Kathua CISF Firing: जम्मू-कश्मीर के कठुआ में जवान ने बैरक में की अंधाधुंध गोलीबारी, असिस्टेंट कमांडेंट समेत 4 कर्मियों की मौत

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले में सीआईएसएफ के एक जवान ने अपनी सर्विस गन से साथी जवानों पर गोलीबारी की। हमले में एक असिस्टेंट कमांडेंट समेत 4 जवानों की मौत हो गई।

By INA News Desk
Sep 30, 2026 - 16:56
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Kathua CISF Firing: जम्मू-कश्मीर के कठुआ में जवान ने बैरक में की अंधाधुंध गोलीबारी, असिस्टेंट कमांडेंट समेत 4 कर्मियों की मौत
  • कठुआ में सीआईएसएफ कैंप में खूनी संघर्ष: जवान ने सर्विस राइफल से सहयोगियों पर चलाईं गोलियां, 4 की जान गई
  • Jammu Kashmir News: कठुआ के हीरानगर में सुरक्षा बल कैंप में चली गोलियां, सहायक कमांडेंट सहित चार जवानों की मौत से हड़कंप
  • Fratricide in Kathua: सीआईएसएफ जवान ने साथियों पर दागीं गोलियां, असिस्टेंट कमांडेंट सहित 4 हताहत, आरोपी हिरासत में

जम्मू-कश्मीर के कठुआ जिले से एक बेहद दुखद और स्तब्ध करने वाली घटना सामने आई है, जहां केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) के एक जवान ने अपने ही कैंप में साथियों पर अंधाधुंध गोलियां चला दीं। इस अप्रत्याशित गोलीबारी में बल के एक असिस्टेंट कमांडेंट समेत चार कर्मियों की मौत हो गई, जबकि कुछ अन्य जवानों के घायल होने की सूचना है। घटना के तुरंत बाद स्थानीय पुलिस और वरिष्ठ सुरक्षा अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर स्थिति को संभाला तथा हमलावर जवान को हथियार सहित हिरासत में ले लिया है।

प्राथमिक जानकारी के अनुसार, यह घटना जिले के हीरानगर/कठुआ क्षेत्र में स्थित सुरक्षा बल की यूनिट/बैरक परिसर में घटी। रात और सुबह के बदलाव के पहर में जब ड्यूटी रोटेशन और नियमित ब्रीफिंग की प्रक्रिया चल रही थी, उसी दौरान आरोपी जवान और अन्य कर्मियों के बीच किसी बात को लेकर विवाद उत्पन्न हुआ। देखते ही देखते विवाद इतना बढ़ गया कि जवान ने आपा खो दिया और अपनी आधिकारिक सर्विस राइफल से वहां मौजूद सहकर्मियों पर कई राउंड फायर झोंक दिए।

  • अचानक गोलियों की तड़तड़ाहट से दहल उठा परिसर

प्रत्यक्षदर्शियों और कैंप सूत्रों के मुताबिक, गोलीबारी इतनी अचानक हुई कि मौके पर मौजूद अधिकारियों और जवानों को संभलने या छिपने का अवसर तक नहीं मिला। गोलियों की आवाज सुनते ही कैंप में हड़कंप मच गया और सायरन बजाकर स्थिति को नियंत्रण में लेने के प्रयास शुरू किए गए।

गोलीबारी के शिकार हुए कर्मियों को लहूलुहान हालत में तत्काल नजदीकी उप-जिला अस्पताल ले जाया गया। डॉक्टरों ने गंभीर रूप से घायल असिस्टेंट कमांडेंट और तीन अन्य जवानों को परीक्षण के बाद मृत घोषित कर दिया। वहीं, गोली लगने से घायल अन्य कर्मियों का प्राथमिक उपचार कर उन्हें विशेष चिकित्सा सुविधा के लिए रेफर किया गया है।

  • विवाद की वजह और संभावित कारण

सुरक्षा बलों में आपसी गोलीबारी (Fratricide) की घटनाओं के पीछे अक्सर मानसिक तनाव, लंबी ड्यूटी, पारिवारिक समस्याएं, छुट्टी न मिलना या कार्यस्थल पर वरिष्ठों के साथ तालमेल का अभाव मुख्य कारण बनकर उभरते हैं।

कठुआ मामले में भी शुरुआती तौर पर यह संदेह जताया जा रहा है कि ड्यूटी रोस्टर, छुट्टी के आवेदन या किसी प्रशासनिक निर्देश को लेकर जवान और वरिष्ठ अधिकारियों के बीच हाल ही में तनातनी हुई थी। हालांकि, पुलिस और सीआईएसएफ प्रशासन का कहना है कि गोलीबारी के वास्तविक और सटीक कारणों का खुलासा विस्तृत पूछताछ और आंतरिक जांच पूरी होने के बाद ही संभव हो सकेगा।

  • पुलिस की कानूनी कार्रवाई और कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी के आदेश

घटना की सूचना मिलते ही कठुआ जिला पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी फोरेंसिक टीम के साथ घटनास्थल पर पहुंचे। इलाके को सील कर मौके से खाली कारतूस और प्रयुक्त हथियार को साक्ष्य के तौर पर जब्त कर लिया गया है। पुलिस ने आरोपी जवान के खिलाफ हत्या, जानलेवा हमले और आर्म्स एक्ट की सुसंगत धाराओं के तहत प्राथमिकी (FIR) दर्ज कर औपचारिक जांच शुरू कर दी है।

उधर, केंद्रीय औद्योगिक सुरक्षा बल (CISF) मुख्यालय ने घटना का कड़ा संज्ञान लेते हुए मामले में उच्चस्तरीय 'कोर्ट ऑफ इन्क्वायरी' (Court of Inquiry) गठित करने का आदेश दिया है। जांच दल यह सुनिश्चित करेगा कि किन परिस्थितियों में जवान ने यह घातक कदम उठाया, क्या पहले से उसकी मानसिक स्थिति या आचरण को लेकर कोई चेतावनी संकेत मौजूद थे, और ड्यूटी पर हथियार प्रबंधन से जुड़ी प्रक्रियाओं का उल्लंघन किस स्तर पर हुआ।

जम्मू-कश्मीर जैसे संवेदनशील क्षेत्रों में अग्रिम मोर्चों और महत्वपूर्ण प्रतिष्ठानों की सुरक्षा में तैनात जवानों पर अक्सर अत्यधिक सतर्कता और तनाव का दबाव रहता है। इस घटना ने एक बार फिर अर्द्धसैनिक बलों में जवानों के मानसिक स्वास्थ्य, काउंसलिंग व्यवस्था और शिकायत निवारण तंत्र की प्रभावशीलता पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं।

रक्षा एवं सुरक्षा विशेषज्ञों का मानना है कि जवानों के तनाव स्तर की नियमित निगरानी और आंतरिक संवाद को अधिक मानवीय व सुलभ बनाकर ही इस तरह की त्रासदियों की पुनरावृत्ति को रोका जा सकता है।

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