यूपी समाज कल्याण विभाग होगा हाईटेक: सरकारी कामकाज में जुड़ेगा AI, फाइलों के निस्तारण में आएगी तेजी
यूपी का समाज कल्याण विभाग अब एआई से होगा हाईटेक। ड्राफ्टिंग, रिपोर्टिंग और ई-ऑफिस समन्वय से विभागीय कार्यों में आएगी गति। रूपाम में हुआ मंथन।
उत्तर प्रदेश के शासकीय तंत्र को अधिक चुस्त, पारदर्शी और परिणामोन्मुखी बनाने की दिशा में योगी सरकार ने एक और अभिनव पहल की है। प्रशासनिक दक्षता को विस्तार देते हुए अब समाज कल्याण विभाग की दैनिक कार्यप्रणाली को अत्याधुनिक कृत्रिम बुद्धिमत्ता (एआई) और डिजिटल तकनीकों से सुसज्जित किया जा रहा है। इस तकनीकी उन्नयन का प्राथमिक उद्देश्य सरकारी पत्रों के प्रारूप तैयार करने (ड्राफ्टिंग), फाइलों पर सटीक टिप्पणियां दर्ज करने, विस्तृत विभागीय रिपोर्टों का संक्षेपण (समरी), बहुभाषी अनुवाद और आधिकारिक प्रस्तुतियां (प्रेजेंटेशन) बनाने जैसे जटिल कार्यों को त्वरित और त्रुटिहीन बनाना है। इस व्यवस्था से विभागीय अधिकारियों व कार्मिकों के समय की बचत होगी और नीतिगत निर्णयों के क्रियान्वयन में तेजी आएगी।
रूपाम के विशेष रिट्रीट कार्यक्रम में तकनीक पर हुआ मंथन
समाज कल्याण विभाग के उपनिदेशक आनंद कुमार सिंह ने प्रशासनिक कार्यों में एआई और डिजिटल टूल्स के व्यावहारिक उपयोग की रूपरेखा प्रस्तुत की। उन्होंने बताया कि इस आधुनिक बदलाव को लेकर डॉ. राम मनोहर लोहिया उत्तर प्रदेश प्रशासन एवं प्रबंधन अकादमी (रूपाम), लखनऊ में आयोजित विशेष रिट्रीट कार्यक्रम के दौरान विस्तृत तकनीकी चर्चा संपन्न हुई। इस सत्र में विभाग के वरिष्ठ अधिकारियों ने आधुनिक डिजिटल माध्यमों के जरिए प्रक्रियाओं को सुगम बनाने, मानवीय श्रम को उत्पादक कार्यों में लगाने और प्रशासनिक दक्षता को नई ऊंचाई देने से जुड़े व्यावहारिक पहलुओं पर गहन विचार-विमर्श किया।
ई-ऑफिस और अंतर-विभागीय समन्वय से बढ़ेगी पारदर्शिता
कार्यशाला में ई-ऑफिस प्रणाली, मानव संपदा प्रबंधन, जनकल्याणकारी योजनाओं में पूर्ण पारदर्शिता, वास्तविक लाभार्थियों की सटीक पहचान और विभिन्न विभागों के मध्य रियल-टाइम डेटा समन्वय जैसे महत्वपूर्ण विषयों पर भी रोडमैप तैयार किया गया। विशेषज्ञों ने रेखांकित किया कि आधुनिक तकनीक के संयोजन से कार्यालयी प्रक्रियाओं की जटिलताएं समाप्त होंगी, फाइलों के निस्तारण में होने वाला विलंब दूर होगा तथा कार्यस्थल पर टीम वर्क और संवाद अधिक प्रभावी बनेगा।
डिजिटल टूल्स के संतुलित और सुरक्षित उपयोग से समाज कल्याण विभाग की संपूर्ण कार्यसंस्कृति अधिक पारदर्शी, उत्तरदायी और जनसुलभ बनेगी, जिससे अंतिम पायदान पर खड़े जरूरतमंदों तक योजनाओं का लाभ बिना किसी देरी के पहुंच सकेगा।
What's Your Reaction?

