Pranavi Urs Asian Games Gold: कलाई टूटने के बाद भी नहीं डिगा हौसला, जमशेदपुर के गोल्फ कोर्स से निकलकर प्रणवी उर्स ने रचा इतिहास
Pranavi Urs Asian Games Gold: कलाई में गंभीर फ्रैक्चर के बावजूद हार न मानने वाली गोल्फर प्रणवी उर्स ने एशियाई खेलों में स्वर्ण पदक जीतकर इतिहास रच दिया है। जानिए उनका जमशेदपुर कनेक्शन।
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- Jamshedpur to Asian Games Gold: जब फ्रैक्चर भी नहीं रोक सका कदम, गोल्फर प्रणवी उर्स की इस संघर्षभरी दास्तां ने जीता दिल
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खेल की दुनिया में अक्सर प्रतिभा से ज्यादा खिलाड़ी का अदम्य साहस और जुझारूपन उसकी पहचान बनाता है। एशियाई खेलों के गोल्फ मुकाबले में भारत के लिए ऐतिहासिक व्यक्तिगत स्वर्ण पदक जीतने वाली युवा गोल्फर प्रणवी उर्स की यह स्वर्णिम यात्रा केवल शानदार स्विंग और बर्डियों का नतीजा नहीं है, बल्कि यह गंभीर शारीरिक आघात, असहनीय दर्द और अविश्वसनीय मानसिक संकल्प की अनूठी दास्तां है।
एक समय ऐसा भी था जब कलाई में हुए गंभीर फ्रैक्चर के बाद उनके करियर पर प्रश्नचिह्न लग गया था। गोल्फ जैसे खेल में, जहां कलाई का लचीलापन और मजबूती ही हर शॉट की दिशा व शक्ति तय करती है, वहां कलाई का टूटना किसी भी खिलाड़ी के लिए करियर का सबसे डरावना सपना होता है। लेकिन प्रणवी ने न केवल इस आघात को मात दी, बल्कि झारखंड के औद्योगिक शहर जमशेदपुर के ऐतिहासिक गोल्फ कोर्स पर पसीना बहाकर अपनी तकनीक को इस स्तर पर निखारा कि आज वे एशिया की नई गोल्फ चैंपियन बनकर उभरी हैं।
- करियर को संकट में डालने वाली चोट और अटूट धैर्य
प्रणवी उर्स जब जूनियर स्तर से पेशेवर सर्किट में कदम रख रही थीं और अपनी पहचान स्थापित करने की ओर अग्रसर थीं, तभी एक दुर्भाग्यपूर्ण हादसे में उनकी कलाई में गंभीर फ्रैक्चर आ गया। डॉक्टरों ने उन्हें लंबे समय तक गोल्फ क्लब से दूर रहने की सख्त हिदायत दी थी। खेल विशेषज्ञों का मानना था कि सर्जरी और प्लास्टर के बाद कलाई में वह स्वाभाविक गति और ताकत वापस पाना बेहद कठिन होगा, जिसकी अंतरराष्ट्रीय स्तर पर आवश्यकता होती है।
महीनों तक चले रिहैबिलिटेशन, दर्दनाक फिजियोथेरेपी सत्रों और निराशा के दौर में भी प्रणवी ने अपना मनोबल टूटने नहीं दिया। जब वे अभ्यास नहीं कर सकती थीं, तब वे गोल्फ के मानसिक पहलुओं, विजुअलाइजेशन और रणनीति पर काम करती रहीं। जैसे ही मेडिकल टीम ने उन्हें सीमित अभ्यास की अनुमति दी, उन्होंने नए सिरे से बेसिक ग्रिप और स्विंग पर काम शुरू कर दिया।
- जमशेदपुर का गोल्फ कोर्स: जहां तराशी गई तकनीक
चोट से उबरने के बाद प्रणवी के करियर का एक अत्यंत महत्वपूर्ण पड़ाव जमशेदपुर रहा। इस्पात नगरी जमशेदपुर का प्रतिष्ठित बेल्डीह और गोलमुरी गोल्फ क्लब देश के उन चुनिंदा गोल्फ कोर्स में शुमार हैं जहां संकरे फेयरवे, घने पेड़ और चुनौतीपूर्ण ग्रीन्स खिलाड़ियों की तकनीकी क्षमता की कड़ी परीक्षा लेते हैं।
जमशेदपुर में आयोजित होने वाले राष्ट्रीय स्तर के पेशेवर टूर्नामेंटों और अभ्यास सत्रों के दौरान प्रणवी ने अपने खेल की खामियों को दूर किया। जमशेदपुर की चुनौतीपूर्ण हवाओं और कठिन कोर्स लेआउट ने उन्हें दबाव की परिस्थितियों में सटीक बॉल-स्ट्राइकिंग का महारथी बनाया। स्थानीय गोल्फ बिरादरी और कोचों का कहना है कि जमशेदपुर में अभ्यास के दौरान प्रणवी की लगन देखने लायक थी; वे घंटों तक पुटिंग ग्रीन पर अभ्यास करती थीं ताकि कलाई पर अनावश्यक तनाव डाले बिना गेंद को सही दिशा में भेजा जा सके।
- एशियाई खेलों के निर्णायक दौर में दिखा वही संयम
एशियाई खेलों के अंतिम राउंड में जब दक्षिण कोरिया और थाईलैंड जैसी एशियाई महाशक्तियों की गोल्फर्स से कड़ा मुकाबला चल रहा था, तब प्रणवी के इसी जुझारू मिजाज ने उन्हें पोडियम के शीर्ष पर पहुंचाया। प्रतियोगिता के अंतिम होल्स पर जब एक-एक स्ट्रोक पर पदक का रंग तय हो रहा था, तब प्रणवी ने अपनी भावनाओं पर पूरी तरह नियंत्रण रखा।
अंतिम होल पर विजयी पुट डालते ही उनके चेहरे पर आए भाव यह बयां कर रहे थे कि यह जीत सिर्फ एक पदक नहीं, बल्कि अस्पताल के उन बिस्तरों, दर्दभरे इंजेक्शनों और कलाई के फ्रैक्चर को दी गई ऐतिहासिक मात थी। 2002 के बाद पहली बार भारत की झोली में गोल्फ का व्यक्तिगत गोल्ड डालकर उन्होंने यह साबित कर दिया कि हौसले के आगे कोई भी शारीरिक चोट बड़ी नहीं हो सकती।
- युवा पीढ़ी और एथलीटों के लिए बनीं प्रेरणा
प्रणवी उर्स की यह सफलता भारतीय खेल जगत में चोटों से जूझ रहे सैकड़ों उदीयमान एथलीटों के लिए एक प्रकाश स्तंभ की तरह है। खेल में इंजरी कई बार खिलाड़ियों का आत्मविश्वास छीन लेती है, लेकिन प्रणवी की वापसी सिखाती है कि यदि सही मार्गदर्शन, अनुशासित रिहैबिलिटेशन और अटूट इच्छाशक्ति हो, तो टूटी हुई कलाई भी देश के लिए स्वर्ण पदक जीत सकती है।
मैसूर से लेकर जमशेदपुर के फेयरवे और वहां से एशियाई खेलों के शीर्ष पोडियम तक का उनका यह सफर भारतीय खेल इतिहास के सबसे प्रेरणादायी पन्नों में हमेशा दर्ज रहेगा।
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