रबी फसलों की एमएसपी में बढ़ोतरी: गेहूं, सरसों और चना की नई दरें तय, किसानों को मिलेगा बंपर मुनाफा
रबी सत्र के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य में बड़ी वृद्धि। गेहूं, सरसों, मसूर और कुसुम की नई दरों से अन्नदाताओं को मिलेगा लागत पर 106 फीसदी तक सीधा मुनाफा।
केंद्र सरकार ने रबी विपणन सत्र के लिए सभी प्रमुख रबी फसलों के न्यूनतम समर्थन मूल्य (एमएसपी) में महत्वपूर्ण वृद्धि की है। इस फैसले का स्वागत करते हुए उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री सूर्य प्रताप शाही ने प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और केंद्रीय मंत्रिमंडल के प्रति आभार व्यक्त किया है। उन्होंने इस निर्णय को ग्रामीण अर्थव्यवस्था को गति देने, किसानों की आमदनी बढ़ाने और उन्हें पसीने का उचित मूल्य दिलाने वाला ऐतिहासिक कदम बताया है।
घोषित दरों के तहत उत्पादन की अखिल भारतीय भारित औसत लागत पर कम से कम 50 प्रतिशत लाभ सुनिश्चित करने के संकल्प को पूरा किया गया है। नए समर्थन मूल्य के अनुसार कुसुम की दर में सबसे अधिक 675 रुपये प्रति कुंतल की बढ़ोतरी की गई है, जिससे इसका नया मूल्य 7,215 रुपये प्रति कुंतल पहुंच गया है। इसके अलावा तोरिया और सरसों में 413 रुपये की वृद्धि के साथ भाव 6,613 रुपये, मसूर में 390 रुपये की बढ़ोतरी के साथ 7,390 रुपये, जौ में 136 रुपये की बढ़त के साथ 2,286 रुपये तथा चना में 83 रुपये की वृद्धि कर 5,958 रुपये प्रति कुंतल मूल्य तय किया गया है। वहीं गेहूं के समर्थन मूल्य में 25 रुपये की वृद्धि कर 2,610 रुपये प्रति कुंतल निर्धारित किया गया है।
लागत और मुनाफे के आधार पर देखा जाए तो किसानों को गेहूं की उत्पादन लागत पर सर्वाधिक 106 प्रतिशत का सीधा लाभ मिलेगा। इसके अलावा तोरिया व सरसों पर 96 प्रतिशत, मसूर पर 92 प्रतिशत, चना पर 59 प्रतिशत, जौ पर 58 प्रतिशत और कुसुम पर 50 प्रतिशत तक का मार्जिन सुनिश्चित रहेगा। दलहन और तिलहन फसलों के समर्थन मूल्य में हुई इस बढ़ोतरी से प्रदेश के किसानों को फसल विविधीकरण अपनाने की नई प्रेरणा मिलेगी, जिससे पारंपरिक फसलों के साथ-साथ दालों और तिलहन का रकबा भी तेजी से बढ़ेगा।
सरकारी खरीद और भुगतान तंत्र में भी पहले के मुकाबले व्यापक सुधार देखने को मिला है। पिछले एक दशक में देशभर में गेहूं की खरीद बढ़कर 3,715 लाख मीट्रिक टन तक पहुंची है, जबकि छह प्रमुख रबी फसलों की कुल खरीद 3,921 लाख मीट्रिक टन के आंकड़े को छू चुकी है। इसके साथ ही गेहूं उत्पादकों को 7.31 लाख करोड़ रुपये और सभी प्रमुख रबी फसलों के उत्पादकों को कुल 8.36 लाख करोड़ रुपये का सीधा भुगतान उनके बैंक खातों में पारदर्शी तरीके से किया गया है। किसान-कल्याणकारी नीतियों से प्रदेश के अन्नदाताओं की आर्थिक स्थिति लगातार मजबूत हो रही है।
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