लखनऊ में गोमती के बढ़ते जलस्तर से निपटने को राहत अभियान तेज, 90 नावें तैनात और ड्रोन से छिड़काव शुरू

लखनऊ में गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर के बीच नगर निगम ने 90 नावों और 12 अस्थायी आश्रय केंद्रों के साथ राहत अभियान तेज किया। ड्रोन से एंटी लार्वा का छिड़काव जारी।

By INA News Desk
Oct 7, 2026 - 23:27
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लखनऊ में गोमती के बढ़ते जलस्तर से निपटने को राहत अभियान तेज, 90 नावें तैनात और ड्रोन से छिड़काव शुरू
  • गोमती के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित इलाकों में योगी सरकार का राहत अभियान तेज
  • 12 अस्थायी रैन बसेरों में प्रभावित परिवारों के ठहरने की व्यवस्था, 35 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया
  • 90 नावों से रेस्क्यू और राहत सामग्री पहुंचाने का काम जारी, जरूरतमंदों तक पहुंचाई जा रही मदद
  • 150 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एंटी लार्वा और एमएलओ का छिड़काव, 250 सफाईकर्मी संभाल रहे स्वच्छता व्यवस्था
  • पानी उतरते ही चलेगा विशेष सफाई अभियान, कीचड़-कचरे के साथ मच्छरजनित बीमारियों की रोकथाम पर फोकस
  • लखनऊ के नगर आयुक्त ने पूरे दिन प्रभावित क्षेत्रों में रहकर राहत एवं बचाव कार्यों का किया निरीक्षण

लखनऊ। गोमती नदी के बढ़ते जलस्तर से प्रभावित क्षेत्रों में योगी सरकार के निर्देश पर राहत एवं बचाव कार्य लगातार तेज किए जा रहे हैं। बुधवार को नगर आयुक्त गौरव कुमार ने पूरे दिन जलभराव प्रभावित क्षेत्रों में रहकर राहत व्यवस्था का निरीक्षण किया। उन्होंने जोन-6 के सैठा तथा जोन-3 के लोहरामऊ, फैजुल्लागंज, दाउद नगर और मिल्लत नगर समेत विभिन्न इलाकों का निरीक्षण कर अधिकारियों को प्रभावित नागरिकों की सुरक्षा को सर्वोच्च प्राथमिकता देने के निर्देश दिए।

12 अस्थायी रैन बसेरों में प्रभावित परिवारों को आश्रय

नगर आयुक्त ने जलभराव की स्थिति के साथ नावों के संचालन, पेयजल, स्वच्छता, फॉगिंग, एंटी लार्वा छिड़काव और राहत सुविधाओं की समीक्षा की। प्रभावित इलाकों में करीब 20 पानी के टैंकर भेजे गए हैं। साथ ही 10 हजार लीटर पैकेज्ड पेयजल भी उपलब्ध कराया गया है। जलभराव प्रभावित परिवारों के लिए 12 अस्थायी रैन बसेरे तैयार किए गए हैं, इनमें दाउद नगर में 10 तथा लोहरामऊ और मिल्लत नगर में एक-एक अस्थायी रैन बसेरा शामिल है। जबकि जोन-6 में करीब 35 परिवारों को सुरक्षित स्थानों पर पहुंचाया गया है। 26 लोग रैन बसेरे में रह रहे हैं।

इसके अतिरिक्त पल्टन छावनी, उमराव हाता और इंजीनियरिंग कॉलेज के पीछे 100-100 बेड क्षमता वाले स्थायी रैन बसेरे भी उपलब्ध हैं। रैन बसेरों में बेड, फोल्डिंग, पंखे, कूलर, प्रकाश व्यवस्था और मोबाइल के लिए 12 चार्जिंग पॉइंट की सुविधा दी गई है।

प्रभावित इलाकों में 90 नावों से रेस्क्यू अभियान

राहत कार्यों के तहत जिला प्रशासन की 90 नावें प्रभावित क्षेत्रों में संचालित हैं। नगर निगम की टीमें राहत सामग्री की लोडिंग, अनलोडिंग और वितरण में प्रशासन का सहयोग कर रही हैं। दाउद नगर में दो शिफ्टों में 25-25 कर्मचारियों तथा लोहरामऊ और मिल्लत नगर में 25-25 कर्मचारियों को लगाया गया है। जोन-6 के सैठा, दौलत खेड़ा, मुन्नू खेड़ा, टांड खेड़ा, सुखलाल खेड़ा, गुलमी खेड़ा और हयातगंज सहित विभिन्न क्षेत्रों में नावों एवं स्टीमर से लोगों की आवाजाही और राहत सामग्री पहुंचाने का कार्य जारी है। लक्ष्मी हॉस्पिटल के पीछे एक नाव विशेष रूप से राहत सामग्री वितरण के लिए लगाई गई है।

250 सफाईकर्मियों के साथ फॉगिंग अभियान तेज

स्वच्छता और बीमारी से बचाव के लिए यादव चौराहे से मामा कॉलोनी तक करीब 250 सफाईकर्मी लगातार काम कर रहे हैं। प्रभावित इलाकों में ब्लीचिंग पाउडर का छिड़काव कराया जा रहा है। करीब 150 एकड़ क्षेत्र में ड्रोन से एमएलओ और एंटी लार्वा का छिड़काव किया जा चुका है। इसमें जोन-3 और जोन-6 के क्षेत्र शामिल हैं। जलभराव वाले ऐसे स्थानों, जहां सामान्य मशीनों से पहुंचना कठिन है, वहां ड्रोन के माध्यम से दवा का छिड़काव किया जा रहा है। छह मैनुअल और छह बड़ी फॉगिंग मशीनों के अलावा एलएसए की दो बड़ी मशीनों से भी दवा का छिड़काव कराया जा रहा है।

अस्थायी भंडार केंद्र का भी किया निरीक्षण

निरीक्षण के दौरान नगर आयुक्त ने ख्वाजा मोईनुद्दीन चिश्ती युनिवर्सिटी में बनाए गए अस्थायी भंडार केंद्र का भी निरीक्षण किया। उन्होंने वहां उपलब्ध राहत सामग्री एवं अन्य आवश्यक संसाधनों की व्यवस्था देखी तथा सामग्री के व्यवस्थित रख-रखाव और आवश्यकता के अनुसार प्रभावित क्षेत्रों तक समय से पहुंचाने के संबंध में अधिकारियों से जानकारी ली।

पानी उतरते ही शुरू होगा विशेष सफाई अभियान

नगर आयुक्त ने अधिकारियों को निर्देश दिए कि वर्तमान राहत कार्यों के साथ ही जलस्तर कम होने के बाद की स्थिति से निपटने की तैयारी भी पूरी रखी जाए। उन्होंने कहा कि प्रत्येक प्रभावित क्षेत्र के लिए अलग-अलग टीमें निर्धारित की जा रही हैं। पानी उतरते ही इन टीमों द्वारा सड़कों और बस्तियों में जमा कीचड़, कचरे एवं गंदगी की सफाई के साथ ब्लीचिंग पाउडर, एंटी लार्वा और आवश्यक दवाओं का छिड़काव तथा फॉगिंग कराया जाएगा। इसका उद्देश्य जलभराव के बाद संक्रामक एवं मच्छरजनित बीमारियों के संभावित प्रसार को नियंत्रित करना है।

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