यूपी की गौशालाओं में बनेंगे गोबर के दीये और मूर्तियां, आत्मनिर्भरता और रोजगार को मिलेगा बढ़ावा
दीपावली पर यूपी की गौशालाओं में गोबर से दीये और लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां बनाई जाएंगी। पशुधन मंत्री धर्मपाल सिंह ने आत्मनिर्भरता बढ़ाने के दिए निर्देश।
दीपावली के अवसर पर पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को बढ़ावा देने, ग्रामीण क्षेत्रों में आजीविका के नए साधन विकसित करने और गौशालाओं को आर्थिक दृष्टि से सुदृढ़ बनाने के लिए महत्वपूर्ण पहल की गई है। पशुधन एवं दुग्ध विकास मंत्री धर्मपाल सिंह ने राज्य के सभी जनपदों की गौशालाओं में गोबर से निर्मित दीपक, लक्ष्मी-गणेश की मूर्तियां और अन्य पारंपरिक पूजन सामग्री तैयार कराने के निर्देश दिए हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि गोवंश से प्राप्त अवशेषों का विवेकपूर्ण उपयोग कर न केवल गौशालाओं की वित्तीय स्थिति को बेहतर बनाया जा सकता है, बल्कि इससे स्थानीय अर्थव्यवस्था को भी नई गति मिलेगी।
विधान भवन स्थित कार्यालय कक्ष में आयोजित समीक्षा बैठक के दौरान उन्होंने अधिकारियों को निर्देशित किया कि इन उत्पादों के निर्माण में महिला स्वयं सहायता समूहों, स्थानीय ग्रामीण दस्तकारों और युवाओं को सक्रिय रूप से जोड़ा जाए। इससे ग्रामीण अंचल में स्वरोजगार के अवसर बढ़ेंगे और महिलाओं की आर्थिक सहभागिता भी सशक्त होगी। तैयार की जाने वाली पूजन सामग्री की गुणवत्ता, आकर्षक स्वरूप और सुलभ बाजार व्यवस्था पर विशेष ध्यान देने को कहा गया है, जिससे यह उत्पाद आसानी से जन-जन तक पहुंच सकें। इसके प्रचार-प्रसार और बिक्री के लिए स्थानीय स्तर पर लगने वाले पर्वतीय व पारंपरिक हाट-मेलों में विशेष प्रदर्शन स्थल आवंटित किए जाएंगे।

गोबर और मिट्टी के समन्वय से निर्मित ये वस्तुएं भारतीय सनातन संस्कृति के प्रकृति-संरक्षण के संदेश को साकार करती हैं। गौशालाओं को आत्मनिर्भर बनाकर गोवंश की बेहतर देखरेख, पौष्टिक आहार और नियमित चिकित्सा व्यवस्था को सुदृढ़ किया जा सकता है। इसके साथ ही जैविक खाद और अन्य मूल्यवर्धित गौजन्य उत्पादों के व्यावसायिक उत्पादन से गौशालाओं की आर्थिक गतिविधियों का दायरा और विस्तृत होगा, जिससे पर्यावरण और स्वदेशी निर्माण दोनों को बल मिलेगा।
बैठक में पशुधन एवं दुग्ध विकास विभाग के अपर मुख्य सचिव मुकेश कुमार मेश्राम ने विभागीय अमले को निर्देशित किया कि सभी जिलों में इस योजना को व्यावहारिक रूप देने के लिए तत्काल कदम उठाए जाएं। उन्होंने गौशालाओं में उपलब्ध कच्चे माल के कुशल प्रबंधन, कामगारों के कौशल संवर्धन और उत्पादों के विपणन के लिए ठोस रणनीति बनाने पर बल दिया, ताकि आय अर्जन के साथ-साथ यह पहल पर्यावरण संरक्षण की दिशा में एक प्रभावी जन-आंदोलन का रूप ले सके।
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