RMLIMS Foundation Day: सीएम योगी ने किया ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट का लोकार्पण, बोले- पारदर्शी व्यवस्था से बदल रही यूपी की तस्वीर
लखनऊ में डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान के छठे स्थापना दिवस पर सीएम योगी आदित्यनाथ ने ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट का लोकार्पण किया और स्वास्थ्य क्षेत्र के विकास का खाका खींचा।
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लोहिया संस्थान का छठा स्थापना दिवस: मुख्यमंत्री योगी बोले- 9.5 साल में 9.5 लाख सरकारी नौकरियां दीं, भर्ती पर कोई नहीं उठा सकता उंगली
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UP Healthcare Transformation: 41 से बढ़कर 85 हुए मेडिकल कॉलेज, आरएमएलआईएमएस में जल्द शुरू होगी बोन मैरो ट्रांसप्लांट सुविधा
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लखनऊ में बोले मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ: एक परिवार की गलतियों की कीमत प्रदेश ने चुकाई, अब पहचान के संकट से मुक्त है उत्तर प्रदेश
लखनऊ: उत्तर प्रदेश की राजधानी लखनऊ स्थित डॉ. राम मनोहर लोहिया आयुर्विज्ञान संस्थान (RMLIMS) के छठे स्थापना दिवस समारोह के अवसर पर मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने संस्थान में अत्याधुनिक अंग प्रत्यारोपण (ऑर्गन ट्रांसप्लांट) यूनिट समेत कई नई स्वास्थ्य सेवाओं का विधिवत लोकार्पण किया। इस दौरान जनसमूह और चिकित्सा संकाय को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि अतीत में एक व्यक्ति और एक परिवार द्वारा की गई सत्तापरक गलतियों का खामियाजा पूरे उत्तर प्रदेश को पहचान के संकट, अराजकता और प्रशासनिक भ्रष्टाचार के रूप में भुगतना पड़ा था। उन्होंने कहा कि आज प्रदेश शुचिता, निष्पक्षता और विकास के साथ आगे बढ़ रहा है, जिससे उत्तर प्रदेश के नागरिकों का मान पूरे देश में बढ़ा है।
समारोह में चिकित्सा जगत के विशेषज्ञों, प्रशासनिक अधिकारियों और जनप्रतिनिधियों को संबोधित करते हुए मुख्यमंत्री ने राज्य में स्वास्थ्य ढांचे और रोजगार सृजन की दिशा में हुए व्यापक बदलावों का ब्योरा सामने रखा।
पारदर्शी भर्ती प्रणाली से मिला 9.5 लाख युवाओं को रोजगार
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने अपने संबोधन में सरकारी नियुक्तियों की निष्पक्षता पर विशेष जोर दिया। उन्होंने कहा कि चयन प्रक्रिया जितनी पारदर्शी और साफ-सुथरी होगी, प्रशासनिक और शैक्षणिक संस्थानों के परिणाम उतने ही सकारात्मक होंगे। यदि भर्तियों में भाई-भतीजावाद, लेन-देन या क्षेत्रीय विसंगति होगी, तो संस्थान की कार्यकुशलता नष्ट हो जाती है।
उन्होंने आंकड़े साझा करते हुए कहा कि पिछले साढ़े नौ वर्षों के दौरान प्रदेश सरकार ने 9.5 लाख युवाओं को बिना किसी भेदभाव, सिफारिश या भ्रष्टाचार के सरकारी सेवा में नियुक्त किया है। वर्तमान में राज्य के लगभग 16 लाख कुल सरकारी कर्मचारियों में से 9.5 लाख कर्मचारी मौजूदा व्यवस्था के दौरान भर्ती हुए हैं। यह नया और ऊर्जावान कार्यबल बिना किसी दुर्भावना के राज्य की प्रशासनिक व्यवस्था को आगे बढ़ा रहा है।
लोहिया संस्थान में नई चिकित्सकीय सौगातें
