यूपी में किसान हित सर्वोपरि: नवनियुक्त मंडी सचिवों को मिलेगी विशेष ट्रेनिंग, मंडियों में बढ़ेगी पारदर्शिता
यूपी कृषि उत्पादन मंडी परिषद नवनियुक्त मंडी सचिवों को देगा विशेष प्रशिक्षण। किसानों की समस्याओं के त्वरित समाधान और पारदर्शी व्यवस्था पर दिया गया जोर।
- मुख्यमंत्री योगी की मंशा को धरातल पर उतारने में जुटा मंडी परिषद, किसानों के हित को सर्वोच्च प्राथमिकता
- निदेशक कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने नवनियुक्त मंडी सचिवों से किया संवाद
- गांधी जी एवं शास्त्री जी की जयंती पर उनके चित्रों पर किया माल्यार्पण
- नवनियुक्त मंडी सचिवों की कार्यक्षमता बढ़ाने के लिए दी जाएगी विशेष ट्रेनिंग
- किसानों की समस्याओं के त्वरित निस्तारण और मंडी व्यवस्था में पारदर्शिता पर दिया जोर
उत्तर प्रदेश में किसानों के आर्थिक हितों की सुरक्षा और कृषि विपणन तंत्र को अधिक सुगम बनाने के लिए राज्य कृषि उत्पादन मंडी परिषद ने व्यवस्था को पूरी तरह किसान-केंद्रित बनाने की दिशा में प्रयास तेज कर दिए हैं। राज्य सरकार की प्राथमिकताओं के अनुरूप मंडियों को केवल फसल खरीद-बिक्री तक सीमित न रखकर उन्हें कृषकों के लिए सर्वसुविधायुक्त और पारदर्शी केंद्र के रूप में विकसित किया जा रहा है। इसी क्रम में नवनियुक्त मंडी सचिवों की कार्यक्षमता बढ़ाने और उन्हें व्यावहारिक स्तर पर दक्ष बनाने के लिए एक विशेष प्रशिक्षण कार्यक्रम आयोजित करने का निर्णय लिया गया है।
कृषि उत्पादन मंडी परिषद के निदेशक जितेंद्र प्रताप सिंह ने नवनियुक्त मंडी सचिवों के साथ आयोजित संवाद सत्र में स्पष्ट किया कि मंडियों की समूची व्यवस्था में किसान का हित सर्वोच्च होना चाहिए। उन्होंने बताया कि इस विशेष प्रशिक्षण में नवचयनित सचिवों को मंडी संचालन की तकनीकी बारीकियों, विभागीय कार्यप्रणाली, राजस्व नियमों तथा किसानों से संबंधित विभिन्न व्यावहारिक दिक्कतों के त्वरित समाधान के तौर-तरीके सिखाए जाएंगे। प्रशिक्षण का मुख्य उद्देश्य अधिकारियों में संवेदनशीलता, समयबद्धता और जवाबदेही की कार्यसंस्कृति विकसित करना है, जिससे आर्थिक रूप से कमजोर और सामान्य किसानों को किसी भी स्तर पर भटकना न पड़े।
निदेशक ने मंडी सचिवों को निर्देशित किया कि वे अपने-अपने कार्यक्षेत्रों में किसानों और व्यापारियों के बीच निरंतर संवाद बनाए रखें। मंडियों में बुनियादी सुविधाओं की नियमित निगरानी की जाए ताकि फसल लेकर आने वाले किसानों को किसी प्रकार की असुविधा न हो। इसके साथ ही कृषि जिंसों के तौल, भुगतान और बोली प्रक्रिया में पूर्ण पारदर्शिता सुनिश्चित करने के निर्देश दिए गए हैं। शिकायतों का प्राथमिकता के आधार पर समाधान करना और व्यवस्था को बिचौलियों के प्रभाव से मुक्त रखना प्रशासनिक प्राथमिकताओं में शामिल है।
विपणन निदेशक टी.के. शीबू ने इस अवसर पर कहा कि प्रदेश भर की मंडियों को आधुनिक और जवाबदेह बनाने के लिए लगातार सुधारात्मक कदम उठाए जा रहे हैं। उन्होंने कहा कि मंडी सचिव सीधे तौर पर अन्नदाताओं और प्रशासन के बीच सेतु का कार्य करते हैं, इसलिए उनकी भूमिका व्यवस्था की साख मजबूत करने में अत्यंत निर्णायक है। इस संवाद कार्यक्रम के दौरान विभागीय वरिष्ठ अधिकारी उपस्थित रहे और सभी ने मिलकर किसानों के कल्याण के प्रति अपनी प्रतिबद्धता दोहराई।
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