Ayodhya Deepotsav 2026: रामायण के शोध से आध्यात्मिक अनुभूति तक, विदेशी पर्यटकों को लुभा रहा दीपोत्सव

रामायण के प्रसंगों को किताबों में पढ़ना और श्रीराम की नगरी में उनकी सांस्कृतिक विरासत को करीब से महसूस करना, दोनों

By INA News Desk
Nov 8, 2026 - 08:53
13 Views
Ayodhya Deepotsav 2026: रामायण के शोध से आध्यात्मिक अनुभूति तक, विदेशी पर्यटकों को लुभा रहा दीपोत्सव
Advertisement
Advertisement
  • अर्जेंटीना के ब्रांको रामायण पर कर रहे शोध, श्रीराम की नगरी को करीब से जानने की जिज्ञासा
  • रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से मारिया और एलेक्जेंड्रा भी आध्यात्मिक यात्रा पर पहुंचीं अयोध्या
  • दीपोत्सव की भव्यता, धार्मिक परंपराओं और सांस्कृतिक वैभव ने विदेशी मेहमानों को किया प्रभावित
  • भारतीय संस्कृति, आस्था और आध्यात्मिकता को करीब से महसूस करने का माध्यम बन रही श्रीराम की नगरी

अयोध्या। रामायण के प्रसंगों को किताबों में पढ़ना और श्रीराम की नगरी में उनकी सांस्कृतिक विरासत को करीब से महसूस करना, दोनों अनुभवों में बड़ा अंतर है। अर्जेंटीना से आए ब्रांको के लिए अयोध्या की यात्रा इसी अंतर को समझने का अवसर बनी। रामायण पर शोध कर रहे ब्रांको भारतीय आध्यात्मिक परंपराओं को जानने की जिज्ञासा लेकर अयोध्या पहुंचे। वहीं रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से मारिया और एलेक्जेंड्रा भी आध्यात्मिक पर्यटन के लिए श्रीराम की नगरी पहुंचीं। अयोध्या की धार्मिक पहचान, सांस्कृतिक वैभव और दीपोत्सव की भव्यता ने इन विदेशी मेहमानों के अनुभव को विशेष बना दिया।

ब्रांको भारत के भ्रमण पर हैं। इस दौरान उन्होंने वाराणसी, मथुरा, आगरा और अमृतसर की यात्रा की। रामायण पर शोध कर रहे ब्रांको के लिए अयोध्या केवल एक पर्यटन स्थल नहीं, बल्कि अध्ययन और आध्यात्मिक जिज्ञासा से जुड़ा महत्वपूर्ण पड़ाव है। यहां रामायण से जुड़ी परंपराओं, धार्मिक वातावरण और सांस्कृतिक स्वरूप को करीब से देखने की उनकी उत्सुकता रही। दीपोत्सव के दौरान अयोध्या की भव्यता, दीपों की जगमगाहट और उत्सव में दिखाई देने वाली सामूहिक आस्था ने उनके अनुभव को और गहरा बनाया।

ब्रांको ने भारत में अपने अनुभव को अद्भुत और प्रभावशाली बताया। उन्होंने कहा कि यहां लोगों के बीच रहकर अपनापन महसूस होता है। अकेले यात्रा करने के बावजूद उन्हें सुरक्षा और सहजता का अनुभव हुआ। दीपावली के अवसर पर अयोध्या पहुंचना उनके लिए सौभाग्य की बात रही। भारतीय संस्कृति और आध्यात्मिक परंपराओं को प्रत्यक्ष अनुभव करना उनकी यात्रा का महत्वपूर्ण हिस्सा है। रामायण पर शोध के साथ श्रीराम की नगरी को करीब से समझने की उनकी जिज्ञासा इस यात्रा को और खास बनाती है।

रूस के सेंट पीटर्सबर्ग से आईं मारिया और एलेक्जेंड्रा भी अयोध्या की आध्यात्मिक पहचान से प्रभावित हुईं। उनके लिए यहां की धार्मिक परंपराएं, सांस्कृतिक वातावरण और दीपोत्सव का उल्लास भारतीय जीवन में आस्था की गहरी भूमिका को समझने का माध्यम बना। विदेशी पर्यटकों की ये यात्राएं अयोध्या के बदलते पर्यटन स्वरूप की तस्वीर भी प्रस्तुत करती हैं। श्रीराम की नगरी अब केवल धार्मिक श्रद्धालुओं ही नहीं, बल्कि भारतीय संस्कृति, रामायण और आध्यात्मिक जीवन को समझने की इच्छा रखने वाले विदेशी पर्यटकों के लिए भी आकर्षण का केंद्र बन रही है।

Also Read- उत्तराखंड का अनोखा मां कोटगाड़ी मंदिर: जहां चिट्ठी और स्टांप पेपर पर अर्जी लगाकर मांगा जाता है न्याय, कहलाती हैं 'न्याय की देवी'

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow

Advertisement
Advertisement