Lucknow: ओडीओपी योजना से मिला संबल, 10 लाख के ऋण से खड़ा किया डिजिटल लॉक का व्यवसाय। 

उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाली योगी सरकार की नीतियों से प्रेरित होकर अलीगढ़ की महिला उद्यमी नीलम सिंह ने कठिन समय को सफलता

Mar 9, 2026 - 16:49
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Lucknow: ओडीओपी योजना से मिला संबल, 10 लाख के ऋण से खड़ा किया डिजिटल लॉक का व्यवसाय। 
अलीगढ़ की नीलम को ओडीओपी योजना से मिला संबल, 10 लाख के ऋण से खड़ा किया डिजिटल लॉक का व्यवसाय
  • आपदा में अवसर: अलीगढ़ की महिला उद्यमी ने शुरू की डिजिटल लॉक यूनिट
  • कोविड के दौर में शुरू हुआ स्टार्टअप, आज 20 से अधिक लोगों को दे रहा रोजगार

लखनऊ: उद्योगों को प्रोत्साहन देने वाली योगी सरकार की नीतियों से प्रेरित होकर अलीगढ़ की महिला उद्यमी नीलम सिंह ने कठिन समय को सफलता की नई शुरुआत में बदल दिया। ताला नगरी के नाम से मशहूर अलीगढ़ में उन्होंने वन डिस्ट्रिक्ट वन प्रोडक्ट (ODOP) योजना के तहत एक डिजिटल लॉक यूनिट की स्थापना की। यह यूनिट न केवल लगातार सफलता की सीढ़ियां चढ़ रही है, बल्कि कई लोगों के लिए रोजगार का बेहतर माध्यम भी बन गई है।

दरअसल, नीलम ने वर्ष 2019 में इस स्टार्टअप की शुरुआत की थी। उसी समय देश कोविड महामारी के संकट से जूझ रहा था। आर्थिक गतिविधियां लगभग ठप थीं। बड़ी संख्या में लोगों का रोजगार छिन गया था। ऐसे कठिन समय में नीलम ने अपने सॉफ्टवेयर इंजीनियर पति के साथ मिलकर एक ऐसा व्यवसाय शुरू करने के बारे में सोचा, जिससे स्थानीय लोगों को उनके ही क्षेत्र में रोजगार मिल सके।

  • 10 लाख का ऋण मिला तो व्यवसाय का आधार हुआ मजबूत

अलीगढ़ पहले से ही ताला उद्योग के लिए प्रसिद्ध रहा है। नीलम ने पारंपरिक ताले को आधुनिक तकनीक के साथ जोड़ने का फैसला किया। इसी सोच के साथ उन्होंने “ओव्लॉक्स इंडिया” के नाम से डिजिटल लॉक बनाने की यूनिट शुरू की। इसकी शुरुआत आसान नहीं थी क्योंकि आर्थिक स्थिति मजबूत नहीं थी। ओडीओपी योजना के तहत उद्योग विभाग के माध्यम से बैंक ऑफ़ बड़ौदा से उन्हें 10 लाख रुपये का ऋण प्राप्त हुआ। इसमें लगभग ढाई लाख रुपये की सब्सिडी भी प्राप्त हुई। योगी सरकार की इस योजना के सहयोग से उनके सपनों को साकार करने के लिए मजबूत नींव तैयार हो गई। आज उनका यह व्यवसाय 10 करोड़ रुपये के पार जा चुका है। 

  • कोविड के दौर में शुरू हुआ, आज 20 से अधिक लोगों को दे रहा रोजगार

जब इस यूनिट की शुरुआत हुई थी, तब यहां केवल पांच-छह कर्मचारी काम करते थे। धीरे-धीरे कारोबार बढ़ता गया और आज यहां 20 से 25 लोग काम कर रहे हैं। इस यूनिट से जुड़े कर्मचारी अपने काम के अनुसार हर महीने लगभग 15 हजार से 35 हजार रुपये तक की आय अर्जित कर रहे हैं। इससे न केवल स्थानीय स्तर पर रोजगार बढ़ा है, बल्कि कई परिवारों की आर्थिक स्थिति भी मजबूत हुई है। इस यूनिट में इलेक्ट्रॉनिक कंपोनेंट्स को असेंबल कर आधुनिक डिजिटल लॉक तैयार किए जाते हैं। इन लॉक को आरएफआईडी कार्ड, मोबाइल फोन और सामान्य चाबी के माध्यम से संचालित किया जा सकता है। यही आधुनिक तकनीक इन्हें पारंपरिक तालों से अलग बनाती है।

  • कई देशों तक पहुंच रहे नीलम के स्मार्ट लॉक

सबसे खास बात यह है कि ओव्लॉक्स इंडिया के डिजिटल लॉक केवल भारत में ही नहीं, बल्कि कई देशों में सप्लाई किए जा रहे हैं। इससे अलीगढ़ की पारंपरिक ताला उद्योग की पहचान को एक नई तकनीकी दिशा मिल रही है। 

नीलम का कहना है कि पहले अलीगढ़ में अधिकतर हैंडमेड और की-बेस्ड लॉक बनाए जाते थे। इनमें मजदूरों को काफी मेहनत करनी पड़ती थी और आय भी सीमित होती थी लेकिन डिजिटल लॉक के इस नए उद्योग ने काम के स्वरूप को बदल दिया है। आज यहां काम करने वाले कर्मचारियों को बेहतर आय मिल रही है और उन्हें गर्व महसूस होता है कि उनके हाथों से बने उत्पाद देश-विदेश तक लोकप्रिय हो रहे हैं। यह कहानी केवल एक व्यवसाय की सफलता नहीं, बल्कि उस सोच की मिसाल है जो कठिन परिस्थितियों में भी अवसर तलाशती है। नीलम की यह पहल बताती है कि जब परंपरा और तकनीक साथ मिलती हैं, तो स्थानीय उद्योग भी वैश्विक पहचान बना सकते हैं।

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