Panipat : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की प्रतिनिधि सभा समाप्त, संगठन में बड़ा विस्तार और सामाजिक समरसता पर जोर
आगामी वर्ष में 11 क्षेत्रीय और एक नागपुर वर्ग सहित कुल 96 प्रशिक्षण वर्ग चलेंगे। गौसेवा और ग्राम विकास पर भी योजना बनी। नागरिकों को घर की छत पर सब्जी उगाने, देसी गोबर-गौमूत्र की
राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की तीन दिवसीय अखिल भारतीय प्रतिनिधि सभा समालखा में संपन्न हुई। बैठक में संगठन कार्य के विस्तार, समाज की सज्जन शक्ति को राष्ट्रहित में सक्रिय करने और सामाजिक समरसता के संकल्प पर चर्चा हुई। सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबाले ने बताया कि पिछले साल संघ की शाखाएं लगभग छह हजार बढ़कर 88 हजार से अधिक हो गईं। स्थान भी 55 हजार से ज्यादा हो गए। साप्ताहिक मिलन और मंडलियों की संख्या में भी वृद्धि हुई। अंडमान, अरुणाचल प्रदेश, लेह और दूर-दराज के जनजातीय इलाकों में भी शाखाएं चल रही हैं। संघ शताब्दी वर्ष के कार्यक्रमों में यह विस्तार साफ दिखा।
उन्होंने कहा कि संगठन के साथ समाज में गुणवत्ता बढ़ाने पर भी काम हो रहा है। पंच परिवर्तन के जरिए समाज को सकारात्मक बदलाव के लिए प्रेरित किया जा रहा है। हिंदुत्व सिर्फ विचार नहीं बल्कि जीवन शैली है। समाज की अच्छी शक्ति को एकजुट कर राष्ट्रहित में लगाना जरूरी है। महापुरुषों के कार्यों को जाति-पंथ से ऊपर उठकर अपनाना चाहिए। इसी क्रम में गुरु तेग बहादुर के बलिदान के 350वें वर्ष पर दो हजार से ज्यादा कार्यक्रम हुए, जिनमें सात लाख से अधिक लोग शामिल हुए। वंदेमातरम की 150वीं वर्षगांठ भी उत्साह से मनाई गई। अगले साल संत रविदास के 650वें प्राकट्य वर्ष पर कार्यक्रम होंगे।
आगामी वर्ष में 11 क्षेत्रीय और एक नागपुर वर्ग सहित कुल 96 प्रशिक्षण वर्ग चलेंगे। गौसेवा और ग्राम विकास पर भी योजना बनी। नागरिकों को घर की छत पर सब्जी उगाने, देसी गोबर-गौमूत्र की खाद इस्तेमाल करने और हरित घर बनाने के लिए प्रेरित किया जाएगा। संगठनात्मक संरचना में विकेंद्रीकरण पर विचार हुआ। प्रांतों की जगह छोटी इकाई संभाग बनाने का प्रस्ताव है, जिससे 46 प्रांतों की जगह 80 से ज्यादा संभाग होंगे।
जातिगत भेद मिटाने के लिए मीडिया को भी आगे आना चाहिए और चुनाव में मतदाताओं की जाति आधारित गिनती बंद होनी चाहिए। अंतरराष्ट्रीय स्थिति में सरकार के कूटनीतिक प्रयासों की सराहना की गई। संघ किसी समुदाय या पंथ के विरोध में नहीं बना। सभी भारतीय जो राष्ट्र को मातृभूमि मानते हैं और भारतीयता जीते हैं, वे हिंदू हैं। संघ में सबका स्वागत है जो समाज के लिए अच्छा काम करता है। अंडमान में नौ द्वीपों से 13 हजार से ज्यादा लोग सरसंघचालक के साथ हिंदू सम्मेलन में शामिल हुए। अरुणाचल प्रदेश में 21 स्वधर्म सम्मेलनों में 37 हजार से अधिक लोग पहुंचे। देश भर में समाज में संघ के लिए उत्साह है।
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