पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय पीतमपुरा में NCSC-32 क्षेत्रीय विज्ञान प्रदर्शनी का भव्य आयोजन, बाल वैज्ञानिकों ने दिखाए नवाचार
पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय पीतमपुरा में NCSC-32 क्षेत्रीय विज्ञान प्रदर्शनी का आयोजन। दिल्ली के बाल वैज्ञानिकों ने प्रस्तुत किए नए मॉडल और वैज्ञानिक विचार।
राजधानी के पीएम श्री केंद्रीय विद्यालय पीतमपुरा में राष्ट्रीय बाल विज्ञान कांग्रेस (एनसीएससी-32) की क्षेत्रीय विज्ञान प्रदर्शनी का शानदार आयोजन किया गया। इस शैक्षणिक आयोजन में दिल्ली संभाग के विभिन्न केंद्रीय विद्यालयों से पहुंचे प्रतिभावान बाल वैज्ञानिकों ने हिस्सा लिया। छात्रों ने दैनिक जीवन से जुड़े विषयों, पर्यावरण संरक्षण और आधुनिक तकनीक पर आधारित अपने मौलिक वैज्ञानिक मॉडल और अनुसंधान परियोजनाएं प्रस्तुत कर अपनी बौद्धिक क्षमता का परिचय दिया।

समारोह के मुख्य अतिथि केंद्रीय विद्यालय संगठन के सहायक आयुक्त राजकुमार पाणिग्रही रहे। विद्यालय के प्राचार्य पवन कुमार और उप-प्राचार्य सुबे सिंह ने मुख्य अतिथि के साथ विभिन्न संस्थानों से आए निर्णायक मंडल के विज्ञान विशेषज्ञों का स्वागत किया। उप-प्राचार्य सुबे सिंह ने आयोजन के मुख्य लक्ष्यों को साझा करते हुए स्पष्ट किया कि इस प्रकार के मंच विद्यार्थियों के भीतर छिपी वैज्ञानिक सोच और शोधपरक दृष्टि को निखारने में आधारशिला का काम करते हैं।

कार्यक्रम का शुभारंभ पारंपरिक रूप से दीप प्रज्ज्वलन और मंत्रोच्चार के साथ किया गया। इसके बाद विद्यार्थियों ने सुमधुर स्वागत गान पेश किया और विज्ञान के प्रति रुचि जगाने वाली एक सुंदर कविता का पाठ किया। भारतीय कला और परंपरा का परिचय देते हुए छात्र-छात्राओं ने मनमोहक कथक नृत्य प्रस्तुत किया। वहीं विद्यालय की बालिका ब्रास बैंड टीम ने अपने अनुशासित और जोशीले प्रदर्शन से समां बांध दिया। ध्वजारोहण के समय बैंड दल द्वारा दी गई औपचारिक सलामी ने पूरे परिसर को ऊर्जा से भर दिया।
मुख्य अतिथि राजकुमार पाणिग्रही ने बाल वैज्ञानिकों का मार्गदर्शन करते हुए कहा कि विज्ञान केवल प्रयोगशाला की चहारदीवारी तक सीमित नहीं है, बल्कि यह हमारे रोजमर्रा के जीवन की जटिल समस्याओं को सुलझाने का एक प्रभावी जरिया है। उन्होंने छात्र-छात्राओं को सदा जिज्ञासु रहने, सवाल करने, नए प्रयोग आजमाने और मौलिक सोच अपनाने की सलाह दी। उन्होंने कहा कि ऐसे अवसर विद्यार्थियों में शोधपरक दृष्टिकोण, रचनात्मकता और समाधान खोजने की क्षमता को मजबूत करते हैं।

इसके उपरांत प्रदर्शनी के मुख्य चरण में विद्यार्थियों ने निर्णायक मंडल के समक्ष अपने-अपने नवाचारों और मॉडलों की कार्यप्रणाली का प्रदर्शन किया। बाल वैज्ञानिकों ने पूरे आत्मविश्वास के साथ समझाया कि उनके बनाए प्रोजेक्ट समाज और पर्यावरण के लिए किस तरह उपयोगी साबित हो सकते हैं। निर्णायक मंडल ने बच्चों के वैज्ञानिक प्रयासों, प्रस्तुति शैली और तार्किक सोच की सराहना की। यह आयोजन विज्ञान, रचनात्मकता और युवा सोच के बेहतर संगम के रूप में सामने आया।
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