RMLIMS Recruitment: मात्र 1180 रुपये में परीक्षा और डेढ़ महीने में नियुक्ति, लोहिया संस्थान के 194 तकनीकी कर्मियों को मिले नियुक्ति पत्र
डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के 194 तकनीकी संवर्ग कर्मियों को सीएम योगी ने नियुक्ति पत्र सौंपे। अभ्यर्थियों ने मात्र डेढ़ माह में पूरी हुई पारदर्शी भर्ती प्रक्रिया को सराहा।
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बिना सिफारिश सिर्फ योग्यता से मिली नौकरी: आरएमएल के नवचयनित अभ्यर्थियों ने पारदर्शी भर्ती व्यवस्था पर जताया भरोसा
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लखनऊ में बोले चयनित तकनीकी कार्मिक: स्वास्थ्य सेवाओं के आधुनिक विस्तार से मेडिकल क्षेत्र में खुले रोजगार के नए द्वार
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UP Medical Staff Recruitment: जुलाई में परीक्षा और सितंबर में जॉइनिंग, सीएम योगी के हाथों नियुक्ति पत्र पाकर खिले अभ्यर्थियों के चेहरे
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित इंदिरा गांधी प्रतिष्ठान में आयोजित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के छठे स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर प्रदेश के स्वास्थ्य क्षेत्र को 194 नए तकनीकी कार्मिकों का संबल मिला। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्थान के विभिन्न तकनीकी संवर्गों में चयनित अभ्यर्थियों को अपने हाथों से नियुक्ति पत्र प्रदान किए। इस दौरान नियुक्ति पत्र पाने वाले युवाओं ने भर्ती प्रक्रिया की गति और शुचिता पर संतोष व्यक्त करते हुए कहा कि बिना किसी अतिरिक्त खर्च, सिफारिश या अनुचित माध्यम के मात्र निर्धारित आवेदन शुल्क खर्च कर योग्यता के आधार पर उनका चयन हुआ है।
समारोह के दौरान मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नोलॉजिस्ट (एमएलटी), ऑपरेशन थिएटर (ओटी) टेक्नीशियन, रेडियोलॉजी टेक्नीशियन और टेक्निकल ऑफिसर (परफ्यूजन) जैसे अत्यंत महत्वपूर्ण पदों पर चयनित युवाओं के चेहरों पर संतोष और उत्साह साफ दिखाई दिया। अभ्यर्थियों का कहना था कि लिखित परीक्षा के आयोजन से लेकर परिणाम प्रकाशन, दस्तावेज सत्यापन और अंतिम नियुक्ति पत्र वितरण तक की पूरी प्रक्रिया करीब डेढ़ महीने के भीतर संपन्न करा ली गई।
मात्र 1180 रुपये में आवेदन से लेकर अंतिम नियुक्ति तक का सफर
ओटी टेक्नीशियन पद पर चयनित बिहार निवासी प्रिंस कुमार ने भर्ती प्रक्रिया का अपना व्यक्तिगत अनुभव साझा करते हुए बताया कि उन्होंने आवेदन के समय केवल 1180 रुपये की विहित फीस जमा की थी। इसके बाद जुलाई के अंतिम सप्ताह में पूरी पारदर्शिता के साथ लिखित परीक्षा आयोजित की गई। परीक्षा परिणाम आने के बाद दस्तावेजों की गहन पड़ताल हुई और 13 सितंबर को उन्हें राज्य के मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र मिल गया।
प्रिंस ने कहा कि पूर्व के समय में प्रतियोगी परीक्षाओं के आयोजन और उनके परिणामों को लेकर जिस तरह की अनिश्चितता बनी रहती थी, उसके विपरीत इतनी त्वरित समयसीमा में पूरी चयन प्रक्रिया का पारदर्शी ढंग से पूरा होना सामान्य परिवारों के प्रतिभावान युवाओं में बड़ा आत्मविश्वास जगाता है। बिना किसी सिफारिश या अनुचित दबाव के केवल अपनी मेहनत के दम पर चयन होने से व्यवस्था के प्रति युवाओं का भरोसा मजबूत होता है।
