Shiva Sharma Murder Case: मुख्य आरोपी श्रद्धा दुबे कर सकती है लखनऊ कोर्ट में सरेंडर, NBW जारी होने के बाद कानूनी हलचल तेज
शिवा शर्मा हत्याकांड की मुख्य आरोपी और लिव-इन पार्टनर श्रद्धा दुबे के लखनऊ कोर्ट में आत्मसमर्पण करने की संभावना है। गैर-जमानती वारंट जारी होने के बाद अदालत में सरेंडर अर्जी दाखिल की गई है।
राजधानी लखनऊ में चर्चित शिवा शर्मा हत्याकांड की जांच में एक नया कानूनी मोड़ सामने आया है। मामले की मुख्य नामजद आरोपी और मृतक की लिव-इन पार्टनर श्रद्धा दुबे के स्थानीय अदालत में आत्मसमर्पण (सरेंडर) करने की संभावना जताई जा रही है। प्राप्त कानूनी जानकारियों के अनुसार, पुलिस की लगातार दबिश और अदालत से गैर-जमानती वारंट (NBW) जारी होने के बाद आरोपी पक्ष की ओर से दो दिन पूर्व न्यायालय में सरेंडर से संबंधित अर्जी दाखिल की जा चुकी है।
अदालत में अर्जी दाखिल होने की सूचना के बाद पुलिस और अभियोजन पक्ष सतर्क हो गए हैं। पुलिस की टीमें जहां कोर्ट परिसर और संभावित रास्तों पर नजर बनाए हुए हैं, वहीं कानूनी प्रक्रिया के तहत अदालत में इस अर्जी पर पुलिस से आख्या मांगी जा सकती है।
गैर-जमानती वारंट के बाद बढ़ी कानूनी घेराबंदी
शिवा शर्मा हत्याकांड में दर्ज प्राथमिकी के आधार पर पुलिस आरोपी श्रद्धा दुबे की तलाश में कई संभावित ठिकानों पर दबिश दे रही थी। जांच अधिकारियों द्वारा प्रस्तुत तथ्यों के आधार पर सक्षम अदालत ने आरोपी के खिलाफ गैर-जमानती वारंट जारी किया था।
कानूनी जानकारों के अनुसार, जब किसी मामले में एनबीडब्ल्यू जारी हो जाता है और गिरफ्तारी की संभावना बढ़ जाती है, तो आरोपी पक्ष अक्सर न्यायिक हिरासत में जाने के लिए अदालत के समक्ष आत्मसमर्पण की औपचारिक प्रक्रिया चुनता है। श्रद्धा दुबे के अधिवक्ताओं द्वारा दाखिल की गई अर्जी इसी कानूनी रणनीति का हिस्सा मानी जा रही है।
अदालत में सरेंडर की क्या होती है प्रक्रिया
फौजदारी प्रक्रिया के तहत जब कोई वांछित व्यक्ति अदालत में सरेंडर की अर्जी दाखिल करता है, तो अदालत संबंधित थाने से मामले की वर्तमान स्थिति, केस डायरी और वारंट की स्थिति को लेकर रिपोर्ट तलब करती है। पुलिस रिपोर्ट आने के बाद अदालत यह तय करती है कि आरोपी को न्यायिक हिरासत में भेजा जाए अथवा संबंधित एजेंसी को हिरासत में लेकर पूछताछ की अनुमति दी जाए। फिलहाल अदालत में अर्जी पर सुनवाई और पुलिस की आधिकारिक आख्या का इंतजार किया जा रहा है। यदि आत्मसमर्पण स्वीकार होता है, तो पुलिस आगे की पूछताछ के लिए कस्टडी रिमांड की मांग भी कर सकती है।
जांच से जुड़े सूत्रों के अनुसार, पुलिस का मुख्य फोकस आरोपी को न्यायिक प्रक्रिया में शामिल कर घटना से जुड़े अनसुलझे साक्ष्यों, हत्या के कारणों और प्रयुक्त सामान की बरामदगी पर रहेगा। पुलिस कमिश्नरेट की टीमें कोर्ट परिसर के आसपास भी निगरानी रख रही हैं ताकि प्रक्रिया नियमानुसार पूरी हो सके। मामले में अदालत के आगामी आदेश और पुलिस की रिपोर्ट के बाद ही स्थिति पूरी तरह स्पष्ट होगी कि आरोपी को किस दिन और किस प्रक्रिया के तहत न्यायिक अभिरक्षा में लिया जाता है।
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