Banda News: यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में चमकेगा बांदा का दुर्लभ शजर पत्थर, पारंपरिक बालूशाही और सोहन हलवा का सजेगा स्वाद

ग्रेटर नोएडा में आयोजित यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो 2026 में बांदा का दुर्लभ शजर पत्थर, प्रसिद्ध बालूशाही और सोहन हलवा अंतरराष्ट्रीय खरीदारों के बीच प्रदर्शित होगा।

By INA News Desk
Sep 23, 2026 - 19:26
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Banda News: यूपी इंटरनेशनल ट्रेड शो में चमकेगा बांदा का दुर्लभ शजर पत्थर, पारंपरिक बालूशाही और सोहन हलवा का सजेगा स्वाद

बांदा। बुंदेलखंड के सांस्कृतिक गौरव और दुर्लभ प्राकृतिक शिल्प का प्रतीक माना जाने वाला बांदा का प्रसिद्ध 'शजर पत्थर' एक बार फिर वैश्विक व्यापार पटल पर अपनी चमक बिखेरने के लिए तैयार है। ग्रेटर नोएडा स्थित इंडिया एक्सपो सेंटर एंड मार्ट में आयोजित होने वाले 'उत्तर प्रदेश इंटरनेशनल ट्रेड शो' (UPITS) 2026 में बांदा जनपद के हस्तशिल्पियों, खाद्य प्रसंस्करण उद्यमियों और युवा स्टार्टअप्स की सशक्त भागीदारी सुनिश्चित की गई है। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के नेतृत्व में स्थानीय हुनर को अंतरराष्ट्रीय बाजार उपलब्ध कराने की मुहिम के तहत बांदा के पारंपरिक शिल्प और स्थानीय व्यंजनों को विशेष स्थान दिया गया है।

केन नदी की जलधाराओं और तलहटी में मिलने वाला शजर पत्थर अपनी प्राकृतिक चित्रकारी और पारदर्शिता के लिए विश्वभर में अनूठा माना जाता है। इस बार ट्रेड शो में इस दुर्लभ पत्थर से तराशे गए कलात्मक हस्तशिल्प के साथ-साथ बांदा की पारंपरिक मिष्ठान संस्कृति और आधुनिक बेकरी उत्पादों का संगम भी देखने को मिलेगा।

चार प्रमुख श्रेणियों में बांदा की सहभागिता: ओडीओपी से लेकर सीएम युवा योजना तक

उद्योग विभाग के संयुक्त आयुक्त सुधीर श्रीवास्तव के अनुसार, ट्रेड शो में बांदा जनपद का प्रतिनिधित्व चार अलग-अलग व्यावसायिक श्रेणियों के माध्यम से किया जा रहा है। इसका उद्देश्य केवल पारंपरिक शिल्पकला तक सीमित न रहकर जिले के समग्र आर्थिक स्वरूप को बड़े खरीदारों (बायर्स) के सामने प्रस्तुत करना है।

  • एक जनपद-एक उत्पाद (ODOP) श्रेणी: बांदा के आधिकारिक ओडीओपी उत्पाद 'शजर स्टोन क्राफ्ट' के प्रदर्शन के लिए दो समर्पित स्टॉल लगाए जाएंगे। इसके लिए जिले के कुशल कारीगर द्वारिका प्रसाद सोनी और अर्जुन गुप्ता का चयन किया गया है। ये दोनों शिल्पी शजर पत्थर पर उकेरे गए प्राकृतिक वृक्ष, पत्ती व परिदृश्यों की आकृतियों वाले पेंडेंट, अंगूठियां, टेबल टॉप्स और सजावटी स्मृति चिह्न प्रदर्शित करेंगे।

  • एक जिला-एक व्यंजन (ODOC) श्रेणी: बुंदेलखंड के खान-पान की ऐतिहासिक मिठास को वैश्विक पटल पर प्रस्तुत करने का दायित्व दीपक सोनी को सौंपा गया है। वह मेले में बांदा की सदियों पुरानी और मुंह में घुल जाने वाली पारंपरिक बालूशाही तथा प्रसिद्ध सोहन हलवा का विशेष स्टॉल लगाएंगे।

  • सूक्ष्म, लघु एवं मध्यम उद्यम (MSME) श्रेणी: आधुनिक फूड प्रोसेसिंग और उपभोक्ता उत्पादों के तहत कमल आहूजा अपने उन्नत बेकरी उत्पादों के स्टॉल के जरिए जिले के आधुनिक स्वाद और गुणवत्ता का प्रतिनिधित्व करेंगे।

  • मुख्यमंत्री युवा उद्यमी विकास अभियान: प्रदेश सरकार द्वारा युवाओं में स्वरोजगार को बढ़ावा देने के लिए संचालित इस योजना के तहत चयनित दो होनहार युवा उद्यमी—रवी नगाइच और शिवम कुशवाहा भी अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में अपने नए उत्पादों और कारोबारी विचारों के साथ भाग ले रहे हैं।

केन नदी का दुर्लभ उपहार: क्या है शजर पत्थर की विशेषता?

शजर पत्थर भूवैज्ञानिक दृष्टि से एक प्रकार का 'डेंड्रिटिक एगेट' (Dendritic Agate) है, जो भारत में केवल बांदा से होकर बहने वाली केन नदी के तटों पर प्राकृतिक रूप से पाया जाता है। इस पारदर्शी या अर्द्ध-पारदर्शी कैल्सेडोनी पत्थर के भीतर आयरन और मैंगनीज ऑक्साइड के सूक्ष्म कण प्राकृतिक दबाव के कारण पेड़ों, पत्तियों, झाड़ियों या पशु-पक्षियों जैसी आकृतियों में जम जाते हैं।

स्थानीय कारीगर पत्थरों को नदी से एकत्र करने के बाद महीनों की बारीक घिसाई और पॉलिशिंग के जरिए इन प्राकृतिक चित्रों को सतह पर उभारते हैं। इस पत्थर की सबसे बड़ी खूबी यह है कि इस पर कोई भी पेंटिंग या नक्काशी बाहर से नहीं की जाती, बल्कि इसके भीतर दिखने वाली हर आकृति पूरी तरह प्राकृतिक होती है। इसे भौगोलिक उपदर्शन (GI टैग) भी प्राप्त हो चुका है।

स्थानीय स्तर से निकलकर वैश्विक आपूर्ति श्रृंखला तक का सफर

स्थानीय कारीगरों और उद्यमियों का मानना है कि पूर्ववर्ती प्रशासनिक व्यवस्थाओं में बांदा के इस अद्वितीय शिल्प को संवर्धन और बाजार का समुचित अभाव झेलना पड़ा था, जिससे यह पारंपरिक विधा सिमट रही थी। ओडीओपी योजना के तहत वित्तीय अनुदान, औजारों के आधुनिकीकरण और राष्ट्रीय प्रदर्शनियों में स्थान मिलने से इस विधा को नया जीवन मिला है।

ग्रेटर नोएडा में आयोजित हो रहे इस अंतरराष्ट्रीय व्यापार मेले में देश-विदेश के संस्थागत आयातकों और रिटेल चेन्स के प्रतिनिधियों की मौजूदगी से बांदा के शजर कारीगरों को सीधे निर्यात ऑर्डर मिलने की प्रबल संभावनाएं हैं। वहीं, पारंपरिक मिष्ठान और युवा उद्यमियों के उत्पादों को भी राष्ट्रीय स्तर का विपणन नेटवर्क हासिल होगा, जिससे जिले में रोजगार और औद्योगिक गतिविधियों को नई गति मिलेगी।

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