संस्थान के वार्षिक दिवस पर मुख्यमंत्री ने मुख्य चिकित्सा अंग प्रत्यारोपण यूनिट के साथ 40 बिस्तरों वाले नए इमरजेंसी वार्ड और मातृ एवं शिशु चिकित्सालय में 100 तीमारदारों के बैठने की क्षमता वाले वातानुकूलित वेटिंग हॉल का लोकार्पण किया। उन्होंने संस्थान की वार्षिक प्रगति रिपोर्ट का औपचारिक विमोचन भी किया।
मुख्यमंत्री ने रेखांकित किया कि नई ऑर्गन ट्रांसप्लांट यूनिट के चालू होने से विशेष रूप से गुर्दा (किडनी) प्रत्यारोपण के लिए मरीजों को लंबी प्रतीक्षा सूची से राहत मिलेगी। उन्होंने घोषणा की कि बहुत जल्द संस्थान में बोन मैरो ट्रांसप्लांट की उन्नत सुविधा भी प्रारंभ कर दी जाएगी। इसके अतिरिक्त संस्थान को रोबोटिक सर्जरी, गामा नाइफ, आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आधारित रेडियोलॉजी डायग्नोस्टिक, एडवांस इमेजिंग और डिजिटल हेल्थ केयर से लैस करने की दिशा में कार्य प्रगति पर है। वर्तमान में संस्थान की तकनीकी निगरानी में प्रदेश के 10 जिलों में वर्चुअल आईसीयू सेवाएं सुचारू रूप से संचालित हो रही हैं।
उपचार के लिए धन की कमी नहीं, वेटिंग लिस्ट घटाना मुख्य लक्ष्य
मुख्यमंत्री ने कहा कि आज राज्य सरकार ने ऐसी व्यवस्था बना दी है कि किसी भी नागरिक को इलाज के अभाव में केवल इसलिए परेशान न होना पड़े कि उसके पास पैसे नहीं हैं। राज्य के सभी 75 जनपदों के जिला चिकित्सालयों में 10-10 बिस्तरों वाली निशुल्क डायलिसिस यूनिट्स क्रियाशील हैं।
उन्होंने बताया कि आयुष्मान भारत योजना, मुख्यमंत्री जन आरोग्य योजना, पंडित दीनदयाल उपाध्याय राज्य कर्मचारी कैशलेस चिकित्सा योजना तथा मुख्यमंत्री राहत कोष से गंभीर रोगों के इलाज के लिए निरंतर वित्तीय सहायता दी जा रही है। उन्होंने डॉक्टरों और चिकित्सा प्रशासकों से आह्वान किया कि वर्तमान समय में धन की नहीं, बल्कि गंभीर बीमारियों के इलाज और सर्जरी के लिए लगने वाली लंबी वेटिंग लिस्ट को कम करने की चुनौती है, जिसे दक्षता और समय प्रबंधन से ही हल किया जा सकता है।
20 बेड के अस्पताल से 1,400 बेड के सुपर स्पेशियलिटी संस्थान तक का सफर
लोहिया संस्थान के क्रमिक विकास का उल्लेख करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि वर्ष 2017 से पहले यह अनिश्चितता थी कि इसे सामान्य अस्पताल रखा जाए या विशिष्ट संस्थान बनाया जाए। सरकार ने नीतिगत निर्णय लेते हुए इसे स्वायत्त आयुर्विज्ञान संस्थान का दर्जा दिया।
शुरुआती दौर में मात्र 20 बेड के प्राथमिक ढांचे से संचालित होने वाला यह परिसर आज 1,400 बिस्तरों वाले एक प्रतिष्ठित सुपर स्पेशियलिटी संस्थान का रूप ले चुका है। उन्होंने कहा कि पहले अखबारों में इस परिसर की अव्यवस्थाओं की खबरें रहती थीं, जबकि आज मरीजों की संतुष्टि का प्रतिशत बढ़ा है। भविष्य की आवश्यकताओं को देखते हुए संस्थान परिसर में 1,010 बेड का एक नया बहुमंजिला अस्पताल और 350 बेड का आधुनिक ट्रॉमा सेंटर स्थापित करने की योजना पर काम चल रहा है।
चिकित्सा शिक्षा में अभूतपूर्व विस्तार: 41 से 85 हुए मेडिकल कॉलेज
राज्य में मेडिकल इंफ्रास्ट्रक्चर की तुलनात्मक स्थिति रखते हुए मुख्यमंत्री ने बताया कि वर्ष 2017 से पहले उत्तर प्रदेश के भीतर सरकारी और निजी क्षेत्र को मिलाकर कुल 41 मेडिकल कॉलेज संचालित थे। वर्तमान में यह संख्या बढ़कर 85 तक पहुंच चुकी है, साथ ही गोरखपुर और रायबरेली में दो पूर्णकालिक एम्स (AIIMS) मरीजों को उच्चस्तरीय सेवाएं दे रहे हैं।
