CJP Jantar Mantar Protest: 'आप, सपा, टीएमसी और वामदल आए साथ...' कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को मिला विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी का खुला समर्थन

दिल्ली के जंतर-मंतर पर CJP के प्रदर्शन को आम आदमी पार्टी, तृणमूल कांग्रेस, सपा, वामपंथी दलों और योगेंद्र यादव समेत सिविल सोसाइटी का मजबूत समर्थन मिला है। पुलिस ने कई पाबंदियां लगाई हैं।

By INA News Desk
Oct 10, 2026 - 13:13
8 Views
CJP Jantar Mantar Protest: 'आप, सपा, टीएमसी और वामदल आए साथ...' कॉकरोच जनता पार्टी के प्रदर्शन को मिला विपक्षी दलों और सिविल सोसाइटी का खुला समर्थन
  • जंतर-मंतर पर CJP का शक्ति प्रदर्शन: योगेंद्र यादव, आप और टीएमसी ने उठाई आवाज, चुनाव आयोग के खिलाफ विपक्षी लामबंदी तेज
  • Opposition Backs CJP Protest: अभिजीत दीपके और ध्रुव राठी की हिरासत के बाद एकजुट हुआ विपक्ष, सपा-टीएमसी ने पुलिसिया पाबंदियों पर उठाए सवाल
  • Delhi Political Row: मुख्य चुनाव आयुक्त के खिलाफ CJP के धरने को मिला बड़ा सियासी मंच, इंडिया गठबंधन के घटक दल और सामाजिक कार्यकर्ता उतरे समर्थन में

नई दिल्ली: मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) ज्ञानेश कुमार के इस्तीफे और चुनावी प्रक्रिया की शुचिता की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) द्वारा जंतर-मंतर पर आयोजित विरोध-प्रदर्शन अब महज एक डिजिटल या प्रतीकात्मक व्यंग्य तक सीमित नहीं रह गया है, बल्कि इसने एक व्यापक राष्ट्रीय राजनीतिक आंदोलन का स्वरूप ले लिया है। दिल्ली पुलिस द्वारा हवाई अड्डे पर फ्लाइट के भीतर से CJP संस्थापक अभिजीत दीपके, रांका और सौरव की धरपकड़, सोशल मीडिया क्रिएटर काव्या कर्नाटक और यूट्यूबर ध्रुव राठी समेत 150 से अधिक कार्यकर्ताओं को हिरासत में लिए जाने के बाद प्रमुख विपक्षी दलों और नागरिक अधिकार संगठनों ने इस आंदोलन को अपना खुला और मुखर समर्थन दे दिया है।

आम आदमी पार्टी (आप), तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी), समाजवादी पार्टी (सपा), वामपंथी दलों (सीपीआई-सीपीएम) तथा जाने-माने सामाजिक व राजनीतिक विश्लेषक योगेंद्र यादव के नेतृत्व वाले स्वराज इंडिया और संयुक्त किसान मोर्चा से जुड़े सिविल सोसाइटी समूहों ने साझा तौर पर दिल्ली पुलिस की सख्त पाबंदियों की निंदा की है। विपक्षी नेताओं का कहना है कि लोकतांत्रिक देश में संवैधानिक संस्थाओं की कार्यप्रणाली पर सवाल उठाना नागरिकों का मौलिक अधिकार है और इसे दबाने के लिए पूरी राजधानी को छावनी में तब्दील कर देना सत्ता की घबराहट को दर्शाता है।

  • किन प्रमुख दलों और हस्तियों ने दिया खुला समर्थन?

जंतर-मंतर पर प्रस्तावित इस घेराव को समर्थन देने वाले राजनीतिक दलों और सामाजिक संगठनों का दायरा काफी व्यापक हो चुका है:

आम आदमी पार्टी (AAP): दिल्ली की सत्ताधारी पार्टी के वरिष्ठ नेताओं और प्रवक्ताओं ने पुलिस कार्रवाई को अघोषित आपातकाल करार दिया। पार्टी ने कहा कि दिल्ली की जनता और देश के युवाओं को शांतिपूर्ण ढंग से अपनी बात रखने से रोकने के लिए पुलिस मशीनरी का खुला दुरुपयोग किया जा रहा है।

तृणमूल कांग्रेस (TMC): पश्चिम बंगाल की सत्तारूढ़ पार्टी टीएमसी के सांसदों ने बयान जारी करते हुए कहा कि चुनाव आयोग की निष्पक्षता पर पूरे देश में सवाल उठ रहे हैं। CJP कार्यकर्ताओं पर फ्लाइट के अंदर और सड़कों पर की गई कार्रवाई यह साबित करती है कि लोकतांत्रिक संस्थाएं सवालों से बचना चाहती हैं।