पारदर्शिता से बढ़ता है प्रतियोगी छात्रों का मनोबल
एमएलटी पद पर सफलता प्राप्त करने वाले आयुष शुक्ला ने कहा कि जब किसी चयन प्रक्रिया में केवल मेरिट और निर्धारित पात्रता को ही चयन का एकमात्र आधार बनाया जाता है, तो उससे अध्ययनरत युवाओं को यह स्पष्ट संदेश जाता है कि मेहनत व्यर्थ नहीं जाएगी। उन्होंने कहा कि निष्पक्ष परीक्षा प्रणाली से उन युवाओं को संबल मिलता है जो सीमित संसाधनों के बीच दिन-रात प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी करते हैं।
इसी प्रकार राजस्थान के निवासी जितेंद्र सैनी, जिनका चयन रेडियोलॉजी टेक्नीशियन के पद पर हुआ है, ने कहा कि उत्तर प्रदेश के प्रमुख चिकित्सा संस्थानों में अन्य राज्यों के योग्य अभ्यर्थियों को भी पूर्णतः योग्यता के आधार पर अवसर मिल रहा है। उन्होंने मुख्यमंत्री के हाथों नियुक्ति पत्र प्राप्त करने को अपने पेशेवर जीवन का एक अत्यंत गर्वपूर्ण क्षण बताया।
चिकित्सा सुविधाओं के विस्तार से बढ़े रोजगार के अवसर
मेडिकल लेबोरेटरी टेक्नीशियन के रूप में चयनित गौरव कुमार झा ने चिकित्सा क्षेत्र में हो रहे ढांचागत विकास पर अपने विचार रखे। उन्होंने कहा कि राजधानी लखनऊ में लोहिया संस्थान और एसजीपीजीआई जैसे उच्चस्तरीय चिकित्सा परिसरों में बिस्तरों की संख्या और विशिष्ट जांच सुविधाओं का लगातार विस्तार हो रहा है। आज न केवल पूरे उत्तर प्रदेश से बल्कि देश के विभिन्न हिस्सों और पड़ोसी देशों से भी मरीज गंभीर बीमारियों के उपचार के लिए यहां पहुंच रहे हैं।
गौरव ने रेखांकित किया कि जब स्वास्थ्य बुनियादी ढांचे का विस्तार होता है और अत्याधुनिक मशीनों की स्थापना की जाती है, तो पैरामेडिकल और तकनीकी रूप से प्रशिक्षित युवाओं के लिए सम्मानजनक रोजगार के अवसर भी स्वतः सृजित होते हैं। उन्होंने चिकित्सा क्षेत्र में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस, उन्नत रेडियोलॉजी और डिजिटल डायग्नोस्टिक्स जैसी आधुनिक तकनीकों के उपयोग को तेजी से अपनाने के प्रशासनिक दृष्टिकोण की भी सराहना की।
'एक जिला, एक मेडिकल कॉलेज' और स्वास्थ्य तंत्र की मजबूती
टेक्निकल ऑफिसर (परफ्यूजन) के रूप में जिम्मेदारी संभालने जा रहे अनुज कुमार शुक्ला ने राज्य सरकार की 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' योजना के दूरगामी प्रभावों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि जब हर जिले में मेडिकल कॉलेज और आधुनिक जांच केंद्र क्रियाशील होंगे, तो ग्रामीण और दूरदराज के अंचलों के मरीजों को सामान्य उपचार या विशेष जांचों के लिए बड़े शहरों की ओर रुख नहीं करना पड़ेगा।
अनुज ने कहा कि एक तरफ जहां योग्य तकनीकी कर्मियों की पारदर्शी भर्ती से युवाओं को रोजगार मिल रहा है, वहीं दूसरी तरफ इन दक्ष पेशेवरों की तैनाती से सरकारी अस्पतालों और स्वायत्त संस्थानों में जांच और ऑपरेशन थिएटर की कार्यक्षमता कई गुना बढ़ जाएगी। इससे अंततः आम जनता को समयबद्ध, सटीक और गुणवत्तापूर्ण चिकित्सा सेवाएं प्राप्त होंगी। संस्थान के सभागार में नवनियुक्त सभी तकनीकी कर्मियों ने अपने दायित्वों का निर्वहन पूरी निष्ठा, व्यावसायिक नैतिकता और संवेदनशीलता के साथ करने का संकल्प लिया।
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