यूपी में अमृत 2.0 से बदलेगी शहरी पेयजल की सूरत: 17,431 किमी पाइपलाइन बिछाई गई, 27 लाख से अधिक घरों को मिलेगा कनेक्शन

उत्तर प्रदेश में अमृत 2.0 योजना के तहत शहरी जलापूर्ति ढांचे को मजबूत किया जा रहा है। 17,431 किमी पाइपलाइन बिछाने का कार्य पूर्ण, 1.37 करोड़ आबादी को मिलेगा सीधा लाभ।

By INA News Desk
Oct 14, 2026 - 22:04
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यूपी में अमृत 2.0 से बदलेगी शहरी पेयजल की सूरत: 17,431 किमी पाइपलाइन बिछाई गई, 27 लाख से अधिक घरों को मिलेगा कनेक्शन

लखनऊ। प्रदेश के कस्बों और शहरों में हर नागरिक तक नल से स्वच्छ पेयजल पहुंचाने का अभियान तेजी से आगे बढ़ रहा है। अटल नवीकरण एवं शहरी परिवर्तन मिशन (अमृत 2.0) के माध्यम से राज्य के नगरीय इलाकों में पानी की सप्लाई व्यवस्था का कायाकल्प किया जा रहा है। इस योजना का मकसद शहरों के पेयजल तंत्र का विस्तार करना, नए ट्यूबवेल लगाना, पानी की टंकियां बनाना और आधुनिक जल प्रबंधन प्रणाली विकसित करना है, ताकि आने वाले समय की जरूरतों को आसानी से पूरा किया जा सके।

27.49 लाख परिवारों को नल कनेक्शन देने का लक्ष्य

योजना के तहत प्रदेश की लगभग 137.45 लाख शहरी आबादी को सीधी जलापूर्ति से जोड़ने की रूपरेखा बनाई गई है। इसके अंतर्गत कुल 27.49 लाख घरों को नया पेयजल कनेक्शन दिया जाना है। बुनियादी ढांचे के निर्माण में अब तक बड़ी सफलता मिली है। निर्धारित 25,302 किलोमीटर लंबे पाइपलाइन नेटवर्क में से 17,431 किलोमीटर से अधिक का काम पूरा कर लिया गया है। इस उपलब्धि से शहरों के दूर-दराज के वार्डों और बस्तियों तक शुद्ध पानी की पहुंच आसान हो जाएगी।

984 नए नलकूप और दर्जनों जल भंडार गृह बनकर तैयार

शहरी इलाकों में पानी की उपलब्धता बढ़ाने के लिए नलकूपों और जलाशयों के निर्माण का काम भी युद्ध स्तर पर चल रहा है:

  • नलकूप निर्माण: स्वीकृत 1,950 नए नलकूपों के लक्ष्य में से 984 नलकूपों का निर्माण कार्य पूरा कर लिया गया है।

  • ऊंचे जलाशय (ओवरहेड टैंक): कुल प्रस्तावित 802 ओवरहेड जलाशयों में से 196 का निर्माण संपन्न हो चुका है।

  • भूमिगत जलाशय: 197 प्रस्तावित भूमिगत जल टंकियों में से 24 का निर्माण कार्य पूरा कराया जा चुका है।

निर्धारित समय में योजनाएं पूरी करने पर जोर

उत्तर प्रदेश जल निगम (नगरीय) के प्रबंध निदेशक मासूम अली सरवर के अनुसार, शासन की पहली प्राथमिकता हर पात्र शहरी परिवार तक शुद्ध व सुरक्षित पेयजल पहुंचाना है। उन्होंने बताया कि अमृत 2.0 के तहत चल रही परियोजनाओं की लगातार समीक्षा की जा रही है। निर्माण कार्यों को गुणवत्ता के साथ तय समयसीमा में पूरा करने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि शहरी आबादी को जलापूर्ति की समस्याओं से हमेशा के लिए राहत मिल सके।

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