बिजनौर में विधिक सहायता एवं सशक्तीकरण शिविर: वंचितों को मुख्यधारा से जोड़ने की बड़ी पहल, लोक अदालत में निपटे 20 मामले
उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण द्वारा बिजनौर में विस्थापित मछुआरा समुदाय के लिए विशेष विधिक सहायता एवं सशक्तीकरण शिविर का आयोजन किया गया।
राष्ट्रीय विधिक सेवा प्राधिकरण नई दिल्ली के कार्यकारी अध्यक्ष और उच्चतम न्यायालय के न्यायाधीश विक्रम नाथ तथा उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण के कार्यकारी अध्यक्ष व इलाहाबाद उच्च न्यायालय के वरिष्ठ न्यायाधीश महेश चंद्र त्रिपाठी के मार्गदर्शन में एक विशेष मुहिम शुरू की गई है। इस मुहिम के तहत उत्तर प्रदेश के विभिन्न हिस्सों में रह रहे विस्थापित, अनुसूचित जनजाति, वनवासी और अपनी आजीविका के लिए संघर्ष कर रहे समुदायों को समाज की मुख्यधारा से जोड़ने का प्रयास किया जा रहा है। इस कल्याणकारी कदम की शुरुआत बिजनौर जिले से की गई है, जहां जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सहयोग से विस्थापित मछुआरा समुदाय के लोगों के लिए एक विशेष विधिक सहायता एवं सशक्तीकरण शिविर का आयोजन किया गया। इस शिविर का मुख्य उद्देश्य प्रशासनिक अधिकारियों और विस्थापित लोगों के बीच की दूरी को कम करना था ताकि समाज का हर कमजोर वर्ग अपने अधिकारों के प्रति सचेत हो सके और सरकारी योजनाओं का सीधा लाभ उठा सके।
यह महत्वपूर्ण कार्यक्रम बिजनौर के ग्राम नवलपुर बैराज स्थित समग्र विद्यालय में संपन्न हुआ। कार्यक्रम में उत्तर प्रदेश राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण लखनऊ के सदस्य सचिव डॉक्टर मनु कालिया, बिजनौर के जनपद न्यायाधीश संजय कुमार-VII, जिलाधिकारी जसजीत कौर, जिला विधिक सेवा प्राधिकरण की सचिव स्वाती चंद्रा, पुलिस अधीक्षक डॉक्टर के.जी. सिंह, मुख्य विकास अधिकारी रणविजय सिंह, डीएफओ जयसिंह कुशवाहा, एसडीएम रितु रानी और पीडी आलोक वर्मा सहित कई वरिष्ठ अधिकारियों ने हिस्सा लिया। इन सभी अधिकारियों ने वहां मौजूद विस्थापित मछुआरा समुदाय के लोगों और आम जनता को कानून और उनके मौलिक अधिकारों की विस्तृत जानकारी दी। इस विशेष अवसर पर एक लोक अदालत भी लगाई गई, जिसमें आपसी सहमति और समझौते के आधार पर 20 लंबित मामलों का तुरंत निष्टारण किया गया।
इस अभियान को पूरी तरह सफल बनाने और सरकारी योजनाओं का लाभ सबसे जरूरतमंद व्यक्ति तक पहुंचाने के लिए प्रशासनिक स्तर पर कड़े निर्देश दिए गए हैं। संबंधित विभागों के अधिकारियों को जिम्मेदारी सौंपी गई है कि वे इस कार्यक्रम के खत्म होने के 15 दिनों के भीतर सभी पात्र लाभार्थियों का पंजीकरण सुनिश्चित करें। इन सभी को राज्य सरकार की विभिन्न जनकल्याणकारी योजनाओं से जोड़ा जाएगा। इस पूरी कार्रवाई की एक विस्तृत रिपोर्ट जिला विधिक सेवा प्राधिकरण के सचिव को सौंपी जाएगी, जिसे बाद में राज्य विधिक सेवा प्राधिकरण को भेजा जाएगा। कार्यक्रम के दौरान स्थानीय नागरिकों ने अपनी विभिन्न समस्याओं से अधिकारियों को सीधे अवगत कराया, जिस पर अधिकारियों ने जल्द से जल्द समाधान का भरोसा दिया। आने वाले समय में विस्थापित परिवारों की अन्य बस्तियों जैसे घासी वाला, हेमराज, चांदपुरा और धर्मनगरी में भी इसी तरह के शिविर लगाने की योजना है।
यह शिविर देर शाम तक चला, जिसमें महिलाओं, बुजुर्गों और बच्चों ने बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया। इस मौके पर आम लोगों की सुविधा के लिए एक विशेष मेडिकल कैंप भी लगाया गया था, जहां डॉक्टरों की टीम ने कुल 42 लोगों के स्वास्थ्य की जांच की और उन्हें जरूरी दवाइयां व चिकित्सकीय परामर्श मुफ्त में दिया। राज्य में अपनी तरह की इस अनूठी पहल की सफलता को देखते हुए अब उत्तर प्रदेश के अन्य जिलों में भी वंचित और जरूरतमंद वर्गों को त्वरित न्याय व प्रशासनिक मदद दिलाने के लिए ऐसे ही विशेष कानूनी और स्वास्थ्य शिविर आयोजित करने की तैयारी की जा रही है।
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