Chandni Chowk Town Hall: 160 साल पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल का होगा कायाकल्प, दिल्ली में बनेगा नया ग्लोबल हेरिटेज सेंटर
पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित 160 वर्ष पुराने ऐतिहासिक टाउन हॉल को एक विश्वस्तरीय ग्लोबल हेरिटेज सेंटर के रूप में विकसित किया जाएगा। जानिए इस धरोहर के पुनरुद्धार और संरक्षण की पूरी योजना।
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नई दिल्ली: मुगलकालीन वैभव और ब्रिटिश दौर की ऐतिहासिक स्मृतियों को समेटे पुरानी दिल्ली के चांदनी चौक स्थित 160 वर्ष से अधिक पुराने ऐतिहासिक 'टाउन हॉल' को अब एक नया जीवन मिलने जा रहा है। दिल्ली नगर निगम (एमसीडी) और पर्यटन विभाग ने इस धरोहर इमारत के संरक्षण और पुनरुद्धार की व्यापक रूपरेखा तैयार की है। योजना के तहत इस प्रतिष्ठित विक्टोरियन शैली की संरचना को अंतरराष्ट्रीय मानकों के अनुरूप एक 'ग्लोबल हेरिटेज एंड कल्चरल सेंटर' (विश्व विरासत एवं सांस्कृतिक केंद्र) के रूप में रूपांतरित किया जाएगा।
दशकों तक नगर निगम के शक्ति केंद्र के रूप में कार्य करने वाली यह इमारत वर्ष 2009-10 में एमसीडी का मुख्यालय सिविक सेंटर (मिंटो रोड) स्थानांतरित होने के बाद से उपेक्षित और सीमित उपयोग में थी। अब चांदनी चौक के पुनर्विकास चरण के अंतर्गत इस भव्य इमारत को संरक्षित करते हुए देशी-विदेशी पर्यटकों, शोधकर्ताओं और कला प्रेमियों के लिए एक जीवंत सांस्कृतिक गंतव्य बनाया जाएगा।
- 1860 के दशक से वर्तमान तक का गौरवशाली इतिहास
चांदनी चौक के मुख्य मार्ग पर स्थित इस टाउन हॉल की नींव 1860 के दशक में रखी गई थी और इसका निर्माण कार्य वर्ष 1866 के आसपास पूर्ण हुआ था। प्रारंभ में इसे 'लॉरेंस इंस्टीट्यूट' के नाम से जाना जाता था। यूरोपीय और विक्टोरियन वास्तुकला के सम्मिश्रण से बनी यह इमारत ईंट, चूने और बलुआ पत्थर की अनूठी कारीगरी का उत्कृष्ट उदाहरण है।
1866 में दिल्ली नगर पालिका द्वारा अधिग्रहीत किए जाने के बाद यह इमारत शहर के नागरिक प्रशासन का मुख्य केंद्र बन गई। स्वतंत्रता संग्राम के दौरान इस परिसर ने कई महत्वपूर्ण ऐतिहासिक घटनाओं को देखा। आजादी के बाद वर्ष 2010 तक यह दिल्ली नगर निगम के महापौर कार्यालय, स्थायी समिति और सामान्य सदन की बैठकों का साक्षी रहा। इमारत के विशाल हॉल, नक्काशीदार लकड़ी की सीढ़ियां और ऊंची मेहराबें उस दौर की वास्तुकला की पहचान हैं।
- क्या है पुनरुद्धार की विस्तृत योजना?
