UP Rajya Sabha Election: यूपी में राज्यसभा की 10 सीटों पर चुनाव का ऐलान, 16 अक्टूबर को मतदान और आज से शुरू होगी नामांकन प्रक्रिया
उत्तर प्रदेश में राज्यसभा की 10 सीटों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया शुरू हो गई है। आज से नामांकन पत्र दाखिल किए जा सकेंगे, जबकि 16 अक्टूबर को मतदान और मतगणना संपन्न होगी।
- Rajya Sabha Polls UP: उत्तर प्रदेश में गरमाई 10 सीटों की सियासी बिसात, आज अधिसूचना के साथ शुरू हुआ नामांकन; 16 अक्टूबर को फैसला
- यूपी राज्यसभा चुनाव 2026: विधानसभा में संख्याबल के आधार पर सीटों का गणित तेज, भाजपा और सपा खेमे में उम्मीदवारों पर मंथन
- Lucknow News: राज्यसभा की 10 सीटों के लिए चुनाव कार्यक्रम घोषित, 16 अक्टूबर को वोटिंग के तुरंत बाद होगी मतगणना
By Vijay Laxmi Singh (Editor- In- Chief)
लखनऊ: उत्तर प्रदेश के राजनीतिक गलियारों में एक बार फिर उच्च सदन यानी संसद के राज्यसभा चुनाव को लेकर सियासी सरगर्मियां चरम पर पहुंच गई हैं। भारत निर्वाचन आयोग द्वारा निर्धारित चुनाव कार्यक्रम के अनुसार राज्य की 10 रिक्त हो रही राज्यसभा सीटों के लिए निर्वाचन प्रक्रिया का औपचारिक शंखनाद हो चुका है। अधिसूचना जारी होने के साथ ही मंगलवार से विधान भवन स्थित रिटर्निंग ऑफिसर के कार्यालय में नामांकन पत्र दाखिल करने का सिलसिला प्रारंभ हो गया है।
आयोग द्वारा घोषित समय-सारणी के मुताबिक, प्रत्याशी निर्धारित अंतिम तिथि तक अपने नामांकन पत्र दाखिल कर सकेंगे, जिसके उपरांत नामांकन पत्रों की जांच और नाम वापसी की औपचारिकताएं पूर्ण की जाएंगी। यदि निर्धारित 10 सीटों के सापेक्ष 10 से अधिक प्रत्याशी चुनाव मैदान में डटे रहते हैं, तो 16 अक्टूबर को उत्तर प्रदेश विधानसभा के तिलक हॉल में सुबह 9:00 बजे से शाम 4:00 बजे तक मतदान कराया जाएगा। मतदान समाप्त होने के उपरांत उसी दिन शाम 5:00 बजे से मतों की गिनती शुरू कर परिणाम घोषित कर दिए जाएंगे।
- विधानसभा में संख्याबल का गणित और जीत का कोटा
उत्तर प्रदेश विधानसभा की मौजूदा दलीय स्थिति को देखते हुए यह चुनाव बेहद दिलचस्प और रणनीतिक हो गया है। राज्यसभा चुनाव में जीत के लिए आवश्यक प्रथम वरीयता के मतों का कोटा निर्धारित फॉर्मूले के अनुसार तय होता है।
- राज्यसभा चुनाव में जीत का कोटा निकालने का नियम:
$$\text{आवश्यक मत} = \left( \frac{\text{कुल वैध मत}}{\text{रिक्त सीटें} + 1} \right) + 1$$
चूंकि उत्तर प्रदेश में 10 सीटों पर चुनाव होना है, इसलिए कुल वैध मतों को 11 से विभाजित कर उसमें एक जोड़ा जाएगा। मौजूदा 403 सदस्यीय विधानसभा में कुछ सीटें रिक्त होने की स्थिति में वास्तविक सदस्यों की संख्या के आधार पर एक प्रत्याशी को जीत दर्ज करने के लिए लगभग 36 से 37 प्रथम वरीयता के वोटों की आवश्यकता होगी।
- भाजपा और एनडीए गठबंधन की स्थिति
सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी और उसके सहयोगी दलों (अपना दल सोनेलाल, राष्ट्रीय लोकदल, सुभासपा और निषाद पार्टी) के पास विधानसभा में स्पष्ट और प्रचंड बहुमत उपलब्ध है। संख्याबल के इस मजबूत आधार पर एनडीए गठबंधन 10 में से कम से कम 7 से 8 सीटों पर बेहद आसानी से और निर्विरोध जैसी स्थिति में जीत हासिल करने की मजबूत स्थिति में है।
