यूपी में साइबर अपराध रोकने के लिए फॉरेंसिक साइंस संस्थान में रक्षा लेखा विभाग के अफसरों को दी गई ट्रेनिंग
उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में रक्षा लेखा विभाग के 40 अधिकारियों को साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक की आधुनिक तकनीकों की ट्रेनिंग दी गई।
यूपी में साइबर सुरक्षा और फॉरेंसिक क्षमता को मजबूत करने की मुहिम, रक्षा लेखा विभाग के अधिकारियों को दी गई आधुनिक तकनीक की ट्रेनिंग
उत्तर प्रदेश में डिजिटल अपराधों पर लगाम लगाने और सुरक्षा व्यवस्था को अधिक अभेद्य बनाने के लिए तकनीक के इस्तेमाल पर विशेष जोर दिया जा रहा है। इसी सिलसिले में राजधानी लखनऊ स्थित उत्तर प्रदेश स्टेट इंस्टीट्यूट ऑफ फॉरेंसिक साइंस में एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में रक्षा लेखा विभाग, क्षेत्रीय प्रशिक्षण केंद्र, लखनऊ के 40 अधिकारियों को साइबर सुरक्षा और डिजिटल फॉरेंसिक से जुड़ी आधुनिक प्रणालियों की विस्तार से जानकारी दी गई।
संस्थान के संस्थापक निदेशक डॉक्टर जी.के. गोस्वामी ने इस मौके पर अधिकारियों को संबोधित करते हुए कहा कि वर्तमान समय में अपराध का तरीका पूरी तरह बदल चुका है। अब पारंपरिक दुनिया के साथ-साथ डिजिटल दुनिया में भी अपराध तेजी से बढ़ रहे हैं। उन्होंने सचेत किया कि तकनीक के इस दौर में थोड़ी सी भी लापरवाही किसी को भी साइबर धोखाधड़ी का शिकार बना सकती है। आज के समय में डेटा सबसे मूल्यवान और शक्तिशाली माध्यम बन चुका है, जिसे सुरक्षित रखना बेहद जरूरी है।
प्रशिक्षण सत्र के दौरान पुलिस उप महानिरीक्षक हेमराज मीना ने साइबर फॉरेंसिक के बढ़ते महत्व और जांच में इसकी उपयोगिता के बारे में बताया। प्रशिक्षण में शामिल अधिकारियों ने संस्थान की अत्याधुनिक डीएनए और आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (एआई) प्रयोगशालाओं का भी दौरा किया। वहां उन्होंने व्यावहारिक रूप से देखा कि किस तरह जटिल और पेचीदा आपराधिक मामलों को सुलझाने में आधुनिक वैज्ञानिक पद्धतियां और फॉरेंसिक साइंस मददगार साबित होती हैं।
कार्यक्रम के दौरान डॉक्टर इंद्रजीत ने साइबर सुरक्षा के विभिन्न तकनीकी आयामों पर अपना व्याख्यान दिया। इस पूरे सत्र का संचालन जनसंपर्क अधिकारी संतोष तिवारी ने किया और संस्थान के उप निदेशक जितेंद्र श्रीवास्तव ने सभी का धन्यवाद प्रकट किया। इस खास प्रशिक्षण सत्र में उप निदेशक चिरंजीब मुखर्जी, अतुल यादव, डॉक्टर आनंद प्रकाश, अमित मिश्र, राहुल द्विवेदी, डॉक्टर पलक, शैलेंद्र सिंह और कार्तिकेय सहित संस्थान के कई अन्य वरिष्ठ अधिकारी और विशेषज्ञ उपस्थित रहे।
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