गुजरात के कच्छ में धार्मिक स्थलों को हटाए जाने के बाद तनाव, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की टीम ने किया दौरा, कानूनी कार्रवाई की तैयारी

जांच टीम ने प्रभावित मस्जिद के प्रबंधकों और स्थानीय निवासियों से बातचीत की तथा वकीलों के साथ कानूनी रास्तों पर विचार-विमर्श किया। पीड़ित स्थानीय लोगों का आरोप है कि अचानक सुबह के समय बिना किसी पूर्व सूचना के इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया और जब लोगों ने इसका विरोध करना चाहा, तो उन्हें वहां से हटा दिया गया।

Jun 29, 2026 - 23:39
 0  2
गुजरात के कच्छ में धार्मिक स्थलों को हटाए जाने के बाद तनाव, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की टीम ने किया दौरा, कानूनी कार्रवाई की तैयारी
गुजरात के कच्छ में धार्मिक स्थलों को हटाए जाने के बाद तनाव, जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की टीम ने किया दौरा, कानूनी कार्रवाई की तैयारी

गुजरात के सीमावर्ती जिले कच्छ के भुज और आसपास के इलाकों में मस्जिदों तथा अन्य धार्मिक स्थलों को हटाने की प्रशासनिक कार्रवाई के बाद स्थानीय लोगों में काफी नाराजगी है। गांधीधाम इलाके में एक पुरानी मस्जिद को प्रशासन द्वारा हटाने की बात सामने आई है, जिसे स्थानीय लोग ऐतिहासिक महत्व का बताते हैं। इस घटना के बाद जमीयत उलेमा-ए-हिन्द के अध्यक्ष मौलाना महमूद मदनी के कहने पर संगठन की एक बड़ी टीम जमीनी हकीकत जानने के लिए प्रभावित इलाकों में पहुंची है। इस टीम के प्रमुख संगठन के महासचिव मौलाना मोहम्मद हकीमुद्दीन क़ासमी हैं, जिनके साथ कई कानूनी विशेषज्ञ और वरिष्ठ लोग भी मौजूद हैं।

जांच टीम ने प्रभावित मस्जिद के प्रबंधकों और स्थानीय निवासियों से बातचीत की तथा वकीलों के साथ कानूनी रास्तों पर विचार-विमर्श किया। पीड़ित स्थानीय लोगों का आरोप है कि अचानक सुबह के समय बिना किसी पूर्व सूचना के इस कार्रवाई को अंजाम दिया गया और जब लोगों ने इसका विरोध करना चाहा, तो उन्हें वहां से हटा दिया गया। प्रबंधकों के अनुसार, यह धार्मिक स्थल पिछले कई दशकों से सरकारी वक्फ के रिकॉर्ड में पंजीकृत है। इसके अलावा एक अन्य इलाके में भी जामा मस्जिद को हटाए जाने की बात कही जा रही है।

स्थानीय लोगों से मिली जानकारी के मुताबिक, अब तक इलाके में कई निर्माण कार्यों को हटाया जा चुका है, जिनमें धार्मिक स्थल, व्यावसायिक दुकानें और मकान शामिल हैं। इस कार्रवाई का विरोध करने के आरोप में कुछ स्थानीय युवाओं को हिरासत में भी लिया गया है। इस क्षेत्र में अल्पसंख्यक समुदाय की आबादी अच्छी-खासी संख्या में है। अपनी आस्था के केंद्रों पर हुई इस कार्रवाई से स्थानीय लोग खुद को बेहद लाचार महसूस कर रहे हैं।

जमीयत उलेमा-ए-हिन्द की टीम का कहना है कि जो भी धार्मिक स्थल सरकारी वक्फ रिकॉर्ड में दर्ज हैं, उनके मामले में प्रशासन को पूरी कानूनी प्रक्रिया और संवैधानिक नियमों का पालन करना चाहिए। टीम ने ध्यान दिलाया कि देश की सबसे बड़ी अदालत ने भी ऐसे मामलों में तय कानूनी प्रक्रिया अपनाने की बात कही है। इसके साथ ही टीम ने कहा कि यह इलाका अंतरराष्ट्रीय सीमा से काफी दूर है, इसलिए सुरक्षा का हवाला देकर की गई इस कार्रवाई की दोबारा जांच होनी चाहिए। संगठन ने पीड़ित लोगों को भरोसा दिलाया है कि वे इस मामले में अदालत का दरवाजा खटखटाएंगे और जल्द ही जिला प्रशासन के बड़े अधिकारियों से भी मुलाकात करेंगे। यह टीम अपनी पूरी रिपोर्ट केंद्रीय नेतृत्व को सौंपेगी, जिसके बाद आगे की रणनीति तय की जाएगी।

Also Click : Hardoi : पिहानी में सड़क हादसे में बाइक सवार दो दोस्तों की मौत, एक गंभीर, स्वास्थ्य व्यवस्था पर उठे सवाल

What's Your Reaction?

like

dislike

love

funny

angry

sad

wow