भाजपा के शीर्ष नेतृत्व में उम्मीदवारों के चयन को लेकर नई दिल्ली से लेकर लखनऊ तक बैठकों का दौर जारी है। पार्टी सूत्रों के अनुसार, आगामी चुनावी रणनीतियों और सामाजिक समीकरणों को साधने के लिए संगठन से जुड़े वरिष्ठ निष्ठावान कार्यकर्ताओं, क्षेत्रीय संतुलन और विभिन्न वर्गों को प्रतिनिधित्व देने वाले चेहरों को उच्च सदन भेजने की तैयारी की जा रही है। सहयोगी दलों की अपेक्षाओं और उनके साथ सीटों के तालमेल पर भी गहन विमर्श चल रहा है।
- समाजवादी पार्टी और विपक्षी खेमे की तैयारी
मुख्य विपक्षी दल समाजवादी पार्टी (सपा) अपने सहयोगी दलों (कांग्रेस) के संख्याबल के सहारे कम से कम दो सीटों पर सीधे और सुरक्षित रूप से अपने प्रत्याशियों को संसद के उच्च सदन में पहुंचाने की क्षमता रखती है। सपा के पास मौजूद विधायकों की संख्या दो सीटों के लिए आवश्यक आंकड़े को सरलता से पार करती है, किंतु तीसरे प्रत्याशी को मैदान में उतारने की स्थिति में पार्टी को अतिरिक्त प्रथम वरीयता के मतों और क्रॉस-वोटिंग अथवा निर्दलीय विधायकों के समर्थन की आवश्यकता पड़ेगी।
सपा नेतृत्व के समक्ष भी उम्मीदवारों के चयन को लेकर पीडीए (पिछड़ा, दलित, अल्पसंख्यक) फॉर्मूले को लागू करने का दबाव है। पार्टी के रणनीतिकार इस बात पर मंथन कर रहे हैं कि क्या केवल दो सुरक्षित सीटों पर ही प्रत्याशी उतारे जाएं या फिर 11वां उम्मीदवार उतारकर मुकाबले को मतदान तक खींचा जाए। विगत राज्यसभा चुनावों में हुई क्रॉस-वोटिंग के कड़वे अनुभवों को देखते हुए दोनों ही प्रमुख दल अपने-अपने विधायकों की लामबंदी और निगरानी को लेकर अतिरिक्त सतर्कता बरत रहे हैं।
- नामांकन से लेकर मतदान तक की सख्त व्यवस्था
विधानसभा सचिवालय में चुनाव को निष्पक्ष, पारदर्शी और व्यवस्थित तरीके से संपन्न कराने के लिए सुरक्षा के कड़े प्रबंध किए गए हैं। रिटर्निंग ऑफिसर और सहायक रिटर्निंग ऑफिसरों की तैनाती कर दी गई है। नामांकन के दौरान प्रत्याशी के साथ आने वाले प्रस्तावकों की जांच के लिए विशेष व्यवस्था बनाई गई है। राज्यसभा चुनाव में प्रत्येक उम्मीदवार के लिए कम से कम 10 विधायकों का प्रस्तावक के रूप में हस्ताक्षर करना अनिवार्य होता है।
चुनाव आयोग के कड़े निर्देशों के अनुसार पूरी प्रक्रिया की वीडियोग्राफी कराई जाएगी। मतदान के दौरान खुला मतदान (Open Ballot System) प्रणाली लागू रहेगी, जिसके तहत प्रत्येक राजनीतिक दल के विधायक को अपना वोट मतपेटी में डालने से पूर्व अपनी पार्टी के अधिकृत पोलिंग एजेंट को दिखाना अनिवार्य होता है, हालांकि निर्दलीय विधायकों पर यह नियम लागू नहीं होता।
आगामी 16 अक्टूबर को होने वाला यह मुकाबला न केवल संसद में उत्तर प्रदेश के प्रतिनिधित्व को नई दिशा देगा, बल्कि राज्य की दोनों प्रमुख सियासी ताकतों के आंतरिक अनुशासन और रणनीतिक कौशल की भी कड़ी परीक्षा साबित होगा।
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