Parliament Protest: हाथों में संविधान और तख्तियां लेकर निकले विपक्षी सांसद, नीति आयोग के पास रोके जाने पर धरने पर बैठे नेता
कांग्रेस समेत प्रमुख विपक्षी दलों ने संसद भवन से पैदल मार्च निकाला। नीति आयोग के पास दिल्ली पुलिस ने बैरिकेड्स लगाकर सांसदों को रोका, जहां जमकर नारेबाजी हुई।
- सड़क पर संग्राम: कांग्रेस समेत विपक्षी दलों का संसद से पैदल मार्च, पुलिस बैरिकेड्स पर तीखी नोकझोंक के बीच छावनी में बदली दिल्ली
- विपक्ष का बड़ा शक्ति प्रदर्शन: संसद से निकला मार्च पुलिस ने रोका, तस्वीरों में देखिए सुरक्षा का कड़ा पहरा और सियासी तकरार
- Delhi Political Protest: विपक्षी सांसदों के मार्च से लुटियंस जोन में हलचल, सुरक्षाबलों ने लगाया पहरा; सरकार के खिलाफ जमकर नारेबाजी
राजधानी नई दिल्ली में संसद भवन से लेकर नीति आयोग और आसपास के इलाकों तक एक बार फिर राजनीतिक सरगर्मी चरम पर पहुंच गई। कांग्रेस समेत विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों ने एकजुट होकर संसद परिसर से एक विशाल पैदल विरोध मार्च निकाला। जैसे ही यह मार्च आगे बढ़ा, पहले से मुस्तैद दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने बहुस्तरीय बैरिकेड्स लगाकर सांसदों को रोक दिया। इसके बाद सड़क पर ही जनप्रतिनिधियों और सुरक्षाबलों के बीच तीखी नोकझोंक शुरू हो गई और सांसद सड़क पर बैठकर नारेबाजी करने लगे, जिससे इलाके में भारी गहमागहमी का माहौल बन गया।

मार्च के दौरान विपक्षी सांसद हाथों में भारतीय संविधान की प्रतियां, विरोध दर्ज कराती तख्तियां और बैनर लिए हुए थे। सांसदों का यह जत्था केंद्र सरकार की नीतियों, लोकतांत्रिक प्रक्रियाओं में कथित हस्तक्षेप और हालिया प्रशासनिक निर्णयों के विरोध में सड़क पर उतरा था। तस्वीरों में साफ देखा जा सकता है कि पूरे इलाके को सुरक्षा छावनी में तब्दील कर दिया गया था, जहां दंगा रोधी वाहन, वज्र वाहन और भारी संख्या में पुलिस बल तैनात थे।
- बैरिकेड्स के पास तकरार और सड़क पर धरना
संसद मार्ग से नीति आयोग कार्यालय की ओर बढ़ रहे विपक्षी नेताओं को आगे बढ़ने की अनुमति नहीं दी गई। दिल्ली पुलिस के वरिष्ठ अधिकारियों ने लाउडस्पीकर के माध्यम से सांसदों को सूचित किया कि नई दिल्ली क्षेत्र में सुरक्षा कारणों और निषेधाज्ञा के चलते किसी भी प्रकार के अनधिकृत जुलूस या मार्च की इजाजत नहीं है।
इसके बावजूद जब सांसदों ने आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें मानव श्रृंखला और मजबूत लोहे के बैरिकेड्स के जरिए रोक लिया। रोके जाने से आक्रोशित सांसदों ने वहीं सड़क पर बैठकर केंद्र सरकार के खिलाफ जोरदार नारेबाजी शुरू कर दी। सांसदों का आरोप था कि चुने हुए जनप्रतिनिधियों को शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात कहने और मार्च निकालने से रोका जाना लोकतांत्रिक मर्यादाओं के विपरीत है।
