Jantar Mantar Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, आइसा और विपक्षी दलों ने खोला मोर्चा

Jantar Mantar Protest: नई दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ आइसा और विपक्षी दलों ने विरोध प्रदर्शन किया। मांगें न माने जाने पर 10 अक्टूबर से बड़े आंदोलन की चेतावनी दी गई है।

By INA News Desk
Oct 3, 2026 - 12:55
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Jantar Mantar Protest: मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जंतर-मंतर पर प्रदर्शन, आइसा और विपक्षी दलों ने खोला मोर्चा
  • Delhi Protest News: CEC ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे की मांग पर अड़े छात्र व राजनीतिक संगठन, 10 अक्टूबर को बड़े आंदोलन की चेतावनी
  • Jantar Mantar Protest Updates: आइसा, नेहा बोरा और आप कार्यकर्ताओं का प्रदर्शन, दिल्ली पुलिस ने बढ़ाई जंतर-मंतर पर सुरक्षा
  • Election Commission Controversy: जंतर-मंतर पर चुनाव आयोग के खिलाफ उठी आवाज, पुलिस ने रोका तो 10 अक्टूबर से तेज होगा विरोध

राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के ऐतिहासिक धरना स्थल जंतर-मंतर पर आज राजनीतिक और सामाजिक तापमान अचानक बढ़ गया। छात्र संगठन आइसा (AISA), सामाजिक कार्यकर्ताओं, नेहा बोरा और आम आदमी पार्टी (AAP) से जुड़े प्रतिनिधियों ने मुख्य चुनाव आयुक्त (CEC) ज्ञानेश कुमार के खिलाफ जोरदार विरोध प्रदर्शन किया। प्रदर्शनकारियों ने चुनाव आयोग की कार्यप्रणाली, निष्पक्षता और हालिया चुनावी प्रक्रियाओं को लेकर सवाल खड़े करते हुए मुख्य चुनाव आयुक्त के इस्तीफे की मांग उठाई है।

प्रदर्शनकारियों के जमावड़े को देखते हुए दिल्ली पुलिस ने जंतर-मंतर और संसद मार्ग से सटे पूरे इलाके में सुरक्षा घेरा कड़ा कर दिया। पुलिस बल की अतिरिक्त कंपनियों, महिला सुरक्षाकर्मियों और त्वरित कार्रवाई दस्तों को मौके पर तैनात किया गया, जिससे प्रदर्शनकारी संसद भवन या निर्वाचन सदन की दिशा में आगे न बढ़ सकें।

  • मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ क्यों खोला गया मोर्चा?

जंतर-मंतर पर एकत्र हुए प्रदर्शनकारियों का आरोप है कि संवैधानिक संस्था के तौर पर भारतीय निर्वाचन आयोग को जिस निष्पक्षता और स्वतंत्रता के साथ कार्य करना चाहिए, उसमें गंभीर खामियां देखने को मिल रही हैं। विपक्षी दलों और छात्र प्रतिनिधियों ने आरोप लगाया कि चुनाव आचार संहिता के उल्लंघन, मतदाता सूचियों में कथित विसंगतियों और चुनावी पारदर्शिता से जुड़ी शिकायतों पर आयोग का रवैया पक्षपातपूर्ण रहा है।

प्रदर्शन के दौरान आइसा की ओर से नेहा बोरा समेत कई छात्र नेताओं ने सभा को संबोधित करते हुए कहा कि लोकतांत्रिक प्रणाली में चुनाव आयोग की विश्वसनीयता सर्वोच्च होनी चाहिए। यदि आम नागरिक या विपक्षी दलों के मन में संस्था की निष्पक्षता को लेकर अविश्वास पैदा होता है, तो यह लोकतांत्रिक ढांचे के लिए चिंताजनक स्थिति है। इसी आधार पर संगठनों ने मुख्य चुनाव आयुक्त से पद छोड़ने की मांग की है।

  • दिल्ली पुलिस की सख्ती और 10 अक्टूबर का अल्टीमेटम

जंतर-मंतर पर प्रदर्शन शुरू होते ही पुलिस ने लाउडस्पीकर के माध्यम से आयोजकों को तय दायरे में रहने की हिदायत दी। पुलिस ने संसद मार्ग और अशोक रोड की तरफ जाने वाले रास्तों पर त्रिस्तरीय बैरिकेडिंग कर दी थी। कुछ प्रदर्शनकारियों ने जब बैरिकेड्स पार कर आगे बढ़ने का प्रयास किया, तो पुलिसकर्मियों ने उन्हें रोक दिया। इस दौरान पुलिस और आंदोलनकारियों के बीच हल्की नोकझोंक भी देखने को मिली।

नागरिक अधिकारों से जुड़े मंचों (CJP) और आंदोलनकारी नेताओं ने प्रशासन को दो-टूक चेतावनी दी है कि यदि शांतिपूर्ण लोकतांत्रिक विरोध को पुलिस बल के जरिए दबाने का प्रयास किया गया, तो यह आंदोलन केवल जंतर-मंतर तक सीमित नहीं रहेगा। छात्र संगठनों और नागरिक समूहों ने ऐलान किया कि यदि उनकी आपत्तियों पर संज्ञान नहीं लिया गया और प्रशासनिक रुकावटें जारी रहीं, तो आगामी 10 अक्टूबर से इस विरोध को देशव्यापी स्तर पर बड़े जन-आंदोलन का रूप दिया जाएगा।

  • राजनीतिक दलों का समर्थन और चुनावी माहौल में तपिश

इस प्रदर्शन को विपक्षी दलों, विशेष रूप से आम आदमी पार्टी का भी प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष समर्थन मिला। पार्टी नेताओं ने कहा कि संवैधानिक संस्थाओं की स्वायत्तता की रक्षा करना हर नागरिक का कर्तव्य है। आगामी चुनावी चरणों और राजनीतिक घटनाक्रमों के बीच चुनाव आयोग के शीर्ष नेतृत्व पर सीधा निशाना साधे जाने से राजधानी के सियासी गलियारों में हलचल तेज हो गई है।

राजनीतिक विश्लेषकों का मानना है कि चुनाव आयोग पर विपक्ष का यह दबाव केवल एक दिन के धरने तक सीमित नहीं है, बल्कि यह एक सुनियोजित रणनीति का हिस्सा है जिसके तहत चुनावी शुचिता और संस्थागत स्वतंत्रता को राष्ट्रीय विमर्श का मुद्दा बनाया जा रहा है। 10 अक्टूबर की समय-सीमा तय करके आंदोलनकारी संगठनों ने स्पष्ट संकेत दिया है कि वे इस मामले को लंबे समय तक सुर्खियों में बनाए रखने की तैयारी में हैं।

जंतर-मंतर पर हुए इस विरोध प्रदर्शन के चलते मध्य दिल्ली और कनॉट प्लेस के बाहरी मार्गों पर यातायात धीमा रहा। दिल्ली ट्रैफिक पुलिस ने सुबह से ही संसद मार्ग, जनपथ और टॉल्स्टॉय मार्ग पर वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित करने के लिए एडवाइजरी जारी की थी। दफ्तर जाने वाले कर्मचारियों और दैनिक यात्रियों को कुछ समय के लिए जाम का सामना करना पड़ा। हालांकि, पुलिस के कड़े पहरे के कारण मुख्य सड़कों पर आवागमन पूरी तरह अवरुद्ध होने से बचा लिया गया।

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