New Delhi News: संसद से नीति आयोग की ओर बढ़ रहे सांसदों को पुलिस ने रोका, मतदाता सूची और फॉर्म 6 के मुद्दे पर संसद से सड़क तक संग्राम

सुप्रीम कोर्ट द्वारा फॉर्म 6 संशोधन पर दी गई टिप्पणी के बाद विपक्षी सांसदों ने संसद से नीति आयोग तक मार्च निकाला। दिल्ली पुलिस ने बैरिकेडिंग लगाकर मार्च रोक दिया।

By INA News Desk
Oct 7, 2026 - 11:04
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New Delhi News: संसद से नीति आयोग की ओर बढ़ रहे सांसदों को पुलिस ने रोका, मतदाता सूची और फॉर्म 6 के मुद्दे पर संसद से सड़क तक संग्राम
  • नीति आयोग के बाहर विपक्षी सांसदों का जोरदार प्रदर्शन: दिल्ली पुलिस ने मार्च रोका, सुप्रीम कोर्ट की फॉर्म 6 टिप्पणी के बाद गरमाया सियासी माहौल
  • Parliament March Stopped: नीति आयोग के सामने रोके गए विपक्षी सांसद, फॉर्म 6 और चुनावी प्रक्रिया को लेकर केंद्र पर उठाए गंभीर सवाल
  • सुप्रीम कोर्ट के बयान के बाद विपक्ष का सड़क पर विरोध: नीति आयोग दफ्तर के बाहर बैरिकेडिंग, सांसदों और पुलिस के बीच तीखी नोकझोंक

देश की राजधानी नई दिल्ली में संसद परिसर से नीति आयोग कार्यालय की ओर पैदल मार्च निकाल रहे विभिन्न विपक्षी दलों के सांसदों को दिल्ली पुलिस ने भारी बैरिकेडिंग लगाकर बीच में ही रोक दिया। यह विरोध मार्च सुप्रीम कोर्ट की उस अहम टिप्पणी के ठीक एक दिन बाद सामने आया है, जिसमें शीर्ष अदालत ने स्पष्ट किया था कि उसने मतदाता पंजीकरण से जुड़े ‘फ़ॉर्म 6’ में किसी भी प्रकार के संशोधन या बदलाव को अपनी स्वीकृति नहीं दी है। सुप्रीम कोर्ट की इस टिप्पणी को आधार बनाकर विपक्षी सांसदों ने केंद्र सरकार और संबंधित प्राधिकारियों पर चुनावी नियमों व मतदाता सूचियों में अपारदर्शिता बरतने का आरोप लगाते हुए संसद से सड़क तक विरोध प्रदर्शन तेज कर दिया।

विरोध मार्च में शामिल सांसदों ने हाथों में संविधान की प्रतियां और तख्तियां ले रखी थीं। जैसे ही सांसदों का जत्था संसद भवन से निकलकर संसद मार्ग और नीति आयोग की मुख्य सड़क की ओर बढ़ा, वहां पहले से तैनात दिल्ली पुलिस और अर्धसैनिक बलों के जवानों ने सुरक्षा घेरा मजबूत कर दिया। नीति आयोग भवन से कुछ दूरी पर लगाए गए भारी पुलिस बैरिकेड्स के पास सांसदों को रोक दिया गया, जिसके बाद वहां सुरक्षाकर्मियों और जनप्रतिनिधियों के बीच तीखी नोकझोंक और गतिरोध देखने को मिला।

  • सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से गरमाया चुनावी मुद्दा

इस पूरे विरोध प्रदर्शन की पृष्ठभूमि सुप्रीम कोर्ट में चल रही एक याचिका की सुनवाई से जुड़ी है। अदालत में मतदाता सूची में नाम जोड़ने और संशोधन करने से जुड़े वैधानिक दस्तावेजों व नियमों को लेकर दायर याचिका पर सुनवाई के दौरान पीठ ने कहा था कि अदालत ने फॉर्म 6 में किसी भी प्रकार के बदलाव या संशोधन को मंजूरी नहीं दी है।

इस अदालती टिप्पणी के सार्वजनिक होते ही विपक्षी दलों ने इसे बड़ा राजनीतिक और संवैधानिक मुद्दा बना लिया। विपक्षी नेताओं का तर्क है कि जब देश की सर्वोच्च अदालत ने किसी बदलाव को मंजूरी नहीं दी है, तो फिर प्रशासनिक या नीतिगत स्तर पर मतदाताओं के अधिकारों को प्रभावित करने वाले कदमों को किस आधार पर आगे बढ़ाया जा रहा है? इसी के विरोध में अपनी आवाज दर्ज कराने के लिए सांसदों ने संसद सत्र के दौरान ही सामूहिक रूप से बाहर निकलकर मार्च करने का फैसला किया।