समाजवादी पार्टी (सपा): उत्तर प्रदेश के मुख्य विपक्षी दल सपा ने आरोप लगाया कि युवाओं, डिजिटल क्रिएटर्स और छात्रों की आवाज को लाठी और बैरिकेड के दम पर कुचला जा रहा है। अखिलेश यादव के नेतृत्व वाली पार्टी ने हिरासत में लिए गए सभी प्रदर्शनकारियों की तत्काल रिहाई की मांग की।

वामपंथी दल (Left Front): सीपीआई और सीपीएम के छात्र-युवा संगठनों (SFI और DYFI) ने जंतर-मंतर की ओर कूच करने का आह्वान करते हुए पुलिसिया दमन के खिलाफ प्रस्ताव पारित किया।

योगेंद्र यादव और सिविल सोसाइटी: प्रख्यात सामाजिक कार्यकर्ता योगेंद्र यादव और 'भारत जोड़ो अभियान' से जुड़े सामाजिक संगठनों ने खुलकर कहा कि यह आंदोलन किसी एक व्यक्ति या समूह का नहीं, बल्कि भारतीय लोकतंत्र और चुनाव प्रणाली की विश्वसनीयता की रक्षा का सवाल है।

  • योगेंद्र यादव का तीखा बयान: 'सवालों से भाग रही व्यवस्था'

सिविल सोसाइटी के प्रमुख चेहरे योगेंद्र यादव ने सोशल मीडिया और प्रेस बयानों में दिल्ली पुलिस की कार्रवाइयों पर कड़ा ऐतराज जताया। उन्होंने कहा कि जब युवा, छात्र और सोशल मीडिया के स्वतंत्र स्वर शांतिपूर्ण तरीके से संविधान के दायरे में रहकर अपनी बात रखने आते हैं, तो उन्हें एयरपोर्ट पर फ्लाइट के अंदर से खींचकर ले जाना और सड़कों पर बसें भरकर हिरासत में लेना लोकतंत्र के बुनियादी उसूलों के खिलाफ है।

यादव ने रेखांकित किया कि मुख्य चुनाव आयुक्त के कामकाज पर सवाल उठाना हर मतदाता का हक है। यदि चुनाव आयोग और सरकार निष्पक्ष हैं, तो उन्हें प्रदर्शनकारियों के ज्ञापन को स्वीकार करना चाहिए था और उनसे संवाद स्थापित करना चाहिए था, न कि पूरे लुटियंस दिल्ली में धारा 144 लगाकर अभिव्यक्ति की आजादी पर ताला लगाना चाहिए था।

  • दिल्ली पुलिस की सख्त पाबंदियां और हाई-अलर्ट

ट्रैफिक एडवाइजरी और रूट डायवर्जन: कनॉट प्लेस, संसद मार्ग, टॉलस्टॉय मार्ग, जनपथ, अशोका रोड और बाबा खड़क सिंह मार्ग पर सामान्य वाहनों की आवाजाही को नियंत्रित कर दिया गया है। कई प्रमुख चौराहों पर भारी डायवर्जन लागू किया गया है।

मेट्रो स्टेशनों पर अतिरिक्त चौकसी: पटेल चौक, जनपथ, उद्योग भवन और केंद्रीय सचिवालय मेट्रो स्टेशनों के गेटों पर सीआईएसएफ और दिल्ली पुलिस के जवानों द्वारा सघन तलाशी अभियान चलाया जा रहा है ताकि प्रदर्शनकारी समूहों में एकत्रित न हो सकें।

धारा 144 का कड़ाई से अनुपालन: नई दिल्ली जिले के पूरे क्षेत्र में चार या उससे अधिक व्यक्तियों के एकत्रित होने पर पूर्ण प्रतिबंध लगा दिया गया है और आदेश का उल्लंघन करने वालों को मौके पर ही हिरासत में लिया जा रहा है।

  • सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी से विपक्ष को मिला संबल

शनिवार को ही इस मामले में सुप्रीम कोर्ट के वरिष्ठ न्यायाधीश न्यायमूर्ति सूर्यकांत द्वारा की गई टिप्पणी "मक्खी को मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए" ने विपक्षी दलों और कानूनी कार्यकर्ताओं को बड़ा नैतिक बल दिया है।

विपक्षी नेताओं का तर्क है कि जब देश की सर्वोच्च अदालत स्वयं पुलिसिया कार्रवाई की आनुपातिकता और जरूरत पर सवाल उठा रही है, तो सरकार को अपनी हठधर्मिता छोड़कर प्रदर्शनकारियों पर लगाए गए प्रतिबंधों को हटाना चाहिए। बॉलीवुड निर्देशक अनुराग कश्यप द्वारा सरकार और पुलिस पर किए गए तीखे हमले के बाद अब राजनीतिक दलों के मैदान में उतरने से यह पूरा विवाद केंद्र सरकार बनाम विपक्ष के एक बड़े राष्ट्रीय टकराव में बदल गया है।

Also Read- UP Politics: अखिलेश यादव का भाजपा पर बड़ा हमला, बोले- 'कुछ पहिए खुद को स्टीयरिंग समझने लगे हैं'

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow