Deoband Smuggling Network: देवबंद से गल्फ देशों तक फैला तस्करी का जाल? विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं से धोखा

सहारनपुर के देवबंद क्षेत्र में गल्फ देशों में नौकरी दिलाने के बहाने गरीब युवाओं को कथित गोल्ड व नशा तस्करी में फंसाने वाले सिंडिकेट को लेकर उच्च स्तरीय जांच की मांग उठी है।

Jul 5, 2026 - 13:06
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Deoband Smuggling Network: देवबंद से गल्फ देशों तक फैला तस्करी का जाल? विदेश में नौकरी के नाम पर युवाओं से धोखा
  • Saharanpur Crime News: देवबंद में विदेश भेजने वाले कथित गिरोह पर उठे सवाल, गल्फ देशों की जेलों में बंद हैं कई युवा
  • मोटी कमाई का सपना और गल्फ की जेल! देवबंद में अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क की आशंका से मचा हड़कंप
  • देवबंद: गल्फ देशों में नौकरी के बहाने युवाओं को गोल्ड व नशा तस्करी का मोहरा बनाने वाले कथित सिंडिकेट की जांच की मांग

उत्तर प्रदेश के सहारनपुर जिले के अंतर्गत आने वाले ऐतिहासिक कस्बे देवबंद और उसके आसपास के ग्रामीण क्षेत्रों में खाड़ी (गल्फ) देशों में रोजगार दिलाने के नाम पर चल रहे एक बड़े और कथित अंतरराष्ट्रीय तस्करी नेटवर्क (Deoband Smuggling Network) को लेकर स्थानीय स्तर पर गंभीर चिंताएं और सवाल उठने लगे हैं। हालिया दिनों में क्षेत्र में यह चर्चा जोरों पर है कि कुछ स्थानीय और बाहरी एजेंट मिलकर आर्थिक रूप से कमजोर, सीधे-साधे और बेरोजगार ग्रामीण युवाओं को विदेश में मोटी तनख्वाह और सुनहरे भविष्य का झांसा देकर अपने जाल में फंसाते हैं। आरोप है कि इसके बाद इन युवाओं का कथित तौर पर सोने (गोल्ड) और मादक पदार्थों (नशा) की तस्करी के लिए मोहरे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है। उचित कानूनी और प्रशासनिक संज्ञान न होने के कारण अब तक इस कथित सिंडिकेट का पर्दाफाश नहीं हो सका है, जिसके चलते स्थानीय प्रबुद्ध नागरिकों और पीड़ितों के परिजनों ने पुलिस व केंद्रीय जांच एजेंसियों से इस पूरे मामले की निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की पुरजोर मांग की है।

यह पूरा मामला देवबंद क्षेत्र के दर्जनों गरीब युवाओं के गल्फ देशों की जेलों में बंद होने और इसके पीछे सक्रिय एक कथित संगठित अंतरराष्ट्रीय तस्करी सिंडिकेट की आशंका से जुड़ा है। स्थानीय निवासियों के बीच चल रही चर्चाओं के अनुसार, रोजगार के नाम पर युवाओं को विदेशों में संदिग्ध और अवैध गतिविधियों में धकेल दिया जाता है, जहां हवाई अड्डों पर सुरक्षा जांच के दौरान पकड़े जाने पर उन्हें विदेशी कानूनों के तहत लंबी जेल काटनी पड़ती है। इस गंभीर स्थिति को देखते हुए अब जनता इस नेटवर्क के पीछे छिपे मास्टरमाइंड को बेनकाब करने और दोषियों के खिलाफ सख्त कानूनी कार्रवाई करने की मांग उठा रही है।

स्थानीय सूत्रों से प्राप्त जानकारी के आधार पर इस कथित नेटवर्क की कार्यशैली (Modus Operandi) बेहद शातिर बताई जा रही है। गिरोह के सदस्य मुख्य रूप से ऐसे परिवारों और युवाओं को लक्षित करते हैं जो आर्थिक रूप से बेहद तंग हैं और रोजगार की तलाश में हैं। इन युवाओं को खाड़ी देशों में प्रतिष्ठित कंपनियों में हेल्पर, ड्राइवर या अन्य आकर्षक पदों पर काम दिलाने का लालच दिया जाता है।

आरोप है कि वीजा और हवाई टिकट की व्यवस्था करने के बाद, रवानगी के समय या यात्रा के दौरान इन युवाओं को अनजाने में या दबाव बनाकर ऐसे पैकेट थमा दिए जाते हैं जिनमें कथित तौर पर सोना या नशीले पदार्थ छिपे होते हैं। गल्फ देशों के कड़े कानूनों और हवाई अड्डों पर आधुनिक सुरक्षा तंत्र के कारण ये भोले-भाले युवा वहां की सुरक्षा एजेंसियों की गिरफ्त में आ जाते हैं। विदेश में कानूनी संरक्षण या सही जानकारी न होने के कारण वे वहां की जेलों की सलाखों के पीछे पहुंच जाते हैं, जबकि भारत में बैठा मुख्य सरगना और उसके एजेंट सुरक्षित बच निकलते हैं।

इस कथित सिंडिकेट की वजह से देवबंद क्षेत्र के कई परिवार पूरी तरह से बर्बाद होने की कगार पर पहुंच गए हैं। जिन परिवारों के युवा सदस्य खाड़ी देशों की जेलों में बंद हैं, वे गंभीर आर्थिक और मानसिक संकट से गुजर रहे हैं। अपनों को विदेशी जेलों से रिहा कराने और वहां अदालती पैरवी के खर्चों को उठाने के लिए कई परिवारों को अपनी कृषि भूमि तक बेचनी पड़ी है, तो कई भारी कर्ज के जाल में दब चुके हैं। वर्षों से अपने बेटों की घर वापसी की राह देख रहे इन परिवारों की सुध लेने वाला कोई नहीं है, जिससे स्थानीय स्तर पर आक्रोश पनप रहा है।

इस संवेदनशील विषय पर कानून व्यवस्था के जानकारों का कहना है कि यदि इन चर्चाओं और आरोपों में थोड़ी भी सच्चाई है, तो यह मानव तस्करी (Human Trafficking) और अंतरराष्ट्रीय अपराध का एक बेहद संगीन मामला है। पुलिस विभाग के स्थानीय अधिकारियों के अनुसार, यदि पीड़ित पक्ष या उनके परिजन इस प्रकार की धोखाधड़ी और जबरन तस्करी में फंसाए जाने के संबंध में कोई पुख्ता शिकायत या साक्ष्य प्रस्तुत करते हैं, तो पुलिस तुरंत मुकदमा दर्ज कर गहन कानूनी कार्रवाई करेगी। हालांकि, चूंकि मामला अंतरराष्ट्रीय सीमाओं से जुड़ा है, इसलिए स्थानीय लोग इसमें केंद्रीय जांच एजेंसियों जैसे राष्ट्रीय अन्वेषण अभिकरण (NIA) या नारकोटिक्स कंट्रोल ब्यूरो (NCB) की हस्तक्षेप की आवश्यकता जता रहे हैं।

इसके साथ ही, समाज के जागरूक नागरिकों का कहना है कि विदेश में नौकरी के नाम पर मिलने वाले हर प्रस्ताव को पूरी तरह जांच-परख के बाद ही स्वीकार किया जाना चाहिए। युवाओं और उनके परिवारों को किसी भी अनजान व्यक्ति के हाथों में अपना पासपोर्ट सौंपने या विदेश यात्रा के दौरान किसी अन्य व्यक्ति का सामान या पार्सल अपने साथ ले जाने से सख्ती से बचना चाहिए। यदि किसी भी नागरिक को अपने आस-पास ऐसे संदिग्ध एजेंटों या अवैध गतिविधियों का आभास होता है, तो उन्हें तुरंत बिना किसी डर के स्थानीय पुलिस या संबंधित सरकारी विभागों को सूचित करना चाहिए ताकि समय रहते निर्दोष युवाओं के भविष्य को सुरक्षित किया जा सके।

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