Prayagraj News: प्रयागराज में 'यूपी डायलॉग - चैप्टर 2' का आयोजन, 200 से अधिक युवाओं ने परखी प्रदेश की एक दशक की विकास यात्रा
प्रयागराज में 'फ्रेंड्स ऑफ यूपी' द्वारा आयोजित 'यूपी डायलॉग - चैप्टर 2' में 200 से अधिक युवा जुटे। कानून-व्यवस्था, रोजगार, शिक्षा और धार्मिक पर्यटन पर विशेषज्ञों से सीधा संवाद हुआ।
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UP Decade पर युवाओं और विशेषज्ञों का महामंथन: कानून-व्यवस्था, अर्थव्यवस्था और धार्मिक पर्यटन पर प्रयागराज में खुला संवाद
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फ्रेंड्स ऑफ यूपी की पहल: 'यूपी डायलॉग' में युवाओं ने पूछे तीखे सवाल, विशेषज्ञों ने बताया कैसे बदला उत्तर प्रदेश का परिदृश्य
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प्रयागराज में युवाओं का समागम: शिक्षा, रोजगार और पर्यटन के नए अवसरों पर विमर्श, विकास प्रक्रिया में भागीदारी का आह्वान
प्रयागराज: उत्तर प्रदेश में बीते एक दशक के दौरान आए संरचनात्मक परिवर्तनों, सुदृढ़ होती कानून-व्यवस्था और विभिन्न क्षेत्रों में सृजित हुए नए अवसरों को केंद्र में रखकर रविवार, 13 सितंबर को संगम नगरी प्रयागराज में ‘यूपी डायलॉग - चैप्टर 2’ का आयोजन संपन्न हुआ। ‘फ्रेंड्स ऑफ यूपी’ संस्था की ओर से संयोजित इस परिचर्चा मंच पर 200 से अधिक युवा प्रतिनिधियों, छात्र-छात्राओं और स्वयंसेवकों ने शिरकत की। कार्यक्रम के दौरान ‘यूपी डिकेड’ यानी पिछले 10 वर्षों की विकास यात्रा के विभिन्न आयामों पर विषय विशेषज्ञों और युवा पीढ़ी के बीच खुला व तथ्यपरक विमर्श हुआ।
आयोजन की रूपरेखा इस प्रकार तैयार की गई थी कि युवा केवल श्रोता बनकर न रहें, बल्कि वे राज्य की नीति निर्माण प्रक्रिया, आर्थिक सुधारों, सार्वजनिक सुरक्षा और भविष्य की योजनाओं पर अपनी राय खुलकर रख सकें। वक्ताओं ने रेखांकित किया कि उत्तर प्रदेश अब केवल जनसंख्या के आधार पर नहीं, बल्कि अपनी प्रशासनिक स्थिरता, बुनियादी ढांचे के विस्तार और निवेश के नए वातावरण के कारण राष्ट्रीय स्तर पर अपनी पहचान बना रहा है।
कानून-व्यवस्था और सुरक्षित माहौल पर विधिक परिचर्चा
कार्यक्रम के पहले विमर्श सत्र में कानून एवं न्याय प्रणाली से जुड़े महत्वपूर्ण पहलुओं पर चर्चा हुई। उच्च न्यायालय की वरिष्ठ अधिवक्ता अर्चना सिंह ने कानून-व्यवस्था के क्षेत्र में आए सुधारों पर विस्तार से अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि किसी भी राज्य के सामाजिक और आर्थिक उत्थान की पहली शर्त वहां की कानून-व्यवस्था का सुदृढ़ होना है। जब नागरिक और निवेशक स्वयं को सुरक्षित महसूस करते हैं, तभी शिक्षा, उद्योग और नवाचार को गति मिलती है।
अर्चना सिंह ने युवाओं से संवाद करते हुए कहा कि एक सुरक्षित और समतामूलक समाज के निर्माण में युवा वर्ग की भूमिका केवल मूकदर्शक की नहीं हो सकती। उन्हें विधिक अधिकारों के साथ-साथ अपने कर्तव्यों के प्रति सजग रहना होगा। उन्होंने राज्य में महिलाओं की सुरक्षा, त्वरित न्याय व्यवस्था और पुलिस सुधारों से जुड़ी पहलों का उल्लेख करते हुए युवाओं का आह्वान किया कि वे सार्वजनिक जीवन में सकारात्मक और जागरूक दृष्टिकोण के साथ अपनी भागीदारी सुनिश्चित करें।
अर्थव्यवस्था, वित्त और उभरते रोजगार के अवसर
