सुप्रीम कोर्ट से राहुल गांधी को बड़ी राहत: पीएम मोदी पर टिप्पणी से जुड़े मानहानि केस की सुनवाई पर लगाई रोक
सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर कथित टिप्पणी से जुड़े आपराधिक मानहानि मामले में लोकसभा में नेता प्रतिपक्ष राहुल गांधी को अंतरिम राहत देते हुए ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर रोक लगा दी है।
- 'कमांडर-इन-थीफ' टिप्पणी मामला: राहुल गांधी के खिलाफ मुंबई ट्रायल कोर्ट की कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने दिया अंतरिम स्टे
- आपराधिक मानहानि मामले में राहुल गांधी को सुप्रीम कोर्ट से अंतरिम राहत, महाराष्ट्र सरकार और शिकायतकर्ता को 4 हफ्ते का नोटिस
- राहुल गांधी मानहानि केस: गिरगांव कोर्ट की कार्यवाही पर सुप्रीम कोर्ट ने लगाई रोक, जानें क्या है पूरा विवाद
सुप्रीम कोर्ट ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के खिलाफ की गई एक राजनीतिक टिप्पणी को लेकर दायर आपराधिक मानहानि के मामले में कांग्रेस सांसद और लोकसभा में विपक्ष के नेता राहुल गांधी को बड़ी अंतरिम राहत दी है। शीर्ष अदालत ने मंगलवार को महाराष्ट्र की संबंधित निचली अदालत (ट्रायल कोर्ट) में चल रही आगे की समस्त कार्यवाही पर अंतरिम रोक लगाने का आदेश पारित किया। इसके साथ ही अदालत ने मामले में प्रतिवादी पक्ष और महाराष्ट्र सरकार को जवाब दाखिल करने के लिए चार सप्ताह का नोटिस जारी किया है।
न्यायमूर्ति विक्रम नाथ और न्यायमूर्ति अपरेश कुमार सिंह की पीठ ने राहुल गांधी द्वारा बॉम्बे हाईकोर्ट के आदेश को चुनौती देने वाली विशेष अनुमति याचिका पर सुनवाई करते हुए यह निर्देश दिया। बॉम्बे हाईकोर्ट ने इससे पहले इस मामले में मजिस्ट्रेट अदालत द्वारा जारी किए गए समन और आपराधिक मानहानि की प्रक्रिया को रद्द करने से इनकार कर दिया था।
- क्या है पूरा मामला?
यह विवाद वर्ष 2018 के दौरान राफेल लड़ाकू विमान सौदे को लेकर राहुल गांधी द्वारा दिए गए बयानों और सोशल मीडिया टिप्पणियों से जुड़ा है, जिसमें उन्होंने प्रधानमंत्री के संदर्भ में "कमांडर-इन-थीफ" और "चोरों के सरदार" जैसे शब्दों का कथित रूप से प्रयोग किया था।
इस बयान के खिलाफ भारतीय जनता पार्टी के एक कार्यकर्ता ने मुंबई की गिरगांव मजिस्ट्रेट अदालत में राहुल गांधी के खिलाफ भारतीय दंड संहिता की धारा 499 और 500 (आपराधिक मानहानि) के तहत निजी शिकायत दर्ज कराई थी। शिकायतकर्ता का तर्क था कि प्रधानमंत्री पर इस तरह की टिप्पणी से पार्टी के कार्यकर्ताओं और सदस्यों की प्रतिष्ठा को ठेस पहुंची है। इसके बाद अगस्त 2019 में मजिस्ट्रेट अदालत ने राहुल गांधी को पेशी के लिए समन जारी किया था।
- सुप्रीम कोर्ट में क्या दलीलें रखी गईं?
शीर्ष अदालत में राहुल गांधी की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता अभिषेक मनु सिंघवी पेश हुए। उन्होंने अदालत के समक्ष दलील दी कि इस मामले में उठाए गए कानूनी प्रश्न बिल्कुल वैसे ही हैं जो पहले से ही सुप्रीम कोर्ट के समक्ष अन्य समान याचिकाओं में विचाराधीन हैं। बचाव पक्ष का यह भी तर्क रहा है कि दिए गए राजनीतिक बयानों में किसी स्पष्ट या व्यक्तिगत रूप से चिन्हित वर्ग को निशाना नहीं बनाया गया था, लिहाजा मानहानि की धाराएं लागू नहीं होतीं।
पीठ ने संक्षिप्त सुनवाई के बाद आदेश दिया कि मामले में नोटिस जारी किया जाए, जिसका जवाब चार हफ्तों में दिया जाना है। अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि तब तक ट्रायल कोर्ट के समक्ष चल रही किसी भी कार्यवाही पर रोक लागू रहेगी।
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