सम्भल में दुकानें हटाने पर भारी बवाल, आमने-सामने आए दो पक्ष, 16 लाख की लूट का आरोप
सम्भल के सरायतरीन में नगर पालिका की कार्रवाई के बाद दो पक्षों में विवाद हो गया। एक पक्ष ने कोर्ट का आदेश बताया तो दूसरे ने तोड़फोड़ और लूट का आरोप लगाया।
सम्भल जनपद के सरायतरीन क्षेत्र में रास्ते और जमीन के मालिकाना हक को लेकर वर्षों से चला आ रहा विवाद अचानक उग्र रूप ले बैठा। नगर पालिका प्रशासन और पुलिस बल की उपस्थिति में बाजार से फड़ और अस्थायी खोखे हटाने की कार्रवाई शुरू होते ही दोनों पक्ष आमने-सामने आ गए। मौके पर तीखी नोकझोंक और हंगामे की स्थिति पैदा हो गई। जहां एक पक्ष ने इस कार्रवाई को अदालत के आदेश के पालन के तहत अपनी पैतृक जमीन खाली कराना बताया, वहीं दूसरे पक्ष ने नगर पालिका कर्मचारियों और कुछ लोगों पर तोड़फोड़, कोर्ट के स्थगनादेश की अनदेखी और लाखों रुपये का सामान लूट ले जाने के संगीन आरोप लगाए।

स्थिति की संवेदनशीलता को देखते हुए क्षेत्राधिकारी (सीओ) कुलदीप सिंह भारी पुलिस बल के साथ मौके पर पहुंचे और दोनों पक्षों को समझा-बुझाकर शांत कराने का प्रयास किया। विवाद में शामिल शोभित पक्ष का कहना है कि उनकी रिहायशी संपत्ति पिछले चार दशकों से वहां मौजूद है और उनके पास जमीन का पंजीकृत बैनामा व स्थानीय दीवानी अदालत की वैधानिक डिक्री उपलब्ध है। उनका दावा है कि सड़क तक की जमीन उनके बैनामे के दायरे में आती है। उन्होंने बताया कि सक्षम स्तर से मिले आदेश के बाद दुकानदारों ने स्वेच्छा से अपने फड़ पीछे हटाए थे और किसी प्रकार का कोई दबाव नहीं बनाया गया था।
दूसरी ओर दूसरे पक्ष से जुड़े सईद उद्दीन ने पूरी कार्रवाई को गैरकानूनी करार देते हुए नगर पालिका अमले और कुछ स्थानीय लोगों पर गंभीर आरोप मढ़े हैं। उनका कहना है कि कपड़े के खोखों से रेडीमेड वस्त्र और अन्य कीमती सामान सहित करीब दस से सोलह लाख रुपये की सामग्री गायब कर दी गई और फल-सब्जियों को सड़क पर फेंक दिया गया। उन्होंने दावा किया कि यह उनकी निजी संपत्ति है, जिस पर उच्च न्यायालय और निचली अदालतों का स्थगनादेश (स्टे ऑर्डर) प्रभावी है। उन्होंने प्रशासन पर अदालत के आदेश की अवमानना का आरोप लगाते हुए पूर्व स्थिति बहाल करने की मांग उठाई है।

मामले की जानकारी देते हुए क्षेत्राधिकारी कुलदीप सिंह ने स्पष्ट किया कि कुछ स्थानीय निवासियों ने अपने घरों तक आने-जाने का रास्ता अवरुद्ध होने की लिखित शिकायत दी थी। इसी के आधार पर नगर पालिका की टीम ने स्थलीय चिह्नांकन किया था, जिसके बाद कुछ दुकानदारों ने खुद ही अपने प्रतिष्ठान हटाए। शांति व्यवस्था बनाए रखने के लिए मौके पर अतिरिक्त पुलिस बल तैनात कर दिया गया है। प्रशासनिक स्तर पर दोनों पक्षों को अपने-अपने स्वामित्व और अदालत से जुड़े वैधानिक दस्तावेज लेकर नगर मजिस्ट्रेट (सिटी मजिस्ट्रेट) के समक्ष उपस्थित होने के निर्देश दिए गए हैं, ताकि कागजी परीक्षण के बाद स्थिति स्पष्ट की जा सके।
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