Special Article: महारैली बनाम पदयात्राएं
चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण राजनैतिक वातावरण गर्म है
लेखक- मृत्युंजय दीक्षित
चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे मतदाता सूची विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के कारण राजनैतिक वातावरण गर्म है। कांग्रेस के नेतृत्व वाले इंडी गठबंधन ने एक प्रतीकात्मक संसद का आयोजन किया और उसमें मुख्य चुनाव आयुक्त ज्ञानेश कुमार को हटाने का महाभियोग प्रस्ताव पारित किया। उसके बाद दिल्ली में 10 लाख लोगों के आने के दावे के साथ एक महारैली का भी आयोजन किया। दूसरी ओर भारतीय जनता पार्टी ने एसआईआर को लेकर की गई इस महारैली को “वेस्ट ऑफ टाइम“ बता दिया।
विडंबना ये है कि राहुल गांधी के नेतृत्व वाला इंडी गठबंधन प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर संविधान बदलने की साजिश रचने का आरोप लगाता रहा है किंतु स्वयं वास्तविक संसद तिरस्कार करते हुए, नकली संसद चला रहा है। क्या ये संवैधानिक व्यवस्था का अपमान नहीं हैं? नकली संसद लगाकर कांग्रेस व इंडी गठबंधन ने भारतीय जनता पार्टी को एक बार फिर यह कहने का अवसर दे दिया कि कांग्रेस अभी तक गुलामी की मानसिकता में जी रही है। कांग्रेस पार्टी का यह जनमहाभियोग कार्यक्रम उसी प्रकार आयोजित किया गया था जिस प्रकार कभी जंगलों में माओवादी -नक्सलवादी आतंकी संगठन अपनी सरकार -न्यायालय चलाकर उनमें एकतरफा सुनवाई के बाद लोगों की बेरहमी से हत्या कर देते थे। नकली संसद में जिस प्रकार के भाषण दिए गए वह उसी खतरनाक नक्सलवादी मानसिकता का प्रतीक थे।
राहुल गांधी तथा उनके सहयोगी जो संविधान की लाल किताब लेकर चल रहे हैं और संविधान की दुहाई दे रहे हैं वे वास्तव लोकतंत्र की मर्यादा को लांघकर ही यह कृत्य कर रहे हैं। वर्ष 2024 के लोकसभा चुनावों में राहुल नेता प्रतिपक्ष बने और उसी चुनाव को वह अवैध बता रहे हैं, तो वे अवैध हैं क्या ? राहुल गांधी ने सदन को कभी गंभीरता से नहीं लिया, कभी वह प्रधानमंत्री के गले पड़ जाते है, कभी सांसदों को आंख मारते हैं और कभी भगवानों के चित्र लेकर पहुँच जाते हैं और नकली संसद का आयोजन कर भारतीय संविधान और संसद का माखौल उड़ाते हैं ।
राहुल गाँधी के नेतृत्व में विपक्ष यह कह रहा है कि 2024 व उसके बाद हरियाणा, दिल्ली व महाराष्ट्र के चुनाव में वोट चोरी हुई और उसके गुनहगार ज्ञानेश कुमार को जाना ही होगा। इनको याद रखना चाहिए कि 2024 के लोकसभा चुनावों के समय ज्ञानेश कुमार मुख्य चुनाव आयुक्त नहीं थे। उनकी नियुक्ति 2025 में हुई और उसके बाद पांच राज्यों के विधानसभा चुनाव संपन्न हुए जिसमें हरियाणा, दिल्ली और महाराष्ट्र में भाजपा गठबंधन की सरकार बनीं जबकि जम्मू कश्मीर में उमर अब्दुल्ला के नेतृत्व में नेशनल कांफ्रेंस की सरकार बनी और झारखंड में मुख्यमंत्री हेमंत सोरेन के नेतृत्व वाले गठबंधन की सरकार बनी। एसआईआर के बाद सबसे बड़ा सत्ता परिवर्तन तमिलनाडु में देखने को मिला जहां पर एकदम नई पार्टी टीवीके के नेता थलपति विजय राज्य के मुख्यमंत्री बने।
