Sitapur News: परसेंडी बीडीओ पर 20 प्रतिशत कमीशनखोरी का आरोप, ब्लॉक प्रमुख ने डीएम से की शिकायत

सीतापुर के परसेंडी ब्लॉक प्रमुख ने बीडीओ रजनीश शुक्ला पर 20% कमीशन मांगने और अधूरे कार्यों के भुगतान के गंभीर आरोप लगाकर डीएम से संयुक्त जांच व तबादले की मांग की है।

By INA News Desk
Sep 21, 2026 - 21:21
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Sitapur News: परसेंडी बीडीओ पर 20 प्रतिशत कमीशनखोरी का आरोप, ब्लॉक प्रमुख ने डीएम से की शिकायत
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Report : संदीप चौरसिया INA NEWS सीतापुर

सीतापुर। उत्तर प्रदेश के सीतापुर जिले के विकासखंड परसेंडी में प्रशासनिक व्यवस्था और निर्वाचित जनप्रतिनिधियों के बीच का टकराव खुलकर सामने आ गया है। ब्लॉक प्रमुख राजेंद्र प्रसाद राजवंशी ने खंड विकास अधिकारी (बीडीओ) रजनीश शुक्ला के विरुद्ध मोर्चा खोलते हुए उन पर 20 प्रतिशत तक कथित कमीशन वसूली, चहेते ठेकेदारों को अनुचित लाभ पहुंचाने तथा धरातल पर काम हुए बिना या अधूरा काम छोड़कर सरकारी धन का भुगतान कराने के गंभीर आरोप लगाए हैं। ब्लॉक प्रमुख ने इस संबंध में जिलाधिकारी डॉ. राजा गणपति आर. को औपचारिक शिकायती पत्र सौंपकर मामले की निष्पक्ष जांच और बीडीओ के तत्काल प्रशासनिक स्थानांतरण की मांग की है।

शिकायती पत्र के अनुसार, ग्राम पंचायतों में विकास कार्यों की प्रशासनिक एवं वित्तीय स्वीकृतियों को लेकर लंबा गतिरोध बना हुआ है। ब्लॉक प्रमुख का दावा है कि क्षेत्र के कई ग्राम प्रधानों ने 17 सितंबर को एक संयुक्त हस्ताक्षरयुक्त प्रार्थना पत्र देकर बीडीओ की कार्यशैली, मनमाने रवैये और कथित कमीशनखोरी के विरुद्ध शिकायत दर्ज कराई थी। आरोप है कि शासन की सर्वोच्च प्राथमिकताओं में शामिल आंगनबाड़ी केंद्रों, अन्नपूर्णा भवनों, खेल मैदानों और प्राथमिक विद्यालयों में मध्यान्ह भोजन (एमडीएम) योजना के शेड निर्माण जैसे जनहितैषी कार्यों की अनदेखी की जा रही है, जबकि उन परियोजनाओं को प्राथमिकता दी जा रही है जिनमें कमीशन का दायरा तय होता है।

शंकरपुर, दसेलिया और चांदपुर के कार्यों पर उठाए सवाल

ब्लॉक प्रमुख द्वारा जिलाधिकारी को दिए गए प्रार्थना पत्र में विकासखंड के अंतर्गत हुए कई निर्माण कार्यों का बिंदुवार ब्योरा प्रस्तुत करते हुए वित्तीय अनियमितता का दावा किया गया है:

  1. शंकरपुर नाला निर्माण: ग्राम पंचायत शंकरपुर में स्कूल से लेकर तालाब तक नाला निर्माण के लिए 22.06 लाख रुपये की धनराशि स्वीकृत हुई थी। आरोप है कि मौके पर कार्य अधूरा और तकनीकी मानकों के विपरीत होने के बावजूद 19,64,385 रुपये का भुगतान कर दिया गया।

