हरदोई में जातिसूचक टिप्पणी पर सियासी घमासान: जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती वर्मा बोलीं- 'आरक्षण संविधान की देन, किसी की खैरात नहीं'

हरदोई जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती वर्मा ने सपा जिलाध्यक्ष शराफत अली के कथित जातिसूचक बयान पर कड़ा ऐतराज जताते हुए पुलिस में मुकदमा दर्ज कराने और गिरफ्तारी की मांग की है।

By INA News Desk
Oct 1, 2026 - 00:16
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हरदोई में जातिसूचक टिप्पणी पर सियासी घमासान: जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती वर्मा बोलीं- 'आरक्षण संविधान की देन, किसी की खैरात नहीं'
  • Hardoi News: सपा जिलाध्यक्ष शराफत अली के कथित बयान पर भड़कीं जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती वर्मा, FIR और SC/ST एक्ट की मांग 
  • सपा नेता के विवादित बोल पर विधिक कार्रवाई की तैयारी: प्रेमावती वर्मा ने दर्ज कराई आपत्ति, शराफत अली की गिरफ्तारी की मांग तेज
  • Hardoi Politics: 'घाट पर कपड़े धोने' वाले कथित बयान पर गरमाई राजनीति, महिला जनप्रतिनिधि ने सपा नेतृत्व पर उठाए सवाल

उत्तर प्रदेश के हरदोई जिले में निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के विरुद्ध कथित तौर पर की गई अभद्र और जातिसूचक टिप्पणी को लेकर विवाद और अधिक गहरा गया है। जिले की सर्वोच्च पंचायत प्रतिनिधि और जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती पीके वर्मा ने समाजवादी पार्टी के नेता शराफत अली के वायरल बयान पर कड़ा आक्रोश व्यक्त करते हुए उनके विरुद्ध अनुसूचित जाति एवं अनुसूचित जनजाति (नृशंसता निवारण) अधिनियम (SC/ST Act) के तहत प्राथमिकी दर्ज कराने और उनकी तत्काल गिरफ्तारी की मांग उठाई है।

सामने आए वीडियो और बयान में जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती वर्मा ने बेहद भावुक और सख्त लहजे में अपनी बात रखी। उन्होंने कहा कि समाजवादी पार्टी के नेता द्वारा जिले के प्रथम नागरिक के पद पर आसीन एक दलित महिला के प्रति जिस प्रकार की मानसिकता प्रदर्शित की गई है, वह न केवल अत्यंत निंदनीय और शर्मनाक है, बल्कि पूरे समाज और नारी शक्ति के स्वाभिमान को ठेस पहुंचाने वाली है।

"आरक्षण किसी व्यक्ति की देन नहीं, संवैधानिक अधिकार है"

कथित बयान में यह कहा गया था कि "यदि पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह यादव ने आरक्षण में संशोधन न किया होता, तो वह आज घाट पर कपड़े धो रही होतीं"। इस पर पलटवार करते हुए जिला पंचायत अध्यक्ष प्रेमावती वर्मा ने कहा कि पंचायती राज व्यवस्था में आरक्षण किसी व्यक्ति विशेष की व्यक्तिगत कृपा या खैरात नहीं है, बल्कि यह बाबा साहेब डॉ. भीमराव आंबेडकर द्वारा निर्मित संविधान और 73वें संविधान संशोधन के तहत मिला हुआ एक मजबूत लोकतांत्रिक अधिकार है।

उन्होंने कहा कि समाज के वंचित और दलित वर्गों को मुख्यधारा में प्रतिनिधित्व दिलाने के लिए जो संवैधानिक व्यवस्थाएं की गई हैं, उनको लेकर इस प्रकार की सामंती और ओछी टिप्पणी करना उस वर्ग की मेहनत और स्वाभिमान का सीधा अपमान है।

निजी संघर्ष और शिक्षिका से राजनीति तक का सफर

प्रेमावती वर्मा ने अपने जीवन के संघर्षों का उल्लेख करते हुए बताया कि मात्र 18 वर्ष की आयु में विवाह होने के बाद उनके ससुराल और परिवार ने उन्हें उच्च शिक्षा दिलाई। उन्होंने अपनी मेहनत के बल पर अध्यापन का पेशा चुना और एक शिक्षिका के रूप में बच्चों को शिक्षित किया तथा परिवार का भरण-पोषण किया।

उन्होंने स्पष्ट किया कि शिक्षिका के पद से विधिवत त्यागपत्र देने के बाद उन्होंने जनसेवा के उद्देश्य से सक्रिय राजनीति में कदम रखा था। उनका कहना था कि यदि उन्हें यह आभास होता कि लोकतंत्र में जनता द्वारा चुने जाने के बाद भी विपक्षी नेताओं द्वारा इस प्रकार की जातिसूचक गालियां और अपमानजनक आक्षेप लगाए जाएंगे, तो यह बेहद पीड़ादायक स्थिति है।

सपा के पीडीए (PDA) नारे पर गंभीर सवाल

जिला पंचायत अध्यक्ष और उनके समर्थकों ने समाजवादी पार्टी के शीर्ष नेतृत्व को भी कटघरे में खड़ा किया है। उन्होंने सवाल किया कि एक तरफ सपा प्रमुख अखिलेश यादव 'पीडीए' यानी पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक के हक और सम्मान की बात करते हैं, वहीं दूसरी तरफ उनकी ही पार्टी के जिलाध्यक्ष स्तर के पदाधिकारी एक दलित वर्ग की निर्वाचित महिला जनप्रतिनिधि के खिलाफ ऐसी टिप्पणी कर रहे हैं।

प्रेमावती वर्मा ने कहा कि पार्टी नेतृत्व ने अब तक ऐसे आचरण पर कोई अनुशासनात्मक कार्रवाई नहीं की है, जिससे यह संदेश जाता है कि कथनी और करनी में अंतर है। उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि संबंधित नेता का अपनी ही पार्टी की महिला पदाधिकारियों और पूर्व में अन्य महिला जनप्रतिनिधियों के प्रति भी व्यवहार विवादित रहा है।

कानूनी कार्रवाई की तैयारी और पुलिस प्रशासन से मांग

प्रेमावती वर्मा ने साफ किया है कि वह इस मामले को लेकर चुप नहीं बैठेंगी और पूरे प्रकरण में पुलिस प्रशासन के समक्ष औपचारिक तहरीर देकर भारतीय न्याय संहिता (BNS) और एससी/एसटी एक्ट की सुसंगत धाराओं में मुकदमा दर्ज कराएंगी।

उधर, स्थानीय सामाजिक और राजनीतिक संगठनों ने भी प्रशासन से मांग की है कि वायरल वीडियो और बयान की सत्यता की फोरेंसिक जांच कराकर आरोपी नेता के खिलाफ सख्त विधिक कदम उठाए जाएं, ताकि लोकतांत्रिक पदों पर बैठी महिलाओं की गरिमा को कोई ठेस न पहुंचा सके।

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