हरदोई में 19 नवंबर से चलेगा फाइलेरिया रोधी अभियान- सीएचसी अहिरोरी पर ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर को दिया गया प्रशिक्षण
हरदोई के चार ब्लॉकों में 19 नवंबर से फाइलेरिया उन्मूलन अभियान चलेगा। सीएचसी अहिरोरी पर स्वास्थ्य कर्मियों को दवा खिलाने का विशेष प्रशिक्षण दिया गया।
जनपद में मच्छर जनित गंभीर व्याधि फाइलेरिया (हाथीपांव) से बचाव एवं इसके समूल उन्मूलन के उद्देश्य से 19 नवंबर से 7 दिसंबर तक व्यापक स्तर पर सामूहिक दवा सेवन (एमडीए) अभियान संचालित किया जाएगा। यह अभियान विशेष रूप से जनपद के चार प्रमुख विकासखंडों कोथावां, सांडी, बिलग्राम और अहिरोरी में चलाया जाएगा। अभियान के सुचारु एवं प्रभावी क्रियान्वयन के लिए स्वास्थ्य विभाग द्वारा सेंटर फॉर एडवोकेसी एंड रिसर्च (सीफॉर), प्रोजेक्ट कंसर्न इंटरनेशनल (पीसीआई) और विश्व स्वास्थ्य संगठन (डब्ल्यूएचओ) के संयुक्त तत्वावधान में सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अहिरोरी पर एक दिवसीय प्रशिक्षण कार्यशाला का आयोजन किया गया। इसमें ड्रग एडमिनिस्ट्रेटर (डीए), आशा कार्यकर्ताओं और संगिनियों को प्रत्यक्ष दवा सेवन कराने की बारीकियों का प्रशिक्षण दिया गया।
कार्यवाहक मुख्य चिकित्सा अधिकारी डॉ. अरविंद सचान ने बताया कि अभियान की सफलता इस बात पर निर्भर है कि पात्र व्यक्तियों को दवा का महत्व समझाते हुए उनके सामने ही उसका सेवन कराया जाए। नोडल अधिकारी डॉ. सुरेंद्र कुमार ने स्पष्ट किया कि इस बार उन परिवारों को प्राथमिकता दी जाएगी, जिन्होंने पूर्ववर्ती अभियानों के दौरान किन्हीं कारणों से दवा का सेवन नहीं किया था। ऐसे परिवारों की पूर्व सूची तैयार कर स्वास्थ्य कार्यकर्ता उन्हें दवा की उपयोगिता व सुरक्षा के प्रति जागरूक करेंगे और उन्हें दवा लेने के लिए प्रेरित करेंगे।

सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र अहिरोरी के चिकित्सा अधीक्षक डॉ. राजीव रंजन की अध्यक्षता में संपन्न प्रशिक्षण सत्र में सहायक अपर शोध अधिकारी घनश्याम, बीसीपीएम जगदीश, डब्ल्यूएचओ प्रतिनिधि आयुष शुक्ला और सहयोगी संस्था के निर्भय सिंह यादव ने तकनीकी दिशा-निर्देश साझा किए। प्रशिक्षकों ने बताया कि दवा की खुराक लाभार्थी की आयु और शारीरिक लंबाई के आधार पर निर्धारित की जाएगी। दवा का वितरण खाली पेट नहीं किया जाएगा और इसे 'डायरेक्टली ऑब्जर्व्ड ट्रीटमेंट' (डीओटी) प्रणाली के तहत स्वास्थ्य कर्मी की सीधी निगरानी में ही खिलाना अनिवार्य होगा। दवा सेवन के उपरांत हल्का बुखार या चक्कर आने जैसे सामान्य लक्षणों से न घबराने की भी सलाह दी गई है।
अभियान के तहत स्वास्थ्य कर्मियों की टीमें घर-घर जाकर पात्र नागरिकों को तीन प्रकार की औषधियां आइवरमेक्टिन, डीईसी और एल्बेंडाजोल प्रदान करेंगी। सुरक्षा मानकों के अनुरूप एक वर्ष से कम आयु के शिशुओं, गर्भवती महिलाओं और गंभीर रूप से अस्वस्थ व्यक्तियों को इस दवा के सेवन से मुक्त रखा जाएगा। प्रत्येक कार्यदल को प्रतिदिन औसतन 20 परिवारों को आच्छादित करने का लक्ष्य सौंपा गया है, ताकि शत-प्रतिशत पात्र आबादी को सुरक्षा घेरे में लाया जा सके।
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