एमबीबीएस पाठ्यक्रमों की क्षमता 4,690 सीटों से बढ़ाकर 13,600 से अधिक कर दी गई है, जबकि पोस्ट ग्रेजुएट (पीजी) की सीटें 3,564 से बढ़कर 5,067 हो चुकी हैं। पूर्व में जहां राज्य में केवल दो राजकीय नर्सिंग कॉलेज थे, वहीं अब 26 नर्सिंग कॉलेज क्रियाशील हैं और 33 अन्य का निर्माण अंतिम चरण में है। सरकारी मेडिकल कॉलेजों में शैक्षणिक फैकल्टी की संख्या 1,227 से बढ़कर 3,438 हो चुकी है।
मेडिकल डाटा और शोध के स्वदेशीकरण पर जोर
चिकित्सकों और शोधार्थियों को प्रेरित करते हुए मुख्यमंत्री ने कहा कि भारतीय चिकित्सा संस्थानों को केवल उपचार तक सीमित न रहकर अनुसंधान और डाटा संरक्षण पर ध्यान देना होगा। उन्होंने कहा कि हमारी आबादी और बीमारियों के डाटा के आधार पर विदेशी शोधकर्ता अपने निष्कर्ष प्रस्तुत करते हैं, क्योंकि हम अपने डाटा का दस्तावेजीकरण नहीं कर पाते।
उन्होंने एसजीपीजीआई में सेंटर ऑफ एक्सीलेंस, आईआईटी कानपुर के साथ मिलकर बनाए जा रहे मेडटेक सेंटर ऑफ एक्सीलेंस और यमुना एक्सप्रेसवे पर बन रहे मेडिकल डिवाइस पार्क का उदाहरण दिया। मुख्यमंत्री ने जापानी इंसेफेलाइटिस की वैक्सीन का उदाहरण देते हुए कहा कि जिस टीके को 1905 में जापान ने खोजा था, उसे भारत पहुंचने में 100 वर्ष लग गए। इसके विपरीत, कोविड महामारी के समय भारतीय वैज्ञानिकों ने मात्र नौ महीने के भीतर दो स्वदेशी टीके विकसित कर देशवासियों को सुरक्षित किया और 100 से अधिक मित्र देशों को निर्यात भी किया।
194 पदों के नियुक्ति पत्र और विशिष्ट सम्मान
स्थापना दिवस समारोह के मंच से मुख्यमंत्री ने लोहिया संस्थान में नवचयनित 194 स्वास्थ्य व तकनीकी कर्मियों को नियुक्ति पत्र वितरित किए। इनमें टेक्निकल ऑफिसर परफ्यूजन अनुज कुमार शुक्ला, डायटीशियन ममता तिवारी और सावन कुमार प्रमुख रूप से शामिल रहे।
इसके साथ ही उत्कृष्ट कार्य करने वाले डॉक्टरों और स्वास्थ्य कर्मियों को मंच से सम्मानित किया गया। जनरल मेडिसिन विभागाध्यक्ष डॉ. विक्रम सिंह को 'डायरेक्टर एक्सीलेंस अवार्ड' प्रदान किया गया। डॉ. आलोक श्रीवास्तव और डॉ. अजय कुमार वर्मा को 'डायरेक्टर्स अवार्ड ऑफ मेरिट', नर्सिंग संवर्ग में उमा पांडेय को मेरिट अवार्ड तथा चीफ नर्सिंग ऑफिसर (सीएनओ) सुमन सिंह को लाइफटाइम अचीवमेंट अवार्ड से नवाजा गया। मुख्यमंत्री ने डॉ. अजय कुमार वर्मा की पुस्तक ‘सही जानकारी सही देखभाल’ और डॉ. एसएस नाथ की पुस्तक ‘क्रिटिकल केयर फॉल्स’ का विमोचन भी किया।
विपक्ष पर उपमुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक का प्रहार
समारोह को संबोधित करते हुए उप मुख्यमंत्री ब्रजेश पाठक ने पूर्ववर्ती समाजवादी पार्टी सरकार पर कड़ा राजनीतिक प्रहार किया। उन्होंने आरोप लगाया कि वर्ष 2017 से पहले चिकित्सा संस्थानों में टेंडर प्रक्रिया से लेकर कैंटीन, सुरक्षा और वाहन स्टैंड तक के ठेके राजनीतिक प्रभाव वाले चहेतों को बांटे जाते थे, जिससे व्यवस्थाएं पंगु हो गई थीं।
उन्होंने कहा कि मौजूदा सरकार में 'वन डिस्ट्रिक्ट, वन मेडिकल कॉलेज' के संकल्प को पूरा किया जा रहा है और उत्तर प्रदेश को मेडिकल टूरिज्म का नया हब बनाने की दिशा में काम जारी है। समारोह में चिकित्सा शिक्षा राज्य मंत्री मयंकेश्वर शरण सिंह, अपर मुख्य सचिव अमित कुमार घोष और संस्थान के निदेशक डॉ. सीएम सिंह समेत कई गणमान्य व्यक्ति उपस्थित रहे।
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