UP Urban Development: अमृत 2.0 से संवर रहे यूपी के शहर, 29 हजार करोड़ की परियोजनाओं से पेयजल और सीवरेज को रफ्तार

उत्तर प्रदेश में अमृत 2.0 मिशन के तहत 29,716 करोड़ रुपये की 637 परियोजनाओं पर काम जारी है। 114 परियोजनाएं पूरी हो चुकी हैं, जिनसे पेयजल, सीवरेज व पर्यावरण संरक्षण को मजबूती मिल रही है।

By INA News Desk
Sep 25, 2026 - 22:08
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UP Urban Development: अमृत 2.0 से संवर रहे यूपी के शहर, 29 हजार करोड़ की परियोजनाओं से पेयजल और सीवरेज को रफ्तार

लखनऊ। उत्तर प्रदेश के शहरों को आधुनिक, स्वच्छ और पर्यावरण अनुकूल बनाने की दिशा में राज्य सरकार द्वारा संचालित अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) के कार्यों में उल्लेखनीय प्रगति दर्ज की गई है। प्रदेश के सभी 762 नगरीय निकायों और 60 प्रमुख अमृत शहरों में बुनियादी सुविधाओं को सुदृढ़ करने के उद्देश्य से 29,716.29 करोड़ रुपये की कुल 637 विकास परियोजनाओं को मंजूरी दी गई है। राज्य में शहरी आबादी को नल से शुद्ध व सुरक्षित पेयजल की निरंतर आपूर्ति, वैज्ञानिक सीवरेज नेटवर्क, वर्षा जल संचयन और हरित क्षेत्रों के संवर्धन को एक एकीकृत कार्ययोजना के तहत धरातल पर उतारा जा रहा है।

विभाग से प्राप्त आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, स्वीकृत 637 परियोजनाओं में से 114 महत्वपूर्ण परियोजनाएं निर्माण कार्य पूरा कर क्रियाशील हो चुकी हैं, जबकि 453 परियोजनाओं पर कार्य तीव्र गति से जारी है। मिशन को समयबद्ध ढंग से संचालित करने के लिए अब तक 612 परियोजनाओं को प्रशासनिक व वित्तीय स्वीकृति जारी कर दी गई है और 567 कार्यों की निविदा प्रक्रिया (टेंडर) पूर्ण कर निर्माण एजेंसियों को कार्य सौंपे जा चुके हैं।

पेयजल और स्वच्छता पर सबसे बड़ा निवेश: 27,953 करोड़ रुपये आवंटित

अमृत 2.0 योजना के बजट का सबसे बड़ा हिस्सा नागरिकों के दैनिक जीवन से सीधे जुड़े दो प्रमुख क्षेत्रों पेयजल आपूर्ति और सीवरेज प्रबंधन पर केंद्रित किया गया है। इन दोनों मदों पर कुल 27,953 करोड़ रुपये व्यय किए जा रहे हैं:

  • पेयजल आपूर्ति सुदृढ़ीकरण: 18,829 करोड़ रुपये की लागत से 437 परियोजनाओं का क्रियान्वयन किया जा रहा है। इसका प्राथमिक उद्देश्य प्रत्येक शहरी आवास तक कार्यात्मक घरेलू नल कनेक्शन (FHTC) पहुंचाना, जल शोधन संयंत्रों (WTP) की क्षमता बढ़ाना तथा पुरानी व जर्जर पाइपलाइनों को बदलकर जल रिसाव और प्रदूषण को रोकना है।

  • आधुनिक सीवरेज प्रबंधन: 10,124 करोड़ रुपये की लागत से 41 बड़ी सीवरेज परियोजनाएं संचालित हैं। इन परियोजनाओं के तहत शहरों में भूमिगत सीवर नेटवर्क बिछाने के साथ अत्याधुनिक सीवेज ट्रीटमेंट प्लांट (एसटीपी) स्थापित किए जा रहे हैं, ताकि घरेलू गंदे पानी को शोधित कर नदियों और प्राकृतिक जलाशयों को प्रदूषण मुक्त रखा जा सके।

शहरी सरोवरों का पुनर्जीवन और हरित पट्टी का विकास

शहरीकरण के कारण भूजल स्तर में आ रही गिरावट को रोकने और पारिस्थितिक संतुलन बहाल करने के लिए अमृत 2.0 में जल संरक्षण को प्राथमिकता दी गई है।

  • 190 सरोवरों का कायाकल्प: राज्य भर में 403.45 करोड़ रुपये की लागत से 190 शहरी सरोवरों के पुनर्जीवन की परियोजनाएं स्वीकृत की गई हैं। इसके तहत एक एकड़ या उससे अधिक क्षेत्रफल वाले पारंपरिक तालाबों से गाद निकालने, उनके किनारों का सौंदर्यीकरण करने और वर्षा जल संचयन (रेन वाटर हार्वेस्टिंग) के माध्यम से उन्हें भूजल पुनर्भरण का मुख्य स्रोत बनाने पर काम हो रहा है।

  • पार्क और हरित क्षेत्र विस्तार: शहरी आबादी को स्वच्छ वायु और बेहतर वातावरण उपलब्ध कराने के उद्देश्य से 89.76 करोड़ रुपये की लागत से 1,777 पार्कों और हरित भूमि परियोजनाओं का विकास किया जा रहा है। इन स्थानों पर ओपन जिम, पैदल पथ और स्थानीय प्रजातियों के छायादार वृक्ष रोपे जा रहे हैं।

गुणवत्ता और समयबद्धता पर विशेष निगरानी

यूपी जल निगम (नगरीय) के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर ने विभागीय समीक्षा के दौरान बताया कि अमृत 2.0 के तहत स्वीकृत सभी परियोजनाओं को निर्धारित समय-सीमा के भीतर और उच्च गुणवत्ता मानकों के साथ पूरा कराना विभाग की सर्वोच्च प्राथमिकता है।

मासूम अली सरवर ने कहा, “अमृत 2.0 के माध्यम से प्रदेश के नगरीय निकायों में बुनियादी ढांचे के सुदृढ़ीकरण के साथ-साथ जल सुरक्षा और पर्यावरण संतुलन को मजबूती मिल रही है। हमारा जोर इस बात पर है कि निर्माण कार्यों में पारदर्शिता रहे और नागरिकों को तय समय में शुद्ध पेयजल व बेहतर जल निकासी की सुविधा मिले। सरोवरों का पुनर्जीवन और पार्कों का विकास दीर्घकालिक रूप से शहरों के जीवन स्तर को ऊंचा उठाएगा।”

वर्ष 2021 से 2026 तक का समग्र विजन

भारत सरकार द्वारा 2021 से 2026 तक के लिए लागू अमृत 2.0 योजना राज्य के छोटे नगर पंचायतों से लेकर नगर निगमों तक समान रूप से नागरिक सुविधाओं का विस्तार कर रही है। आने वाले समय में जब शेष 453 परियोजनाएं पूर्ण होंगी, तो प्रदेश के शहरी क्षेत्रों में जलजनित बीमारियों की रोकथाम, जलभराव की समस्या का समाधान और भूमिगत जल स्रोतों का संरक्षण सुनिश्चित हो सकेगा, जिससे प्रदेश के शहर रहने योग्य और आत्मनिर्भर बन सकेंगे।

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