Manipur Fresh Violence: मणिपुर में फिर भड़की हिंसा की आग, संदिग्ध उग्रवादियों के हमले में 9 लोगों की मौत, कई घर फूंके
मणिपुर में एक बार फिर भड़की जातीय हिंसा में कम से कम 9 लोगों की जान चली गई है। हथियारबंद उपद्रवियों ने कई घरों को आग के हवाले कर दिया। संवेदनशील इलाकों में सुरक्षा कड़ी की गई है।
इंफाल: पूर्वोत्तर के सीमांत राज्य मणिपुर में शांति स्थापित करने की तमाम प्रशासनिक और सुरक्षा संबंधी कोशिशों के बीच एक बार फिर हिंसा की भीषण लपटें उठ खड़ी हुई हैं। राज्य के संवेदनशील सीमावर्ती इलाके में संदिग्ध हथियारबंद उग्रवादियों और उपद्रवियों के एक समूह ने रिहायशी इलाके पर अचानक धावा बोल दिया, जिसमें कम से कम नौ लोगों की गोली लगने से मौके पर ही मौत हो गई, जबकि कई अन्य गंभीर रूप से घायल हो गए। हमले के दौरान हमलावरों ने अंधाधुंध गोलीबारी करने के साथ-साथ कई घरों और संपत्तियों को आग के हवाले कर दिया, जिससे पूरे इलाके में अफरा-तफरी और दहशत का माहौल फैल गया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार, यह खूनी वारदात घाटी और पहाड़ी जिलों के सीमावर्ती इलाके (Buffer Zone) में स्थित एक गांव में घटी। तड़के हुए इस अप्रत्याशित हमले के बाद राज्य पुलिस, असम राइफल्स और केंद्रीय सुरक्षा बलों के दस्ते तुरंत मौके पर पहुंचे, लेकिन तब तक हमलावर घने जंगलों और पहाड़ी इलाकों की आड़ लेकर फरार होने में कामयाब हो चुके थे। इस ताजा घटना के बाद राजधानी इंफाल सहित आसपास के जिलों में एक बार फिर तनाव चरम पर पहुंच गया है और सुरक्षा एजेंसियों को 'अल्ट्रा-हाई अलर्ट' पर रखा गया है।
कैसे हुआ हमला और क्या हैं जमीनी हालात?
स्थानीय सूत्रों और पुलिस अधिकारियों के अनुसार, हमलावर पूरी तरह स्वचालित आधुनिक हथियारों और विस्फोटकों से लैस होकर आए थे। उन्होंने गांव को तीन तरफ से घेर लिया और जब ग्रामीण अपने घरों में सो रहे थे, तभी अंधाधुंध फायरिंग शुरू कर दी।
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अचानक हमला और आगजनी: गोलीबारी के साथ ही उपद्रवियों ने पेट्रोल बम और ज्वलनशील पदार्थों के जरिए कई कच्चे-पक्के मकानों को आग लगा दी। आग की लपटें देखकर अपनी जान बचाने के लिए घरों से बाहर भागे लोगों पर भी गोलियां चलाई गईं।
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नौ लोगों की मौके पर मौत: शुरुआती जांच और स्थानीय अस्पताल प्रशासन के मुताबिक, हमले में मारे गए सभी 9 लोग गोली और छर्रों के गहरे घाव के शिकार हुए हैं। घायलों को तुरंत नजदीकी सैन्य अस्पताल और इंफाल के रिम्स (RIMS) में भर्ती कराया गया है, जहां कुछ की हालत नाजुक बताई जा रही है।
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सर्च ऑपरेशन जारी: घटना के तुरंत बाद भारतीय सेना और केंद्रीय रिजर्व पुलिस बल (CRPF) के जवानों ने पूरे इलाके की घेराबंदी कर दी है। हमलावरों की तलाश में खोजी कुत्तों और ड्रोन कैमरों की मदद से जंगलों में सघन कॉम्बिंग ऑपरेशन चलाया जा रहा है।
बफर जोन में सुरक्षा की विफलता पर उठे सवाल
मणिपुर में मेइतेई और कुकी समुदायों के बीच मई 2023 से शुरू हुए जातीय तनाव के बाद केंद्र सरकार ने घाटी और पहाड़ी क्षेत्रों के बीच बफर जोन बनाए थे, जहां केंद्रीय सुरक्षा बलों को स्थायी रूप से तैनात किया गया था ताकि दोनों पक्षों के बीच सीधे टकराव को रोका जा सके।
हालांकि, ताजा घटना ने बफर जोन की सुरक्षा व्यवस्था और खुफिया तंत्र की सक्रियता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। स्थानीय नागरिक संगठनों का आरोप है कि संवेदनशील चौकियों के पास भारी हथियारों से लैस उपद्रवियों का इतनी बड़ी संख्या में दाखिल हो जाना सुरक्षा में बड़ी चूक को दर्शाता है। ग्रामीणों का कहना है कि गोलीबारी काफी देर तक चलती रही, जिससे साफ है कि यह पूरी तरह पूर्व-नियोजित और लक्षित हमला था।
प्रशासन का कड़ा रुख: कर्फ्यू और इंटरनेट पर सख्ती
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कर्फ्यू में ढील समाप्त: तनावग्रस्त जिलों और आसपास के सीमावर्ती क्षेत्रों में आवाजाही पर पूर्ण प्रतिबंध लगाते हुए कर्फ्यू को कड़ाई से लागू कर दिया गया है। लोगों से घरों में रहने की अपील की गई है।
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सोशल मीडिया और अफवाहों पर निगरानी: हिंसा की फुटेज या भड़काऊ संदेशों के प्रसार को रोकने के लिए इंटरनेट और ब्रॉडबैंड सेवाओं पर निगरानी बढ़ा दी गई है। साइबर सेल को भड़काऊ पोस्ट डालने वालों के खिलाफ सीधे कानूनी कार्रवाई करने का निर्देश दिया गया है।
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अतिरिक्त सुरक्षा बलों की तैनाती: कानून-व्यवस्था बनाए रखने के लिए संवेदनशील ग्रामीण इलाकों और मुख्य संपर्क मार्गों पर सुरक्षाबलों की अतिरिक्त टुकड़ियां तैनात कर दी गई हैं।
शांति बहाली की प्रक्रिया को गहरा झटका
मणिपुर में लंबे समय से जारी संकट को हल करने के लिए केंद्र सरकार, नागरिक समाज और दोनों समुदायों के प्रबुद्ध वर्गों के बीच वार्ताओं के दौर चल रहे थे। विस्थापित लोगों को राहत शिविरों से उनके मूल गांवों में पुनर्वासित करने की योजना पर भी विचार हो रहा था।
लेकिन नौ लोगों की इस सामूहिक हत्या ने शांति के उन प्रयासों को बड़ा आघात पहुंचाया है। मानवाधिकार संगठनों और राजनीतिक दलों ने इस रक्तपात की कड़े शब्दों में निंदा की है। नागरिक समाज के प्रतिनिधियों का कहना है कि जब तक अवैध हथियारों की पूर्ण बरामदगी और सीमाओं पर सशस्त्र गुटों की गतिविधियों पर निर्णायक रोक नहीं लगाई जाती, तब तक पूर्वोत्तर के इस राज्य में स्थायी शांति और सामान्य जनजीवन की बहाली बेहद चुनौतीपूर्ण बनी रहेगी। फिलहाल सुरक्षा बल स्थिति पर पूरी मुस्तैदी से नजर बनाए हुए हैं।
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