पुनरुद्धार परियोजना का मुख्य उद्देश्य इमारत के मूल वास्तुशिल्प स्वरूप और ऐतिहासिक बनावट को बिना किसी क्षति के सुरक्षित रखना है। विशेषज्ञ संरक्षण वास्तुकारों (Conservation Architects) की देखरेख में इसे चरणबद्ध तरीके से विकसित किया जाएगा:
दिल्ली और शाहजहानाबाद का विशेष संग्रहालय: भूतल और प्रथम तल के प्रमुख हॉलों में राजधानी दिल्ली और विशेष रूप से शाहजहानाबाद (पुरानी दिल्ली) के 400 वर्षों के सामाजिक, सांस्कृतिक और राजनीतिक इतिहास को दर्शाने वाला एक इंटरैक्टिव म्यूजियम स्थापित किया जाएगा।
डिजिटल आर्काइव और हेरिटेज लाइब्रेरी: इमारत में एक समृद्ध पुस्तकालय और डिजिटल अभिलेखागार विकसित होगा, जहां पुरानी दिल्ली के मानचित्र, दुर्लभ पांडुलिपियां, दस्तावेज और ऐतिहासिक तस्वीरें शोधकर्ताओं और आम नागरिकों के लिए उपलब्ध कराई जाएंगी।
हस्तशिल्प और कला दीर्घा (Craft & Art Gallery): पारंपरिक भारतीय दस्तकारी, जरदोज़ी, मीनाकारी और सुलेख (कलीग्राफी) को प्रदर्शित करने के लिए विशेष दीर्घाएं होंगी, जहां स्थानीय कारीगरों को अपनी कला के जीवंत प्रदर्शन का अवसर मिलेगा।
सांस्कृतिक आयोजनों के लिए ओपन-एयर स्पेस: परिसर के बाहरी खुले आहाते को सांस्कृतिक संध्याओं, शास्त्रीय संगीत, मुशायरों और विरासत व्याख्यानों के लिए एक आधुनिक एम्फीथिएटर की तरह विकसित किया जाएगा।
पारंपरिक दिल्ली का खान-पान अनुभव: पर्यटकों की सुविधा के लिए परिसर के निर्धारित हिस्से में एक हेरिटेज कैफे स्थापित करने की योजना है, जहां पुरानी दिल्ली के पारंपरिक व्यंजनों और जायके का आनंद लिया जा सकेगा।
धरोहर विशेषज्ञों के अनुसार, 160 वर्ष पुरानी इस संरचना की मजबूती की वैज्ञानिक जांच की जा चुकी है। जीर्णोद्धार के दौरान रासायनिक लेप या आधुनिक कंक्रीट के अंधाधुंध उपयोग के बजाय पारंपरिक चूना-सुर्खी मोर्टार तकनीक का उपयोग किया जाएगा ताकि दीवारों की प्राकृतिक नमी और सांस लेने की क्षमता बनी रहे।
इसके साथ ही, परिसर को आधुनिक सुरक्षा और सुविधा मानकों से लैस किया जाएगा:
अदृश्य अग्नि सुरक्षा तंत्र (Concealed Fire Fighting): इमारत के ऐतिहासिक स्वरूप को बिगाड़े बिना आधुनिक फायर अलार्म और स्प्रिंकलर सिस्टम लगाए जाएंगे।
सस्टेनेबल लाइटिंग: रात के समय इमारत की भव्यता को उभारने के लिए विशेष फसाड लाइटिंग (Facade Architectural Lighting) की व्यवस्था होगी, जो ऊर्जा-दक्ष एलईडी आधारित होगी।
दिव्यांगजन-अनुकूल अवसंरचना: वरिष्ठ नागरिकों और दिव्यांगजनों के लिए रैंप, लिफ्ट और स्पर्शनीय पथ (Tactile Path) की सुविधा सुनिश्चित की जाएगी।
चांदनी चौक में लाल किला, जामा मस्जिद, गुरुद्वारा शीश गंज साहिब और गौरी शंकर मंदिर जैसे प्रमुख धार्मिक व ऐतिहासिक स्थल पहले से ही लाखों पर्यटकों को आकर्षित करते हैं। चांदनी चौक के मुख्य मार्ग के सुंदरीकरण (Pedestrianisation Project) के बाद अब टाउन हॉल का यह कायाकल्प इस पूरे हेरिटेज कॉरिडोर की केंद्रीय कड़ी साबित होगा।
स्थानीय व्यापारिक संगठनों और निवासियों ने भी इस परियोजना का स्वागत किया है। उनका मानना है कि एक सुनियोजित सांस्कृतिक केंद्र के निर्माण से क्षेत्र में हेरिटेज वॉक, रात्रि पर्यटन (Night Tourism) और गुणवत्तापूर्ण सांस्कृतिक गतिविधियों को बढ़ावा मिलेगा, जिससे स्थानीय व्यापार और पर्यटन से जुड़े युवाओं के लिए रोजगार के नए अवसर सृजित होंगे।
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