है, जबकि इसके सापेक्ष केंद्रीय करों के बड़े संग्रहण के बावजूद 16वें वित्त आयोग के तहत मात्र ₹10,675 करोड़ का ही आवंटन प्राप्त हुआ है. 

संबोधन के दौरान मंत्री ओ.पी. राजभर ने केंद्रीय वित्त आयोग की नीतियों और गाइडलाइंस के संबंध में कुछ अत्यंत महत्वपूर्ण एवं नीतिगत व्यावहारिक विषयों की ओर ध्यानाकर्षण करते हुए केंद्र सरकार से तत्काल सुधार की अपेक्षा की. उन्होंने कहा कि केंद्रीय वित्त आयोग द्वारा 5 वर्ष की धनराशि एकमुश्त आवंटित की जाती है, जबकि केंद्रीय कर संग्रहण में प्रतिवर्ष होने वाली वृद्धि के दृष्टिगत इसका आवंटन राज्य वित्त आयोग की तर्ज पर प्रतिवर्ष बजटीय हिस्सेदारी के रूप में होना चाहिए ताकि राज्यों को अधिक लाभ मिल सके. पात्रता शर्तों पर आपत्ति जताते हुए उन्होंने कहा कि जहां शहरी क्षेत्रों एवं जिला पंचायतों के लिए केवल 'स्वयं के संसाधन से आय वृद्धि' की शर्त है, वहीं ग्राम पंचायतों हेतु ₹1200 प्रति व्यक्ति (प्रतिवार) न्यूनतम आय का कड़ा मापदंड रखा गया है. उत्तर प्रदेश के परिप्रेक्ष्य में यह शर्त बेहद अव्यावहारिक है क्योंकि यहां छोटी आबादी पर पंचायतें गठित हैं और वर्तमान में उनके स्वयं के संसाधन सीमित हैं. इसलिए इसे शहरी क्षेत्रों की तरह ही सरल और एकसमान किया जाना चाहिए. 

मंत्री ओ.पी. राजभर ने प्रशासनिक और बजटीय विसंगतियों को रेखांकित करते हुए कहा कि 16वें वित्त आयोग की टाइड और अनटाइड मदों की गाइडलाइन पंचायती राज मंत्रालय और जलशक्ति मंत्रालय से अभी तक प्राप्त नहीं हुई है. इसके साथ ही ई-ग्राम स्वराज पोर्टल पर तकनीकी सीमाओं के कारण पंचायतें अपने अति-आवश्यक कार्यों जैसे पेयजल व्यवस्था व मानदेय आदि का भुगतान नहीं कर पा रही हैं. उन्होंने पूर्व के आयोगों की भांति 10% तकनीकी एवं प्रशासनिक मद को पुनः बहाल करने की मांग की, जिसके बिना पंचायतों में कार्यरत पंचायत सहायकों और सामुदायिक शौचालयों के केयरटेकर्स के मानदेय भुगतान में गंभीर कठिनाई आएगी. साथ ही, इतनी विशाल धनराशि के सदुपयोग और प्रभावी मॉनिटरिंग के लिए राज्य स्तर पर भी प्रशासनिक फंड की व्यवस्था को आवश्यक बताया. वित्तीय प्रतिबंधों पर बात करते हुए माननीय मंत्री जी ने स्पष्ट किया कि भारत सरकार की गाइडलाइन के अनुसार पूर्व के आयोगों की धनराशि शेष रहने पर पूरे प्रदेश का ग्रांट रोकने का नियम अनुचित है. उत्तर प्रदेश में वर्ष 2016-17 की 14वें वित्त आयोग की परफॉर्मेंस ग्रांट में कतिपय अनियमितताओं के कारण सिर्फ 67 ग्राम पंचायतों की धनराशि जांच व कड़े प्रतिबंधों के कारण लंबित है; ऐसे में मात्र 67 पंचायतों के कारण प्रदेश की सभी 57,694 ग्राम पंचायतों का अनुदान रोकना पूर्णतः अतार्किक है. अंत में, मंत्री ओ.पी. राजभर ने विश्वास व्यक्त किया कि यदि केंद्र सरकार इन व्यावहारिक एवं प्रशासनिक अड़चनों को दूर कर देती है, तो यह अनुदान ग्रामीण और शहरी क्षेत्रों में जनकल्याण, सुशासन और बुनियादी ढांचे के विकास को एक नई ऊंचाई पर ले जाएगा. 

दंगाइयों के मुकदमे वापस लेने का प्रयास करती थी सपा सरकार: सीएम योगी

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

INA News_Admin आई.एन. ए. न्यूज़ (INA NEWS) initiate news agency भारत में सबसे तेजी से बढ़ती हुई हिंदी समाचार एजेंसी है, 2017 से एक बड़ा सफर तय करके आज आप सभी के बीच एक पहचान बना सकी है| हमारा प्रयास यही है कि अपने पाठक तक सच और सही जानकारी पहुंचाएं जिसमें सही और समय का ख़ास महत्व है।