Prayagraj : राष्ट्रीय शिल्प मेले का भव्य समापन, शिल्पकारों ने अच्छी बिक्री और सराहना के साथ विदाई ली
प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों से आए दर्शकों ने मेले का पूरा आनंद लिया। कला प्रेमियों और शिल्पकारों के लिए यह मेला विशेष रहा। पारंपरिक शैली में सजे स्टॉलों
प्रयागराज: उत्तर मध्य क्षेत्र सांस्कृतिक केंद्र द्वारा आयोजित दस दिवसीय राष्ट्रीय शिल्प मेले का केंद्र परिसर में भव्य समापन हुआ। विभिन्न राज्यों से आए कलाकारों और शिल्पकारों ने अपनी अनोखी प्रतिभा और सांस्कृतिक विरासत का प्रदर्शन किया। मेले में कई राज्यों के शिल्पकारों ने स्टॉल लगाए, जहां पारंपरिक कलाओं और विविध उत्पादों की झलक दिखी।
विदा होते समय शिल्पकारों के चेहरे संतोष और खुशी से खिले हुए थे। अलग-अलग प्रदेशों से अपनी कला लेकर आए शिल्पकारों ने बताया कि प्रयागराज के लोगों ने उनका उत्साह बढ़ाया। उनकी कृतियों की अच्छी बिक्री हुई और खूब सराहना भी मिली।
प्रयागराज और आसपास के क्षेत्रों से आए दर्शकों ने मेले का पूरा आनंद लिया। कला प्रेमियों और शिल्पकारों के लिए यह मेला विशेष रहा। पारंपरिक शैली में सजे स्टॉलों पर चंदेरी, सिल्क और सूती वस्त्र, राजस्थान के आभूषण, कश्मीर के ड्राय फ्रूट्स सहित कई आकर्षक उत्पाद उपलब्ध रहे। सांस्कृतिक संध्या ने लघु भारत की झलक दिखाकर मेले की रौनक बढ़ा दी।
सांस्कृतिक संध्या का शुभारंभ मुख्य अतिथि आचार्य महामंडलेश्वर कौशल्या नंद गिरि और केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा, कार्यक्रम सलाहकार कल्पना सहाय तथा विशिष्ट अतिथियों विनोद शुक्ला, शील द्विवेदी, कमलेश श्रीवास्तव, बसंत लाल और प्रदीप जौहरी द्वारा दीप प्रज्वलन से हुआ। केंद्र निदेशक सुदेश शर्मा ने मुख्य और विशिष्ट अतिथियों को अंगवस्त्र, स्मृति चिन्ह और पौधा भेंट कर सम्मानित किया।
सांस्कृतिक संध्या की शुरुआत वरुण मिश्रा की ठुमरी प्रस्तुति से हुई। उन्होंने ‘तोरी मोरी…’, ‘चलो मन गंगा यमुना तीर’, ‘बाजे रे मुरलिया’, ‘नजरिया लग जाएगी’ और ‘आया करें जरा कह दो सांवरिया से’ जैसी रचनाओं से दर्शकों की तालियां बटोरीं। सूफी गायिका अंशिका रजोतिया ने ‘पिया रे पिया रे’, ‘हल्का-हल्का सुरूर’, ‘ये तूने क्या किया’, ‘तुम्हें दिल्लगी भूल जानी पड़ेगी’ और ‘छाप तिलक’ जैसे गीतों से सूफियाना माहौल बनाया। दिल्ली से आई कविता द्विवेदी और उनके दल ने गंगा स्तुति पर ओडिशी नृत्य पेश किया।
प्रयागराज की पूर्णिमा कुमार और दल ने पारंपरिक गीत पर ढेड़िया नृत्य, पूर्वी और झूमर नृत्य की प्रस्तुति दी। इसके बाद शुभम कुमार और दल ने महिषासुर मर्दिनी पर नृत्य-नाटिका पेश की। इस अवसर पर बड़ी संख्या में लोग मौजूद रहे और सभी ने मेले तथा सांस्कृतिक प्रस्तुतियों का पूरा लुत्फ उठाया।
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