कांग्रेस और उसके साथी चुनाव आयोग की कार्यशैली पर सवाल खड़े कर उसे कठघरे में लाने का प्रयास कर रहे हैं किंतु उन्हें यह नहीं भूलना चाहिए कि स्वतंत्रता प्राप्ति के बाद 1952 से लेकर 1965 तक देश में दस बार एसआईआर हुआ और कांग्रेस की सत्ता बरकरार रही तो क्या वे सरकारें भी वोटचोरी के कारण ही बन रहीं थी? प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की तीसरी बार सरकार बन जाने के बाद वर्ष 2025 से एसआईआर की प्रक्रिया प्रारंभ हुई तथा अब तक देश के 20 राज्यों में यह कार्य संपन्न हो चुका है। वैसे अब कांग्रेस पार्टी में ही एसआईआर को लेकर मतभेद सामने आ रहे हैं, कर्नाटक में हुई एसआईआर प्रक्रिया पर कांग्रेस सरकार के मंत्री सतीश जारकीहोली ने कहा कि कर्नाटक में एसआईआर सही तरीके से किया गया है, ज्ञातव्य है कि वहां इस प्रक्रिया में 99.32 लाख मतदाताओं के नाम कट गए लेकिन कांग्रेस के नेतृत्व वाला इंडी गठबंधन आगामी प्रत्येक विधानसभा चुनाव में यही मुद्दा उठाकर चुनाव मैदान में उतरने जा रहा है, भले ही उसे जनसमर्थन न प्राप्त हो और अन्दर भी असहमति के स्वर उठ रहे हों ।
यहां पर एक प्रश्न ये भी उठता है कि जब प्रत्येक बूथ पर विपक्षी दलों के बूथ एजेंट सक्रिय थे तो मतदाता सूची में कैसे गड़बड़ी हो गई? क्या विपक्षी दलों को अपने बूथ अध्यक्षों पर भरोसा नहीं है ? इस दृष्टि से तो पहले सभी दलो को अपने बूथ एजेंटों से कड़ी पूछताछ करके सच्चाई पता करनी चाहिए और उन्हें हटाना चाहिए । देशभर में एसआईआर का यह काम राजनीतिक दलों से जुड़े करीब 25 लाख बूथ लेवल एजेंटों तथा बीएलए की देखरेख में हुआ है। इनमें सभी दलों से जुड़े हुए कार्यकर्ता थे जो मृत, स्थानांतरित व अनुपस्थित मतदाताओं की पहचान में बीएलओ की सहायता कर रहे थे। एसआईआर के दौरान राजनीतिक दलों से जुडे़ इन बूथ लेवल एजेंटों के साथ मतदाताओ की सूची भी साझा की गई थी और सभी दलों के बूथ लेवल एजेंटों ने उस पर हस्ताक्षर किए थे, उस समय ही यह बात क्यों सामने नही आई। यदि एसआईआर की प्रक्रिया में कुछ गड़बड़ी हुई है तो उसके लिए यह सभी बीएलए भी सामूहिक रूप से उतने ही जिम्मेदार हैं । राजनीतिक दलों को सबसे पहले अपने बीएलए से ही पूछना चाहिए कि आखिर गड़बड़ी कहां से और क्यों हुई ?
कांग्रेस व इंडी गठबंधन के रवैये को देखकर भारतीय जनता पार्टी ने भी आक्रामक रवैया अपना लिया है तथा “लोकतंत्र बचाओ अराजकता भगाओ” अभियान से जनमानस में कांग्रेस को झूठ बेनकाब करने के लिए देशभर में पदयात्राएं निकाल रही है। गृहमंत्री अमित शाह ने हैदराबाद में ”लोकतंत्र बचाओ अराजकता हटाओ” पदयात्रा के दौरान विपक्षी दलों पर हमला बोलते हुए कहा कि इन 13 करोड़ मतदाताओं में से करीब सवा छह करोड़ ऐसे हैं जो अस्थायी रूप से कही चले गए हैं। करीब 2.80 करोड़ लोगों की मृत्यु हो चुकी है। लगभग एक करोड़ वोट ऐसे हैं जिनकी डुप्लीकेट इंट्री है। वहीं 3करोड़ ऐसे हैं जिनका अता -पता नहीं है, इनमें बांग्लादेशी भी हैं। भारतीय जनता पार्टी, कांग्रेस व इंडी गठबंधन की महारैली को घुसपैठिया बचाओ रैली व परिवार बचाओ रैली बताकर हमला बोल रही है। कांग्रेस की महारैली के विरोध में पदयात्राओं का आयोजन किया जा रहा है। राहुल गांधी व विपक्षी दलों के नेता आजकल संविधान की लाल किताब लेकर चल रहे हैं और संविधान का ही उपहास कर रहे हैं।
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