Anurag Kashyap Statement: 'डरपोक और गुलाम...' CJP विरोध प्रदर्शन रोकने पर बॉलीवुड निर्देशक ने दिल्ली पुलिस और सत्ता को घेरा

दिल्ली में CJP के जंतर-मंतर प्रदर्शन से पहले ध्रुव राठी और अभिजीत दीपके की गिरफ्तारी पर फिल्ममेकर अनुराग कश्यप ने तीखा हमला बोला है। उन्होंने सोशल मीडिया पर कड़े शब्दों में नाराजगी जताई।

By INA News Desk
Oct 10, 2026 - 13:23
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Anurag Kashyap Statement: 'डरपोक और गुलाम...' CJP विरोध प्रदर्शन रोकने पर बॉलीवुड निर्देशक ने दिल्ली पुलिस और सत्ता को घेरा
  • दो डरपोक, 40 हजार गुलाम...' CJP प्रोटेस्ट पर बॉलीवुड के मशहूर फिल्ममेकर अनुराग कश्यप का सरकार और पुलिस पर सीधा हमला
  • Anurag Kashyap on Delhi Police Action: जंतर-मंतर पर ध्रुव राठी और दीपके की गिरफ्तारी के बाद भड़के अनुराग कश्यप, कह दी इतनी बड़ी बात
  • CJP Protest Live Row: दिल्ली में प्रदर्शनकारियों की धरपकड़ पर बॉलीवुड से उठी तीखी आवाज, अनुराग कश्यप बोले- तानाशाही की इंतेहा

मुंबई/नई दिल्ली: राष्ट्रीय राजधानी दिल्ली के जंतर-मंतर पर मुख्य चुनाव आयुक्त (सीईसी) के इस्तीफे की मांग को लेकर 'कॉकरोच जनता पार्टी' (CJP) के प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस द्वारा की गई व्यापक धरपकड़ पर अब हिंदी सिनेमा जगत के दिग्गजों की तीखी और तल्ख प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। अपनी बेबाक टिप्पणियों और व्यवस्था पर सीधे सवालों के लिए पहचाने जाने वाले मशहूर फिल्म निर्देशक व पटकथा लेखक अनुराग कश्यप ने पुलिस और सरकार की इस कार्रवाई पर कड़ा प्रहार किया है। सोशल मीडिया पर सामने आई अपनी तीखी टिप्पणी में अनुराग कश्यप ने इस पूरी प्रशासनिक कार्रवाई को कायराना बताते हुए लिखा—"दो डरपोक, 40 हजार गुलाम।"

अनुराग कश्यप का यह बयान उस समय आया जब शनिवार सुबह से ही दिल्ली में सुरक्षा एजेंसियों ने आक्रामक रुख अपनाते हुए CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके को मुंबई से दिल्ली आई फ्लाइट के अंदर से, लोकप्रिय सोशल मीडिया क्रिएटर काव्या कर्नाटक (KK Create) को प्रदर्शन स्थल के समीप से और यूट्यूबर ध्रुव राठी सहित 150 से अधिक कार्यकर्ताओं को बसों में भरकर हिरासत में ले लिया था। बॉलीवुड के जाने-माने फिल्मकार के इस बयान ने सोशल मीडिया से लेकर मुख्यधारा के राजनीतिक विमर्श में नई बहस छेड़ दी है।

  • अनुराग कश्यप के बयान के क्या हैं सियासी और सामाजिक मायने?

अनुराग कश्यप लंबे समय से देश के ज्वलंत मुद्दों, अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता और नागरिक अधिकारों पर मुखर रहे हैं। CJP कार्यकर्ताओं और डिजिटल क्रिएटर्स पर हुई कार्रवाई के बाद उन्होंने अपने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म पर सीधे तौर पर शासन व्यवस्था और पुलिस तंत्र की कार्यप्रणाली पर उंगली उठाई।

सत्ता और पुलिस पर तंज: राजनीतिक और सामाजिक विश्लेषक उनके इस बयान—'दो डरपोक, 40 हजार गुलाम'—को शीर्ष सत्ता के कथित डर और पुलिस बल के अंधानुकरण के रूप में व्याख्यायित कर रहे हैं।

अलोकतांत्रिक कदम का आरोप: कश्यप ने संकेत दिया कि जब एक शांतिपूर्ण और प्रतीकात्मक व्यंग्य-आधारित प्रदर्शन से निपटने के लिए राजधानी को छावनी में बदल दिया जाता है और पूरी पुलिस फोर्स को निहत्थे नागरिकों व इन्फ्लुएंसर्स के पीछे लगा दिया जाता है, तो यह ताकत का प्रदर्शन नहीं बल्कि व्यवस्था की कमजोरी और घबराहट को दर्शाता है।