- तस्वीरों में कैद हुआ सियासी टकराव
प्रदर्शन के दौरान सामने आई तस्वीरों में संसद के आसपास का दृश्य बेहद संवेदनशील नजर आया। एक ओर विपक्षी दलों के वरिष्ठ नेता और दोनों सदनों के सांसद कतारबद्ध होकर आगे बढ़ रहे थे, तो दूसरी ओर खाकी वर्दी और अर्धसैनिक बलों की मजबूत दीवार उनके सामने खड़ी थी। कई सांसदों को बैरिकेड्स के ऊपर से पर्चे दिखाते हुए और सुरक्षाकर्मियों से सवाल-जवाब करते हुए देखा गया।
इस पूरे घटनाक्रम के चलते मध्य दिल्ली और कर्तव्य पथ से जुड़े संपर्क मार्गों पर यातायात की गति धीमी पड़ गई। सुरक्षा एजेंसियों ने एहतियातन आसपास के रास्तों पर डायवर्जन लागू कर दिया ताकि आम जनता को असुविधा न हो और किसी भी अप्रिय स्थिति से निपटा जा सके।
- विपक्ष का साझा रुख: 'आवाज दबाने की कोशिश'
मार्च में शामिल कांग्रेस, तृणमूल कांग्रेस, सपा, द्रमुक और वामदलों समेत अन्य विपक्षी दलों के नेताओं ने संयुक्त रूप से कहा कि संसद के भीतर विपक्ष की आवाज को सीमित करने का प्रयास किया जाता है, और जब वे जनता से जुड़े मुद्दों को लेकर बाहर आते हैं, तो पुलिस का पहरा लगा दिया जाता है। नेताओं का तर्क था कि चुनाव प्रक्रिया की शुचिता, मतदाता अधिकारों के संरक्षण और संवैधानिक संस्थाओं की स्वतंत्रता ऐसे मुद्दे हैं जिन पर देश भर में संदेश जाना जरूरी है।

नेताओं ने स्पष्ट किया कि जब तक सरकार महत्वपूर्ण और संवेदनशील विषयों पर पारदर्शी रवैया नहीं अपनाती, तब तक सड़क से लेकर संसद के पटल तक यह विरोध जारी रहेगा। सांसदों ने इस बात पर जोर दिया कि शांतिपूर्ण मार्च निकालना उनका लोकतांत्रिक अधिकार है और इसे बलपूर्वक रोकना सत्ता पक्ष की असहजता को दर्शाता है।
इधर, सत्ता पक्ष और प्रशासनिक अधिकारियों ने पुलिस की इस कार्रवाई को पूरी तरह कानून-सम्मत और आवश्यक बताया है। पुलिस अधिकारियों के अनुसार, संसद सत्र के दौरान राजधानी का यह हिस्सा अत्यंत उच्च सुरक्षा क्षेत्र के अंतर्गत आता है। किसी भी समूह को बिना पूर्व अनुमति के संवेदनशील सरकारी इमारतों की ओर मार्च करने की अनुमति नहीं दी जा सकती।
सत्ता पक्ष के प्रवक्ताओं ने विपक्ष के इस विरोध प्रदर्शन को 'राजनीतिक ड्रामा' करार देते हुए कहा कि संसद के भीतर रचनात्मक चर्चा में भाग लेने के बजाय विपक्ष केवल सड़कों पर गतिरोध पैदा करके सुर्खियां बटोरना चाहता है। अधिकारियों ने स्पष्ट किया कि सुरक्षा व्यवस्था कानून-व्यवस्था बनाए रखने के उद्देश्य से की गई थी और किसी भी जनप्रतिनिधि के साथ दुर्व्यवहार नहीं किया गया। लगातार बढ़ते इस टकराव से स्पष्ट है कि आने वाले दिनों में यह सियासी तनातनी और अधिक तेज होगी, जिसका सीधा असर संसद की कार्यवाही पर भी देखने को मिल सकता है।
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