UP Old Age Homes: यूपी के 75 वृद्धाश्रमों में हर हफ्ते डॉक्टरों की टीम करेगी जांच, मुफ्त दवाओं के साथ योग और पेंशन का सहारा

यूपी के सभी 75 जनपदों के वृद्धाश्रमों में हर सप्ताह विशेषज्ञ डॉक्टरों की टीम स्वास्थ्य जांच करेगी। बुजुर्गों को मुफ्त दवाएं, पेंशन और आयुष्मान लाभ दिया जा रहा है।

By INA News Desk
Sep 22, 2026 - 20:33
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UP Old Age Homes: यूपी के 75 वृद्धाश्रमों में हर हफ्ते डॉक्टरों की टीम करेगी जांच, मुफ्त दवाओं के साथ योग और पेंशन का सहारा
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लखनऊ। जीवन के उत्तरार्ध में बुजुर्गों को सुरक्षित छत के साथ सम्मानजनक, स्वस्थ और सामाजिक सुरक्षा से परिपूर्ण जीवन उपलब्ध कराने के उद्देश्य से उत्तर प्रदेश सरकार ने राज्य के सभी वृद्धाश्रमों में सुविधाओं का व्यापक विस्तार किया है। समाज कल्याण विभाग के अधीन संचालित प्रदेश के सभी 75 जनपदों के वृद्धाश्रमों में अब नियमित रूप से साप्ताहिक स्वास्थ्य परीक्षण शिविर आयोजित किए जाएंगे। इन शिविरों में सरकारी चिकित्सकों का दल सीधे आश्रम पहुंचकर वृद्धजनों की जांच करेगा और जरूरत के अनुसार उन्हें निःशुल्क दवाएं उपलब्ध कराएगा।

शासन की इस नई व्यवस्था का मुख्य केंद्र बुजुर्गों के स्वास्थ्य की सतत निगरानी, समय पर चिकित्सीय हस्तक्षेप और आश्रमों के वातावरण को मानसिक एवं शारीरिक रूप से अनुकूल बनाना है। बुनियादी स्वास्थ्य सुविधाओं के साथ-साथ आश्रमों में रहने वाले संवासियों को राज्य सरकार की सामाजिक सुरक्षा पेंशन और आयुष्मान भारत स्वास्थ्य बीमा कवच से भी शत-प्रतिशत आच्छादित करने की दिशा में ठोस कदम उठाए गए हैं।

मुख्य चिकित्सा अधिकारियों को निर्देश: साप्ताहिक जांच और निःशुल्क दवाएं

समाज कल्याण विभाग की ओर से प्रदेश के समस्त जनपदों के मुख्य चिकित्सा अधिकारियों (CMO) को इस संबंध में स्पष्ट दिशा-निर्देश जारी किए गए हैं। जारी निर्देशों के तहत हर जनपद में चिकित्सकों की एक समर्पित टीम तय दिन आश्रम का भ्रमण करेगी।

इस साप्ताहिक शिविर में संवासियों के निम्नलिखित स्वास्थ्य पहलुओं का परीक्षण किया जाएगा:

  • ब्लड प्रेशर (BP) एवं रैंडम ब्लड शुगर: उम्र से जुड़ी हाइपरटेंशन और डायबिटीज जैसी बीमारियों की प्रारंभिक पहचान व सतत मॉनिटरिंग।

  • नेत्र परीक्षण: मोतियाबिंद, दृष्टि क्षीणता और चश्मे से संबंधित समस्याओं की पहचान कर त्वरित उपचार की व्यवस्था।

  • सामान्य स्वास्थ्य व मौसमी बीमारियां: मौसमी संक्रमण, जोड़ों के दर्द और पोषण संबंधी जरूरतों का चिकित्सीय आकलन।

  • निःशुल्क औषधियां: परीक्षण के तत्काल बाद आश्रम में ही आवश्यक दवाइयों की नियमित खुराक निःशुल्क मुहैया कराना।

इस पहल का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि किसी भी बुजुर्ग को प्राथमिक इलाज के लिए अस्पतालों की लंबी कतारों या परिवहन की कठिनाइयों का सामना न करना पड़े।

पुस्तकालय से टीवी और योग सत्र: मानसिक व शारीरिक सक्रियता पर बल

वृद्धाश्रमों को केवल ठहरने की जगह के रूप में नहीं, बल्कि एक सकारात्मक सामाजिक केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। विभाग ने आश्रम परिसरों में स्वच्छ और शुद्ध पेयजल (RO व्यवस्था) की उपलब्धता अनिवार्य की है।

इसके अतिरिक्त, संवासियों के मानसिक स्वास्थ्य और एकाकीपन को दूर करने के लिए मनोरंजन कक्षों में टेलीविजन और ज्ञानवर्धक पुस्तकों से सुसज्जित पुस्तकालयों की स्थापना की गई है। बुजुर्गों को शारीरिक रूप से सक्रिय और तनावमुक्त बनाए रखने के लिए प्रातःकालीन योग और ध्यान (मेडिटेशन) के नियमित सत्र संचालित किए जा रहे हैं। आश्रमों के दैनिक रख-रखाव, स्वच्छता और आहार की गुणवत्ता की जिला स्तरीय प्रशासनिक अधिकारियों द्वारा समय-समय पर सीधी निगरानी की जा रही है।

6,607 संवासियों को सामाजिक और वित्तीय सुरक्षा का संबल

समाज कल्याण विभाग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार, वर्तमान में प्रदेश के 75 वृद्धाश्रमों में कुल 6,607 वरिष्ठ नागरिक निवास कर रहे हैं। इन सभी बुजुर्गों को राज्य की मुख्यधारा की कल्याणकारी नीतियों से जोड़ने का काम तेज गति से किया गया है।

"वृद्धाश्रमों में बुनियादी सुविधाओं को आधुनिक रूप देने के साथ-साथ हमारी सर्वोच्च प्राथमिकता बुजुर्गों को वित्तीय और स्वास्थ्य सुरक्षा की गारंटी देना है। प्रदेश भर के आश्रमों में रह रहे 6,607 संवासियों में से 4,901 पात्र वृद्धजनों को नियमित रूप से वृद्धावस्था पेंशन का लाभ दिया जा रहा है। इसके साथ ही गंभीर बीमारियों के कैशलेस उपचार के लिए 2,551 बुजुर्गों के आयुष्मान कार्ड बनाए जा चुके हैं। हाल के वित्तीय वर्षों में 1,073 नए संवासियों को इन सामाजिक सुरक्षा योजनाओं से सीधे जोड़ा गया है।" — संजीव सिंह, निदेशक, समाज कल्याण विभाग, उत्तर प्रदेश

उपेक्षित वृद्धजनों के पुनर्वास की दिशा में मील का पत्थर

शहरीकरण और टूटते संयुक्त परिवारों के दौर में बेसहारा, उपेक्षित अथवा परिजनों से दूर रहने को विवश वृद्धजनों के लिए यह एकीकृत व्यवस्था अत्यंत राहतकारी साबित हो रही है। अब आश्रम केवल आवासीय केंद्र न रहकर एक संपूर्ण 'केयर होम' की तरह कार्य कर रहे हैं, जहां रहने, भोजन और स्वास्थ्य के साथ-साथ आर्थिक स्वावलंबन (पेंशन के माध्यम से) और आपातकालीन स्वास्थ्य सुरक्षा (आयुष्मान के जरिए) एक ही स्थान पर सुनिश्चित हो रही है।

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