Telangana Hospital Fire: आदिलाबाद के रिम्स अस्पताल के एसएनसीयू वार्ड में लगी भीषण आग, 5 दिन के नवजात की मौत; 28 बच्चे सुरक्षित बचाए गए
तेलंगाना के आदिलाबाद स्थित रिम्स (RIMS) अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में आग लगने से 5 दिन के नवजात की मौत हो गई, जबकि 28 बच्चों को सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया।
आदिलाबाद/हैदराबाद। तेलंगाना के आदिलाबाद जिले में स्थित प्रमुख सरकारी स्वास्थ्य केंद्र राजीव गांधी आयुर्विज्ञान संस्थान (रिम्स - RIMS) के शिशु गहन चिकित्सा कक्ष में एक दर्दनाक हादसा सामने आया है। अस्पताल के स्पेशल न्यूबॉर्न केयर यूनिट (SNCU) में अचानक भीषण आग लगने और दमघोंटू धुआं भर जाने के कारण पांच दिन के एक नवजात शिशु की झुलसने व दम घुटने से मौत हो गई। हालांकि, मौके पर मौजूद ऑन-ड्यूटी नर्सिंग स्टाफ, डॉक्टरों और अस्पताल कर्मचारियों की त्वरित सूझबूझ से वार्ड में भर्ती अन्य 28 नवजात शिशुओं को खिड़कियों और वैकल्पिक द्वारों के रास्ते सुरक्षित बाहर निकाल लिया गया, जिससे एक बहुत बड़ा हादसा होने से टल गया।
घटना के समय एसएनसीयू वार्ड में कुल 29 नवजात गंभीर स्थितियों में इनक्यूबेटर और वार्मर पर उपचाराधीन थे। प्रत्यक्षदर्शियों के अनुसार, तड़के वार्ड के भीतर लगे एक वार्मर या एयर कंडीशनिंग यूनिट से अचानक चिंगारी निकली और कुछ ही सेकंडों में प्लास्टिक व फाइबर के उपकरणों ने आग पकड़ ली। धुएं का गुबार इतनी तेजी से फैला कि पूरे शिशु वार्ड में दृश्यता शून्य हो गई और अलार्म बजने से अस्पताल परिसर में चीख-पुकार मच गई।
स्टाफ का साहसिक रेस्क्यू: 28 नवजातों को सुरक्षित शिफ्ट किया गया
आग की लपटें फैलते ही ड्यूटी पर तैनात मेडिकल व पैरामेडिकल कर्मचारियों ने अद्वितीय साहस का परिचय दिया। आग बुझाने के शुरुआती उपकरणों का इस्तेमाल करते हुए कर्मियों ने तुरंत रेस्क्यू ऑपरेशन शुरू किया। नर्सों और वार्ड सहायकों ने जान की बाजी लगाकर घने धुएं के बीच से एक-एक कर नवजातों को अपनी गोद में उठाया और उन्हें सुरक्षित स्थान पर पहुंचाया।
सुरक्षित निकाले गए 28 बच्चों को अस्पताल के दूसरे सुरक्षित वार्ड और निकटवर्ती निजी नर्सिंग होम के पीडियाट्रिक आईसीयू में तत्काल स्थानांतरित किया गया, जहां बाल रोग विशेषज्ञों की एक विशेष टीम उनकी श्वसन और ऑक्सीजन प्रणाली पर लगातार नजर बनाए हुए है। डॉक्टरों का कहना है कि बचाए गए सभी बच्चे स्थिर हैं और उन्हें किसी गंभीर संकट से बाहर निकाल लिया गया है। हालांकि, जिस वार्मर के निकट आग की लपटें सबसे तीव्र थीं, वहां रखा पांच दिन का नवजात आग की चपेट में आ गया और गंभीर रूप से झुलस जाने के कारण उसकी दुखद मृत्यु हो गई।
परिजनों का फूटा गुस्सा, अस्पताल पर लापरवाही के गंभीर आरोप
हादसे की खबर फैलते ही नवजातों के माता-पिता और सैकड़ों तीमारदार अस्पताल परिसर में जमा हो गए। मृत बच्चे के बेबस परिजनों का रो-रोकर बुरा हाल था। आक्रोशित परिजनों ने अस्पताल प्रशासन के खिलाफ विरोध प्रदर्शन करते हुए घोर लापरवाही के आरोप लगाए। परिजनों का कहना था कि अस्पताल के सबसे संवेदनशील वार्ड में अग्निशमन उपकरण पूरी तरह दुरुस्त नहीं थे और आग लगने के बाद आपातकालीन बिजली कटने में अनावश्यक देरी हुई।
स्थिति की गंभीरता को देखते हुए स्थानीय पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी भारी पुलिस बल के साथ रिम्स परिसर पहुंचे और स्थिति को नियंत्रित किया। पुलिस व जिला प्रशासन के अधिकारियों ने शोकाकुल परिजनों से बातचीत कर उन्हें निष्पक्ष जांच और दोषियों के विरुद्ध कड़ी कार्रवाई का भरोसा दिलाया।
प्रथम दृष्टया शॉर्ट सर्किट की आशंका, तकनीकी जांच समिति गठित
अग्निशमन विभाग के अधिकारियों ने मौके पर पहुंचकर आग पर पूरी तरह काबू पाया। प्राथमिक तकनीकी आकलन के अनुसार, आग लगने का मुख्य कारण बिजली का शॉर्ट सर्किट प्रतीत हो रहा है। लगातार 24 घंटे चलने वाले जीवनरक्षक वार्मर, फोटोथेरेपी यूनिट और एयर कंडीशनर के अत्यधिक विद्युत भार (ओवरलोडिंग) के चलते तारों में स्पार्किंग होने की संभावना जताई जा रही है।
राज्य के स्वास्थ्य विभाग और जिला कलेक्टर ने मामले का त्वरित संज्ञान लेते हुए एक उच्चस्तरीय जांच समिति गठित कर दी है। इस तकनीकी जांच दल में विद्युत सुरक्षा निरीक्षक, अग्निशमन अधिकारी और वरिष्ठ प्रशासनिक अधिकारी शामिल हैं। समिति को 24 से 48 घंटे के भीतर विस्तृत जांच रिपोर्ट सौंपने के निर्देश दिए गए हैं, जिसमें यह तय किया जाएगा कि क्या अस्पताल में नियमित फायर सेफ्टी ऑडिट और इलेक्ट्रिकल मेंटेनेंस किया जा रहा था अथवा नहीं।
अस्पतालों में फायर सेफ्टी ऑडिट पर उठे सवाल
आदिलाबाद की इस घटना ने एक बार फिर देश भर के सरकारी और निजी अस्पतालों में विशेष देखभाल इकाइयों (ICU/SNCU) की सुरक्षा व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े कर दिए हैं। बच्चों के वार्डों में अत्यधिक संवेदनशील इलेक्ट्रॉनिक गैजेट्स और ऑक्सीजन पाइपलाइनों की मौजूदगी के कारण आग लगने का खतरा हमेशा बना रहता है। स्वास्थ्य विशेषज्ञों ने मांग की है कि सभी अस्पतालों में केवल औपचारिक फायर अनापत्ति प्रमाण पत्र (NOC) जारी करने के बजाय नियमित अंतराल पर रियल-टाइम सेफ्टी मॉकड्रिल और इलेक्ट्रिकल लोड टेस्टिंग को अनिवार्य किया जाना चाहिए ताकि भविष्य में किसी भी मासूम की जान इस प्रकार की तकनीकी लापरवाही की भेंट न चढ़े।
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