रचनात्मक जगत में हलचल: अनुराग कश्यप के इस रुख के बाद सिनेमा, कला और साहित्य जगत के कई अन्य स्वतंत्र कलाकारों ने भी इस मुद्दे पर अपनी राय रखनी शुरू कर दी है।

  • दिल्ली में दिनभर क्या हुआ: ताबड़तोड़ कार्रवाइयों की टाइमलाइन

शनिवार 10 अक्टूबर को जंतर-मंतर पर प्रस्तावित प्रदर्शन से पहले दिल्ली पुलिस की कार्रवाई लगातार चर्चा में बनी रही:

फ्लाइट के भीतर से दीपके की गिरफ्तारी: मुंबई से दिल्ली पहुंचे CJP के संस्थापक अभिजीत दीपके, रांका और सौरव को विमान लैंड होते ही रनवे पर ही रोककर पुलिस बस में बैठा लिया गया।

काव्या कर्नाटक और ध्रुव राठी हिरासत में: सोशल मीडिया पर सूचनाप्रद वीडियो बनाने वाली काव्या कर्नाटक को सुबह ही डिटेन किया गया, जिसके बाद दोपहर तक यूट्यूबर ध्रुव राठी और 150 से अधिक समर्थकों को लुटियंस दिल्ली के अलग-अलग हिस्सों से पकड़कर थानों में नजरबंद कर दिया गया।

हाई-टेक कैमरों का पहरा: जंतर-मंतर और संसद मार्ग पर तैनात जवानों को नाइट-विजन बॉडी-वॉर्न कैमरों से लैस किया गया ताकि हर गतिविधि पर नजर रखी जा सके।

सुप्रीम कोर्ट की तल्ख टिप्पणी: मामले के अदालत पहुंचने पर न्यायमूर्ति सूर्यकांत ने भी मौखिक रूप से कहा था कि "मक्खी मारने के लिए हथौड़े का इस्तेमाल नहीं होना चाहिए।"

  • बॉलीवुड और सोशल मीडिया पर बंटे विचार

अनुराग कश्यप के इस कड़े बयान के बाद इंटरनेट पर प्रतिक्रियाओं की बाढ़ आ गई है। सोशल मीडिया यूजर्स और सिने प्रेमियों के बीच इस मुद्दे पर तीखा ध्रुवीकरण देखने को मिल रहा है:

समर्थक वर्ग: बड़ी संख्या में स्वतंत्र क्रिएटर्स, एक्टिविस्ट्स और युवाओं ने अनुराग कश्यप के बयान का समर्थन करते हुए कहा कि एक लोकतांत्रिक देश में शांतिपूर्ण विरोध, सवाल पूछने और असहमति जताने का अधिकार हर नागरिक को है। उनका मानना है कि यूट्यूबर्स और व्यंग्यकारों को पुलिस हिरासत में भेजना लोकतंत्र के स्वास्थ्य के लिए अच्छा संकेत नहीं है।

आलोचक वर्ग: वहीं, दूसरी ओर कई यूजर्स और सरकार समर्थक वर्गों ने अनुराग कश्यप की भाषा को आपत्तिजनक और दिल्ली पुलिस का अपमान करार दिया है। उनका तर्क है कि पुलिस बल दिन-रात राजधानी की सुरक्षा सुनिश्चित करता है और संवेदनशील वीवीआईपी जोन में कानून-व्यवस्था व यातायात को सुचारु बनाए रखने के लिए बिना अनुमति होने वाले जमावड़ों को रोकना पुलिस का कानूनी कर्तव्य है।

  • अभिव्यक्ति की आजादी बनाम प्रशासनिक नियंत्रण

CJP प्रदर्शन के इर्द-गिर्द घटी घटनाओं ने एक बार फिर यह बहस तेज कर दी है कि डिजिटल युग में इंटरनेट के जरिए संगठित होने वाले अभियानों से सरकारें और सुरक्षा एजेंसियां कैसे निपटती हैं। जहां एक ओर सुप्रीम कोर्ट की टिप्पणी ने आनुपातिकता के सिद्धांत (Doctrine of Proportionality) को याद दिलाया, वहीं अनुराग कश्यप जैसे सांस्कृतिक चेहरों के दखल ने इस पूरे विवाद को राष्ट्रीय स्तर पर एक बड़े नागरिक विमर्श का रूप दे दिया है। दिल्ली में स्थिति फिलहाल पूरी तरह नियंत्रण में है, लेकिन इस पूरे घटनाक्रम की गूंज आने वाले दिनों में और तेज होने के पूरे आसार हैं।

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