दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर से पश्चिमी यूपी के उद्योगों को लगे पंख: समय घटा, ईंधन में प्रति ट्रिप ₹4000 तक की बचत

दिल्ली-देहरादून एक्सप्रेसवे से पश्चिमी यूपी के उद्योगों को नई गति। 2.5 घंटे में दिल्ली का सफर, सहारनपुर के लकड़ी और मुजफ्फरनगर के स्टील कारोबार को मिला सीधा लाभ।

By INA News Desk
Oct 23, 2026 - 23:11
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दिल्ली-देहरादून कॉरिडोर से पश्चिमी यूपी के उद्योगों को लगे पंख: समय घटा, ईंधन में प्रति ट्रिप ₹4000 तक की बचत
प्रतीकात्मक चित्र
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प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी द्वारा राष्ट्र को समर्पित 213 किलोमीटर लंबा दिल्ली-देहरादून एक्सेस-कंट्रोल्ड एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश के औद्योगिक और व्यापारिक परिदृश्य के लिए एक ऐतिहासिक 'गेम चेंजर' साबित हुआ है। लगभग 12 हजार करोड़ रुपये की लागत से विकसित इस 6-लेन ग्रीनफील्ड कॉरिडोर ने दिल्ली से देहरादून के बीच यात्रा समय को 6-7 घंटे से घटाकर मात्र ढाई से तीन घंटे कर दिया है। कॉरिडोर का लगभग 64 प्रतिशत हिस्सा (135 किमी) उत्तर प्रदेश के लोनी, मंडोला, खेकड़ा, बड़ौत, शामली, मुजफ्फरनगर और सहारनपुर जिलों से गुजरता है। इसमें अकेले सहारनपुर में 45 किलोमीटर का सबसे लंबा स्ट्रेच शामिल है। 100 किमी/घंटा की गति सीमा वाले इस मार्ग पर कठा, रसूलपुर खेड़ी, सैय्यद मजरा और गणेशपुर में आधुनिक टोल प्लाजा स्थापित किए गए हैं।

सहारनपुर, मुजफ्फरनगर और शामली के उद्योगों को मिला मजबूत संबल

कॉरिडोर के चालू होने से क्षेत्रीय उद्योगों को त्वरित बाजार पहुंच का सीधा लाभ मिल रहा है:

  • सहारनपुर का काष्ठ शिल्प (Wood Carving): वैश्विक पहचान रखने वाले यहां के नक्काशीदार फर्नीचर और हस्तशिल्प उत्पादों की दिल्ली-एनसीआर के बड़े शोरूमों और अंतरराष्ट्रीय खरीदारों तक आपूर्ति अब रिकॉर्ड समय में हो रही है।

  • मुजफ्फरनगर का स्टील और पेपर उद्योग: भारी इंजीनियरिंग, रोलिंग मिलों, पेपर निर्माण और चीनी मिलों को कच्चे माल की समयबद्ध आपूर्ति तथा तैयार उत्पादों के त्वरित निकास में अभूतपूर्व सहूलियत मिली है।

  • शामली का कृषि आधारित व्यापार: कृषि उपज, गुड़-चीनी और प्रसंस्कृत खाद्य उत्पादों को दिल्ली की आजादपुर मंडी तथा उत्तराखंड के बाजारों तक बिना किसी बाधा के पहुंचाना सुगम हो गया है।

समय पर शिपमेंट और ईंधन में प्रति ट्रिप ₹4,000 तक की बचत

इंडियन इंडस्ट्रीज एसोसिएशन (आईआईए) के प्रतिनिधियों और प्रमुख निर्यातकों के अनुसार, पहले सहारनपुर से दिल्ली के आईसीडी तुगलकाबाद तक कंटेनर पहुंचने में एनएच-709बी पर जाम के चलते 8 से 10 घंटे लग जाते थे, जिससे देरी पर विदेशी खरीदार पेनल्टी लगा देते थे। अब वही दूरी 3 घंटे से भी कम समय में पूरी हो रही है, जिससे कारोबारी सुबह जाकर दोपहर तक बैठकें निपटाकर लौट रहे हैं।

ट्रांसपोर्ट सेक्टर में ट्रकों का टर्नअराउंड टाइम 50 प्रतिशत तक घट गया है। जहां पहले ट्रक अगले दिन लौटते थे, वहीं अब एक ही दिन में दोनों तरफ का चक्कर संभव हो गया है। सीधे और निर्बाध सफर के कारण जाम में बर्बाद होने वाला ईंधन बच रहा है, जिससे ट्रांसपोर्टरों को प्रति ट्रिप लगभग 3,500 से 4,000 रुपये के डीजल की सीधी बचत हो रही है।

लॉजिस्टिक्स हब के रूप में उभार और पर्यावरण संरक्षण का अनूठा संतुलन

बागपत, खेकड़ा और बड़ौत में इंटरचेंज बनने के बाद वेयरहाउस, कोल्ड स्टोरेज और आधुनिक लॉजिस्टिक्स पार्क के बड़े निवेश प्रस्ताव तेजी से सामने आ रहे हैं, जिससे कॉरिडोर के समीप भूमि के मूल्यों में 15 से 25 प्रतिशत तक की वृद्धि दर्ज की गई है। इसके साथ ही, विकास और पारिस्थितिकी के संतुलन के तहत राजाजी नेशनल पार्क क्षेत्र में गणेशपुर से देहरादून के बीच 12 किलोमीटर लंबा एलिवेटेड वाइल्डलाइफ कॉरिडोर, दो हाथी अंडरपास, छह एनिमल अंडरपास और डाटकाली सुरंग का निर्माण किया गया है, जिससे वन्यजीवों की प्राकृतिक आवाजाही पूरी तरह सुरक्षित बनी हुई है। यह आधुनिक एक्सप्रेसवे पश्चिमी उत्तर प्रदेश को राष्ट्रीय राजधानी क्षेत्र (एनसीआर) के विनिर्माण और लॉजिस्टिक्स हब के रूप में तेजी से स्थापित कर रहा है।

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