  • नीति आयोग के सामने कड़ा सुरक्षा पहरा, यातायात प्रभावित

नई दिल्ली जिले के इस संवेदनशील इलाके में सांसदों के मार्च को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने पहले से ही व्यापक सुरक्षा प्रबंध किए थे। नीति आयोग और आसपास के सरकारी भवनों की ओर जाने वाले मार्गों पर कई स्तरों की बैरिकेडिंग की गई थी। जब सांसदों ने आगे बढ़ने की कोशिश की तो पुलिस अधिकारियों ने उन्हें आगाह करते हुए बताया कि संबंधित क्षेत्र में धारा 144 अथवा निषेधाज्ञा लागू होने के कारण बिना पूर्व अनुमति के जुलूस या समूह में मार्च करने की मनाही है।

रोके जाने के बाद विपक्षी सांसदों ने सड़क पर ही बैठकर नारेबाजी शुरू कर दी। सांसदों का कहना था कि वे शांतिपूर्ण तरीके से अपनी बात रखने जा रहे थे और चुने हुए जनप्रतिनिधियों को इस तरह रोकना लोकतांत्रिक अधिकारों का हनन है। इस प्रदर्शन के चलते मध्य दिल्ली और लुटियंस जोन के कुछ प्रमुख मार्गों पर कुछ समय के लिए वाहनों की आवाजाही भी धीमी पड़ गई।

  • विपक्ष का आरोप: 'संस्थाओं और नियमों की अनदेखी'

प्रदर्शन के दौरान विपक्षी सांसदों ने आरोप लगाया कि मतदाता सूची की विश्वसनीयता लोकतांत्रिक व्यवस्था की सबसे पहली और अनिवार्य शर्त है। फॉर्म 6 किसी भी भारतीय नागरिक के लिए मतदाता सूची में नाम दर्ज कराने का आधिकारिक और वैधानिक माध्यम होता है। यदि इसमें किसी भी स्तर पर मनमाने तरीके से बदलाव या अस्पष्टता रखी जाती है, तो इसका सीधा असर आम नागरिक के वोट देने के संवैधानिक अधिकार पर पड़ता है।

नेताओं ने कहा कि सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से यह बात सामने आ गई है कि प्रशासनिक स्तर पर उठाए गए कदमों को अदालती सहमति का कवच नहीं दिया जा सकता। सांसदों ने मांग की कि सरकार और संबंधित संस्थाएं इस पूरे मामले पर संसद के भीतर स्पष्टीकरण दें और मतदाता पंजीकरण प्रणाली को पूरी तरह पारदर्शी व विवादमुक्त बनाया जाए।

  • सत्ता पक्ष का रुख: 'भ्रम फैलाने की राजनीति'

दूसरी ओर, सत्ता पक्ष से जुड़े नेताओं ने विपक्षी सांसदों के इस मार्च को केवल सुर्खियां बटोरने और जनता के बीच अविश्वास पैदा करने की कोशिश करार दिया है। सरकारी सूत्रों और सत्ता पक्ष के प्रतिनिधियों का कहना है कि नियमों और प्रक्रियाओं का पालन पूरी तरह कानून के दायरे में रहकर किया जाता है। किसी न्यायिक टिप्पणी के चुनिंदा हिस्सों को संदर्भ से काटकर उसका राजनीतिक इस्तेमाल करना विपक्ष की पुरानी कार्यशैली बन चुकी है।

अधिकारियों का यह भी कहना है कि नीति आयोग जैसी नीति-निर्धारक संस्था के सामने विरोध मार्च निकालने का कोई कानूनी या प्रक्रियात्मक औचित्य नहीं था, क्योंकि मतदाता सूची और उससे जुड़े फॉर्म पूरी तरह चुनाव आयोग के वैधानिक अधिकार क्षेत्र का हिस्सा हैं।

  • संसद के भीतर भी हंगामे के आसार

नीति आयोग के बाहर सांसदों को रोके जाने और फॉर्म 6 पर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी का यह मामला अब संसद के दोनों सदनों में भी गरमाने की पूरी संभावना है। विपक्षी दलों ने संकेत दिया है कि वे इस विषय पर सदन में कार्यस्थगन प्रस्ताव और नियम के तहत चर्चा की मांग करेंगे। कुल मिलाकर, अदालती टिप्पणी के बाद शुरू हुआ यह विवाद अब आने वाले दिनों में एक बड़े राजनीतिक टकराव का रूप लेता नजर आ रहा है।

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