राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता में चमके द दून वैली पब्लिक स्कूल देवबंद के छात्र, मिला चौथा स्थान

भारत विकास परिषद की राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता में द दून वैली पब्लिक स्कूल, देवबंद के विद्यार्थियों ने हिंदी व संस्कृत देशभक्ति गीतों की प्रस्तुति से चतुर्थ स्थान प्राप्त किया।

By INA News Desk
Oct 26, 2026 - 22:11
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राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता में चमके द दून वैली पब्लिक स्कूल देवबंद के छात्र, मिला चौथा स्थान
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देवबंद। भारत विकास परिषद, हस्तिनापुर प्रांत एवं सम्राट शाखा मेरठ के संयुक्त तत्वावधान में आयोजित प्रांतीय राष्ट्रीय समूहगान प्रतियोगिता में द दून वैली पब्लिक स्कूल, देवबंद के छात्र-छात्राओं ने अपनी सुरीली आवाज, अनुशासन और राष्ट्रभक्ति से ओत-प्रोत प्रस्तुति के बल पर विद्यालय का नाम रोशन किया है। 15 प्रतिष्ठित विद्यालयों की कड़ी प्रतिस्पर्धा के बीच विद्यालय की टीम ने प्रभावशाली प्रदर्शन करते हुए प्रतियोगिता में चतुर्थ स्थान प्राप्त किया।

प्रतियोगिता का मूल उद्देश्य स्कूली विद्यार्थियों में देशप्रेम, राष्ट्रीय एकता, भारतीय सांस्कृतिक चेतना और सामूहिक सहभागिता के मूल्यों को सुदृढ़ करना था। द दून वैली पब्लिक स्कूल की ओर से कक्षा 6 से 11 तक के विद्यार्थियों के दल ने प्रतिभाग किया। प्रतिभागियों ने हिंदी एवं संस्कृत भाषा में देशभक्ति से सराबोर गीतों की भावपूर्ण प्रस्तुतियां दीं। विद्यार्थियों के सुर, लय और ताल के सटीक तालमेल के साथ सधे हुए गायन ने निर्णायक मंडल और सभागार में मौजूद दर्शकों को मंत्रमुग्ध कर दिया।

समारोह के समापन पर उत्कृष्ट प्रदर्शन करने वाले विद्यालय दल के सभी प्रतिभागी विद्यार्थियों को प्रशस्ति-पत्र एवं स्मृति चिह्न देकर सम्मानित किया गया। इस गौरवपूर्ण उपलब्धि पर पूरे विद्यालय परिवार में उत्साह और खुशी की लहर है।

विद्यार्थियों की सफलता पर हर्ष व्यक्त करते हुए विद्यालय के चेयरमैन राजकिशोर गुप्ता एवं प्रधानाचार्या सीमा शर्मा ने विजेता टीम को शुभकामनाएं दीं। उन्होंने कहा कि विद्यार्थियों की यह सफलता उनकी निरंतर मेहनत, नियमित रियाज और संगीत शिक्षकों के कुशल मार्गदर्शन का प्रतिफल है। उन्होंने इस बात पर बल दिया कि इस प्रकार की पाठ्य-सहगामी और सांस्कृतिक गतिविधियां बच्चों के संपूर्ण व्यक्तित्व विकास में सहायक होती हैं। विद्यार्थियों को अकादमिक शिक्षा के साथ-साथ सांस्कृतिक मंचों पर भी निरंतर भाग लेते रहना चाहिए, जिससे उनके भीतर आत्मविश्वास, नेतृत्व क्षमता और राष्ट्रहित के संस्कार प्रगाढ़ होते हैं।

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