  2. दसेलिया में नाला निर्माण: दसेलिया में झाला से नाला तक लगभग 6.70 लाख रुपये की लागत से बनने वाले नाले को अधूरा छोड़ दिया गया, लेकिन कागजों में प्रगति दिखाकर भुगतान की प्रक्रिया पूरी कर ली गई।

  3. चांदपुर में पशुबाड़ा निर्माण: चांदपुर में बीना के पशुबाड़ा निर्माण के लिए 1.74 लाख रुपये की स्वीकृत धनराशि के सापेक्ष 1,25,115 रुपये का भुगतान निकाल लिया गया, जबकि शिकायतकर्ता का दावा है कि धरातल पर निर्माण कार्य हुआ ही नहीं है।

  4. उदयमलपुर इंटरलॉकिंग: उदयमलपुर में सोनू यादव के मकान से रामखेलावन के मकान तक लगभग 7.60 लाख रुपये के इंटरलॉकिंग कार्य में भी अनियमितताओं के आरोप लगाए गए हैं।

ब्लॉक प्रमुख का आरोप है कि किसी भी कार्य के एस्टीमेट (प्राक्कलन) की स्वीकृति के नाम पर पांच प्रतिशत और अंतिम भुगतान के समय पंद्रह प्रतिशत तक की कथित कमीशन की मांग की जाती है। इसके चलते कई ग्राम पंचायतों में वास्तविक श्रमिकों की मजदूरी और निर्माण सामग्री के वैध देयकों का भुगतान महीनों से अटका हुआ है।

बीडीओ ने आरोपों को नकारा, बताया दबाव बनाने का हथकंडा

दूसरी ओर, खंड विकास अधिकारी रजनीश शुक्ला ने पूर्व में इन आरोपों को पूरी तरह मनगढ़ंत और बेबुनियाद करार दिया था। बीडीओ का पक्ष रहा है कि ब्लॉक प्रमुख उन पर मानकविहीन और घटिया निर्माण कार्यों की फाइलों को स्वीकृत करने तथा अनुचित भुगतान करने का प्रशासनिक दबाव बना रहे थे। जब उन्होंने नियमों के विरुद्ध जाकर फाइलों पर हस्ताक्षर करने से इनकार कर दिया, तो उनके खिलाफ बदले की भावना से लामबंदी कर झूठी शिकायतें कराई जा रही हैं। बीडीओ के अनुसार, ब्लॉक प्रमुख से जुड़े कुछ निर्माण कार्यों की गुणवत्ता जांच में गंभीर कमियां पाई गई थीं।

मामले में बीडीओ का ताजा पक्ष जानने के लिए जब उनके आधिकारिक सीयूजी मोबाइल नंबर पर संपर्क करने का प्रयास किया गया, तो फोन स्विच ऑफ मिला।

संयुक्त जांच टीम और स्थानांतरण की मांग

परसेंडी विकासखंड में बीडीओ और ब्लॉक प्रमुख के बीच उपजे इस विवाद से क्षेत्र के विकास कार्य प्रभावित हो रहे हैं। ब्लॉक प्रमुख राजेंद्र प्रसाद राजवंशी ने जिलाधिकारी से मांग की है कि राजस्व और विकास विभाग के वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारियों की एक संयुक्त जांच टीम गठित की जाए। यह टीम प्रत्येक विवादित कार्यस्थल का भौतिक सत्यापन करे, तकनीकी माप और गुणवत्ता की जांच करे और वित्तीय रिकॉर्ड का मिलान करे।

ब्लॉक प्रमुख ने चेतावनी दी है कि जब तक बीडीओ का स्थानांतरण नहीं होता, तब तक निष्पक्ष जांच संभव नहीं होगी क्योंकि वे संबंधित पत्रावलियों को प्रभावित कर सकते हैं। अब सबकी नजरें जिला प्रशासन पर टिकी हैं कि क्या जिलाधिकारी मामले का संज्ञान लेकर स्थलीय जांच के आदेश देते हैं या दोनों पक्षों के बीच सुलह का रास्ता निकाला जाता है।

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