आर्थिक परिप्रेक्ष्य पर केंद्रित परिचर्चा में विषय विशेषज्ञ अरुणेश सिंह ने राज्य की वित्तीय स्थिति, नए औद्योगिक गलियारों और उभरते स्टार्टअप इकोसिस्टम पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि प्रदेश की अर्थव्यवस्था अब पारंपरिक दायरे से निकलकर विनिर्माण (मैन्युफैक्चरिंग), आईटी, लॉजिस्टिक्स और सेवा क्षेत्र की ओर तेजी से कदम बढ़ा रही है। इससे उन युवाओं के लिए नए रास्ते खुले हैं जो पहले रोजगार की तलाश में बड़े महानगरों की ओर पलायन करने को मजबूर थे।
प्रो. राजेश कुमार गर्ग ने शिक्षा के आधुनिकीकरण और कौशल विकास की आवश्यकता पर बल दिया। उन्होंने कहा कि तकनीकी बदलावों के इस दौर में युवाओं को पारंपरिक डिग्रियों से आगे बढ़कर व्यवहारपरक ज्ञान और डिजिटल दक्षता हासिल करनी होगी। वक्ताओं ने संयुक्त रूप से यह विचार रखा कि विकास योजनाओं का वास्तविक लाभ तभी मिलेगा जब युवा केवल योजनाओं के लाभार्थी न बनकर आर्थिक गतिविधियों में उत्पादक भागीदार के रूप में अपनी उपस्थिति दर्ज कराएंगे।
धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन से अर्थव्यवस्था को गति
‘यूपी डिकेड’ परिचर्चा का एक प्रमुख बिंदु उत्तर प्रदेश में तेजी से विस्तार ले रहा धार्मिक और सांस्कृतिक पर्यटन रहा। विशेषज्ञों ने विश्लेषण प्रस्तुत किया कि कैसे काशी विश्वनाथ धाम, अयोध्या में विकास कार्य, विन्ध्य कॉरिडोर और प्रयागराज महाकुंभ की तैयारियों ने स्थानीय अर्थव्यवस्था का कायाकल्प किया है।
धार्मिक पर्यटन अब केवल आस्था का विषय न रहकर होटल उद्योग, परिवहन, हस्तशिल्प, स्थानीय खान-पान और खुदरा व्यापार के लिए एक बड़ा उत्प्रेरक बन चुका है। प्रयागराज जैसे ऐतिहासिक नगरों में पर्यटन आधारित आजीविका के नए स्रोत विकसित हुए हैं, जिससे हजारों युवाओं को सीधे और परोक्ष रोजगार प्राप्त हो रहा है। वक्ताओं ने कहा कि सांस्कृतिक विरासत का संरक्षण और उसका आर्थिक उपयोग साथ-साथ चलना आधुनिक विकास का बेहतरीन उदाहरण है।
दो सत्रों में हुआ मंथन: युवाओं ने पूछे सीधे सवाल
पूरे संवाद कार्यक्रम को दो सुनियोजित सत्रों में विभाजित किया गया था। पहले सत्र में आमंत्रित वक्ताओं ने अपने-अपने शोध और व्यावहारिक अनुभवों के आधार पर विचार प्रस्तुत किए। इसके बाद आयोजित दूसरे सत्र को पूर्ण रूप से प्रश्नोत्तर और मुक्त संवाद के लिए समर्पित किया गया।
इस प्रश्नकाल के दौरान उपस्थित छात्र-छात्राओं और युवा पेशेवरों ने राज्य में प्रतियोगी परीक्षाओं की शुचिता, स्थानीय स्तर पर उच्च शिक्षा के अवसरों, जिला स्तर पर स्वास्थ्य सेवाओं की पहुंच और छोटे उद्यमियों के लिए आसान ऋण व्यवस्था जैसे गंभीर विषयों पर वक्ताओं से सीधे सवाल पूछे। युवाओं ने अपनी समस्याओं के साथ-साथ जमीनी स्तर पर नीतियों को बेहतर बनाने के लिए ठोस सुझाव भी रखे। आयोजकों ने बताया कि संवाद को एकतरफा व्याख्यान के बजाय द्विपक्षीय विमर्श का रूप देना ही इस कार्यक्रम का मूल स्वरूप था।
निरंतर संवाद श्रृंखला के रूप में आगे बढ़ेगा अभियान
‘फ्रेंड्स ऑफ यूपी’ के प्रतिनिधियों ने जानकारी दी कि ‘यूपी डायलॉग’ किसी एक दिन का आयोजन नहीं है, बल्कि इसे राज्य के विभिन्न प्रमुख जनपदों में एक निरंतर संवाद श्रृंखला के रूप में ले जाया जा रहा है। लखनऊ के बाद प्रयागराज में संपन्न हुआ ‘चैप्टर 2’ इसी कड़ी का विस्तार है। आने वाले समय में प्रदेश के अन्य संभागों में भी ऐसे मंच तैयार किए जाएंगे ताकि जमीनी स्तर पर युवाओं की आकांक्षाओं को नीतिगत चर्चाओं से जोड़ा जा सके।
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